भारतीय महिला टीम के पूर्व कोच गुरदयाल सिंह का निधन, हॉकी इंडिया ने दी श्रद्धांजलि
नई दिल्ली, 07 नवंबर (हि.स.)। हॉकी इंडिया ने शनिवार को भारतीय महिला हॉकी टीम के पूर्व मुख्य कोच गुरदयाल सिंह भंगू के निधन पर शोक व्यक्त किया। भंगू का 86 वर्ष की आयु में कनाडा के सरे में निधन हो गया। उनके मार्गदर्शन में भारतीय महिला टीम ने 2002 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। टीम की यह ऐतिहासिक उपलब्धि कुछ वर्षों बाद बनी बॉलीवुड फिल्म ‘चक दे! इंडिया’ की प्रेरणा भी बनी।
हॉकी इंडिया ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर शोक संदेश में कहा, “2002 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम के मुख्य कोच रहे गुरदयाल सिंह भंगू के 86 वर्ष की आयु में निधन से हॉकी इंडिया शोकाकुल है। भारतीय हॉकी में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति हमारी हार्दिक संवेदनाएं।”
भंगू को 1998 में भारतीय महिला हॉकी टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया गया था। उस समय विश्व कप में भारतीय टीम 12वें स्थान पर रही थी। भंगू के मार्गदर्शन में टीम ने कुछ ही महीनों बाद एशियाई खेलों में रजत पदक जीता। इसके बाद उन्होंने टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
वर्ष 2002 में इंग्लैंड के मैनचेस्टर में हुए राष्ट्रमंडल खेलों के फाइनल में भारत ने इंग्लैंड को 3-2 से हराकर स्वर्ण पदक जीता था। मुकाबले का फैसला अतिरिक्त समय में हुआ, जहां ममता खरब ने गोल्डन गोल कर भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई। विपरीत परिस्थितियों में मिली इस जीत की कहानी ने फिल्मकार शिमित अमीन को ‘चक दे! इंडिया’ बनाने के लिए प्रेरित किया।
हालांकि, फिल्म में शाहरुख खान द्वारा निभाए गए कबीर खान के किरदार की प्रेरणा मीर रंजन नेगी थे। 1982 के एशियाई खेलों के फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ भारत की हार के बाद नेगी को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। वह 2002 राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय महिला टीम के गोलकीपिंग कोच भी थे।
भंगू का जन्म 3 अक्टूबर 1941 को लायलपुर में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। उन्होंने 1965 में पटियाला स्थित राष्ट्रीय खेल संस्थान में प्रवेश लिया और वहां हॉकी के महान खिलाड़ी ध्यानचंद के मार्गदर्शन में काम किया।
उन्होंने 1972 से 1976 तक नाइजीरिया की महिला हॉकी टीम के मुख्य कोच के रूप में जिम्मेदारी निभाई। उनके मार्गदर्शन में नाइजीरियाई टीम ने 1976 में पहली बार विश्व कप में हिस्सा लिया। इसके बाद 1998 में उन्हें भारतीय महिला टीम का मुख्य कोच बनाया गया।
भारतीय हॉकी में उनके योगदान के लिए उन्हें द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वह यह पुरस्कार पाने वाले हॉकी के पहले कोच थे। बाद में वह कनाडा के सरे में बस गए, जहां 86 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे

