महिला एशिया कप फाइनल: क्रांति गौड़ पर मैच फीस का 10 प्रतिशत जुर्माना, एक डिमेरिट अंक भी जुड़ा

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महिला एशिया कप फाइनल: क्रांति गौड़ पर मैच फीस का 10 प्रतिशत जुर्माना, एक डिमेरिट अंक भी जुड़ा


महिला एशिया कप फाइनल: क्रांति गौड़ पर मैच फीस का 10 प्रतिशत जुर्माना, एक डिमेरिट अंक भी जुड़ा


दुबई, 14 सितंबर (हि.स.)। भारतीय तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ पर श्रीलंका के खिलाफ महिला एशिया कप फाइनल में आईसीसी आचार संहिता के उल्लंघन के लिए मैच फीस का 10 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया है। उनके अनुशासनात्मक रिकॉर्ड में एक डिमेरिट अंक भी जोड़ा गया है।

क्रांति को खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ के लिए आईसीसी आचार संहिता के अनुच्छेद 2.5 के उल्लंघन का दोषी पाया गया। यह अनुच्छेद अंतरराष्ट्रीय मैच में किसी बल्लेबाज के आउट होने के बाद ऐसी भाषा, हरकत या इशारे के इस्तेमाल से संबंधित है, जो बल्लेबाज को अपमानित करे या उसकी ओर से आक्रामक प्रतिक्रिया को उकसा सके।

यह घटना श्रीलंका की पारी के पहले ओवर में हुई। सलामी बल्लेबाज इमेशा दुलानी को आउट करने के बाद क्रांति ने पवेलियन की ओर इशारा किया था। 24 महीने की अवधि में यह उनका पहला अपराध है।

क्रांति ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और आईसीसी अंतरराष्ट्रीय मैच रेफरी पैनल की सुप्रिया रानी दास द्वारा प्रस्तावित सजा को भी स्वीकार कर लिया। इसलिए औपचारिक सुनवाई की जरूरत नहीं पड़ी। मैदानी अंपायर सलीमा इम्तियाज और शथिरा जाकिर जेस्सी, तीसरे अंपायर रोकेया सुल्ताना तथा चौथे अंपायर हुमैरा फाराह ने आरोप लगाया था।

लेवल-1 के उल्लंघन के लिए न्यूनतम सजा आधिकारिक फटकार है, जबकि अधिकतम मैच फीस का 50 प्रतिशत जुर्माना और एक या दो डिमेरिट अंक हो सकते हैं।

पाकिस्तान पर भी जुर्माना

श्रीलंका के खिलाफ शुक्रवार को खेले गए महिला एशिया कप के सेमीफाइनल में धीमी ओवर गति के लिए पाकिस्तान टीम पर भी मैच फीस का पांच प्रतिशत जुर्माना लगाया गया है। आईसीसी अंतरराष्ट्रीय मैच रेफरी पैनल की जीएस लक्ष्मी ने यह सजा सुनाई। समय की छूट को ध्यान में रखने के बाद पाकिस्तान को निर्धारित लक्ष्य से एक ओवर कम पाया गया।

आईसीसी आचार संहिता के अनुच्छेद 2.22 के तहत निर्धारित समय में टीम द्वारा प्रत्येक ओवर कम किए जाने पर खिलाड़ियों की मैच फीस का पांच प्रतिशत जुर्माना लगाया जाता है। पाकिस्तान की कप्तान फातिमा सना ने अपराध स्वीकार कर लिया और प्रस्तावित सजा को मान लिया, इसलिए औपचारिक सुनवाई की जरूरत नहीं पड़ी। मैदानी अंपायर वृंदा राठी और शथिरा जाकिर जेस्सी, तीसरे अंपायर रोकेया सुल्ताना तथा चौथे अंपायर रबाब अहसन ने धीमी ओवर गति का आरोप लगाया था।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे

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