वित्तीय अनियमितताओं का आरोप, बीएफआई के महासचिव प्रमोद कुमार निलंबित

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वित्तीय अनियमितताओं का आरोप, बीएफआई के महासचिव प्रमोद कुमार निलंबित


नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) ने महासचिव प्रमोद कुमार को कथित तौर पर अधिकारों के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितताओं और जांच प्रक्रिया में सहयोग नहीं करने के आरोपों में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। महासंघ ने स्पष्ट किया है कि यह अंतरिम निलंबन है और इसे आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं माना जाएगा।

बीएफआई की ओर से जारी बयान के अनुसार महासंघ के संविधान की धारा 24 के उपखंड 16 और धारा 24 के उपखंड 36 के तहत यह कार्रवाई की गई है। प्रमोद कुमार पर अधिकारों के खुले दुरुपयोग, जांच प्रक्रिया में सहयोग नहीं करने, जांच में सक्रिय रूप से बाधा डालने और वित्तीय अनियमितताओं तथा अनुचित आचरण के अस्पष्ट मामलों के आरोप लगाए गए हैं।

चैंपियनशिप रद्द होने की जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप

मंगलवार को जारी पत्र में प्रमोद कुमार पर हिमाचल प्रदेश के नाहन में 16 से 23 अगस्त तक प्रस्तावित बीएफआई एलीट पुरुष एवं महिला ओपन मुक्केबाजी चैंपियनशिप 2026 को रद्द किए जाने के मामले की जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप भी लगाया गया है। पत्र में कहा गया है कि वह महासंघ की ओर से आयोजित प्रतियोगिताओं और उसकी प्रतिष्ठा पर असर डालने वाले गंभीर मामले की जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। उन पर स्वतंत्र जांच को डराने और बाधित करने के उद्देश्य से कथित तौर पर अवैध और दुर्भावनापूर्ण नोटिस जारी करने का आरोप भी लगाया गया है।

निलंबन आदेश के अनुसार जांच पूरी होने तक या सक्षम प्राधिकारी द्वारा आदेश में बदलाव अथवा उसे रद्द किए जाने तक प्रमोद कुमार महासचिव के पद पर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर सकेंगे। यह कार्रवाई बीएफआई के संविधान में निर्धारित प्रावधानों के अधीन रहेगी।

जांच समिति के काम में हस्तक्षेप पर रोक

निलंबन की अवधि में प्रमोद कुमार महासंघ के महासचिव के रूप में किसी भी अधिकार, शक्ति या जिम्मेदारी का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। उन्हें बीएफआई के नाम पर पत्राचार करने, नोटिस जारी करने या निर्देश देने से भी रोक दिया गया है।

इसके अलावा, उन्हें जांच समिति की कार्यवाही में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप करने, गवाहों, अधिकारियों या जांच से जुड़े अन्य लोगों को प्रभावित करने के प्रयास से दूर रहने का निर्देश दिया गया है। उन्हें जांच समिति के साथ पूरा सहयोग करने और मांगे जाने पर संबंधित दस्तावेज, रिकॉर्ड, स्पष्टीकरण तथा अन्य जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया है।

महासंघ ने चेतावनी दी है कि निलंबन आदेश का उल्लंघन करने, जांच में बाधा डालने, बीएफआई के अधिकारों का दुरुपयोग करने या जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने का कोई भी प्रयास गंभीरता से लिया जाएगा। ऐसी स्थिति में महासंघ के संविधान और लागू नियमों के तहत आगे अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

पहले अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए थे प्रमोद कुमार

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब प्रमोद कुमार ने इससे पहले बीएफआई अध्यक्ष अजय सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की पहल की थी। उन्होंने इसके पीछे विश्वास पूरी तरह खत्म होने और महासंघ के प्रशासन में गंभीर संकट का आरोप लगाया था।

इसके बाद प्रमोद कुमार ने बीएफआई प्रमुख और कार्यकारी निदेशक कर्नल अरुण मलिक पर अजय सिंह के खिलाफ प्रस्तावित अविश्वास प्रस्ताव को रोकने के लिए आपराधिक धमकी देने का आरोप भी लगाया था।

हालांकि, महासंघ ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा निलंबन अंतरिम और एहतियाती कदम है। आरोपों की जांच निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाएगी और निलंबन अंतिम निर्णय आने तक लागू रहेगा, जब तक सक्षम प्राधिकारी इसमें बदलाव या इसे रद्द नहीं करता।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे

Livevns.news Desk
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