इंग्लैंड के खिलाफ अपना 100वां टी-20 खेलेंगे अक्षर, बोले- इस मुकाम पर पहुंचने की नहीं थी उम्मीद

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इंग्लैंड के खिलाफ अपना 100वां टी-20 खेलेंगे अक्षर, बोले- इस मुकाम पर पहुंचने की नहीं थी उम्मीद


नई दिल्ली, 09 जुलाई (हि.स.)। भारतीय ऑलराउंडर अक्षर पटेल इंग्लैंड के खिलाफ चौथे टी-20 मुकाबले में अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का एक बड़ा मुकाम हासिल करने जा रहे हैं। यह मैच उनके टी-20 अंतरराष्ट्रीय करियर का 100वां मुकाबला होगा।

इस खास उपलब्धि से पहले अक्षर ने कहा कि भारत के लिए 100 टी-20 मैच खेलना हर क्रिकेटर का सपना होता है और उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह इस मुकाम तक पहुंच पाएंगे।

बीसीसीआई के साझा किए गए एक वीडियो में अक्षर पटेल ने कहा, जब मैंने 2015 में अपना पहला टी-20 मैच खेला था, तब कभी नहीं सोचा था कि 100 मैच खेलने का मौका मिलेगा। इंग्लैंड दौरा मेरे लिए बहुत खास है। दूसरे टी-20 में मैंने 100 टी-20 विकेट पूरे किए और अब चौथे टी-20 में 100वां मैच खेलूंगा। यह मेरे लिए बेहद खास पल है और मैं इसका पूरा आनंद ले रहा हूं।

अक्षर ने कहा कि यह उपलब्धि केवल उनकी नहीं, बल्कि उन सभी लोगों की है जिन्होंने उनके सफर में साथ दिया। उन्होंने कहा, जब कोई खिलाड़ी कोई बड़ा मुकाम हासिल करता है तो वह अकेले नहीं करता। मेरे परिवार, कोच, टीम के साथियों और सभी लोगों का मेरी यात्रा में बड़ा योगदान रहा है। इसलिए यह उपलब्धि हम सभी की है।

उन्होंने कहा कि भारत के लिए एक मैच खेलना भी किसी खिलाड़ी का सपना होता है और 100 मैच खेलना उससे भी कहीं अधिक गर्व की बात है।

अक्षर पटेल ने अपने करियर को रोलर-कोस्टर जैसा बताते हुए कहा कि शुरुआती वर्षों में उन्हें बहुत कम मौके मिले।

उन्होंने कहा, पहले पांच-छह वर्षों में मैंने सिर्फ 15-16 टी-20 मैच खेले। लेकिन 2021 के बाद लगातार टीम का हिस्सा बना और पिछले दो टी-20 विश्व कप भी खेले। जब आप 100वें मैच तक पहुंचते हैं तो पूरा सफर यादगार बन जाता है और हर पल एक खूबसूरत याद बनकर सामने आता है।

हाल ही में टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 विकेट पूरे करने वाले अक्षर ने कहा कि व्यक्तिगत रिकॉर्ड से ज्यादा महत्वपूर्ण लगातार बेहतर खिलाड़ी बनना है। उनके अनुसार, वर्षों की मेहनत, गलतियों से मिली सीख और अपनी प्रक्रिया पर भरोसा ही उन्हें इस मुकाम तक लेकर आया है।

अक्षर ने कहा कि 2015 में पदार्पण करने वाले खिलाड़ी और आज के अक्षर पटेल में काफी अंतर है। उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में हर चीज नई लगती थी और दबाव को संभालना मुश्किल होता था, लेकिन अब अनुभव के साथ मैच की परिस्थितियों और दबाव से निपटना आसान हो गया है।

उन्होंने कहा, अगर मुझे अपने युवा वाले अक्षर से मिलने का मौका मिलता तो मैं बस यही सलाह देता कि अपनी गलतियों से जितना हो सके सीखो। क्रिकेट में गलतियां होना स्वाभाविक है, लेकिन उनसे सीखकर खुद को बेहतर बनाना ही सबसे बड़ी बात है। यही सीख मुझे आज इस मुकाम तक लेकर आई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे

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