एशियन खेल में भारतीय दूरी धावकों की सफलता के बाद सिमंस की नजर लॉस एंजिल्स ओलंपिक पर
नई दिल्ली, 30 सितंबर (हि.स.)। एशियन खेल 2026 में भारतीय दूरी धावकों के ऐतिहासिक प्रदर्शन के पीछे अमेरिकी कोच स्कॉट सिमंस की भूमिका भी अहम रही है। उनके मार्गदर्शन में अमेरिका के कोलोराडो स्प्रिंग्स स्थित ऊंचाई वाले प्रशिक्षण केंद्र में अभ्यास करने वाले गुलवीर सिंह, सीमा कुमारी और सावन बरवाल ने आइची-नागोया में पदक जीतकर भारत की दूरी दौड़ में नई उम्मीद जगाई है।
सिमंस ने भारतीय दूरी दौड़ को कभी “सोया हुआ दिग्गज” बताया था। अब एशियन खेल में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन के बाद उनकी नजर 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक पर है।
गुलवीर सिंह ने नागोया में पांच दिनों के भीतर चार दौड़ में हिस्सा लेते हुए तीन पदक जीते। उन्होंने पुरुषों की 10,000 मीटर और 1,500 मीटर में रजत तथा 5,000 मीटर में कांस्य पदक हासिल किया। इससे पहले ग्लासगो में 2026 राष्ट्रमंडल खेलों में भी गुलवीर ने 10,000 मीटर में रजत और 5,000 मीटर में कांस्य पदक जीता था। सिमंस के मार्गदर्शन में कोलोराडो स्प्रिंग्स में प्रशिक्षण लेने वाले गुलवीर के लिए मुख्य तैयारी 10,000 मीटर को ध्यान में रखकर की गई थी।
सिमंस ने साई मीडिया से कहा, “योजना बहुत सफल रही। हमने निश्चित रूप से 10,000 मीटर के लिए 100 प्रतिशत तैयारी की थी। गुलवीर ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और रजत पदक हासिल किया। हमें लगा था कि यह उसका सर्वश्रेष्ठ इवेंट है लेकिन इसी तैयारी ने उसे 1,500 मीटर के लिए भी तैयार किया।”
गुलवीर के तीन एशियन खेल पदक 2022 हांगझोऊ खेलों के 10,000 मीटर कांस्य के मुकाबले बड़ी प्रगति को दर्शाते हैं। सिमंस के अनुसार इस सफलता की सबसे बड़ी वजह निरंतरता रही है। उन्होंने 2022 की शुरुआत में बेंगलुरु आने के समय भारतीय दूरी धावकों को देखने का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने इस क्षेत्र को “सोया हुआ दिग्गज” पाया था, लेकिन खिलाड़ियों को अपनी क्षमता तक पहुंचने के लिए समय, सहयोग और निरंतर प्रशिक्षण की जरूरत थी।
सिमंस ने कहा, “हमें सिर्फ समय और भारत सरकार, टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना (टॉप्स), एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एएफआई) और अन्य हितधारकों के सहयोग की जरूरत थी, ताकि इन खिलाड़ियों को सही प्रशिक्षण का अवसर मिले, उन्हें विकसित होने का समय मिले और निरंतरता बनी रहे।”
केंद्रीय खेल मंत्रालय के एसीटीसी सहयोग के तहत एएफआई ने नागोया से पहले गुलवीर जैसे खिलाड़ियों को छह महीने की लगातार अवधि के लिए अमेरिका भेजने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया। इससे गुलवीर को कोलोराडो स्प्रिंग्स में निरंतर प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिला।
सिमंस ने कहा, “मुझे लगता है कि पहले निरंतरता नहीं थी। एशियाई चैंपियनशिप और एशियन खेल के लिए फिटनेस हासिल करने की हमेशा आखिरी समय में जल्दबाजी होती थी। जबकि दूरी दौड़ में, खासकर, यह एक घर बनाने जैसा है। आप हमेशा घर बना रहे होते हैं। जब आप घर नहीं बना रहे होते तो आप उसे गिरा रहे होते हैं। गुलवीर ने एक कदम के बाद दूसरा और फिर उसके बाद एक और कदम बढ़ाते हुए निरंतरता बनाए रखने में शानदार काम किया है।”
सावन बरवाल ने भी रचा इतिहास
इसी प्रशिक्षण माहौल का लाभ सावन बरवाल को भी मिला। बरवाल ने पुरुष मैराथन में 2 घंटे 11 मिनट 37 सेकंड का समय निकालकर रजत पदक जीता। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने अपना राष्ट्रीय रिकॉर्ड बेहतर किया और भारत का एशियन खेल मैराथन में 44 साल का पदक सूखा समाप्त किया।
सिमंस ने कहा कि सीमित मैराथन अनुभव के बावजूद बरवाल की तैयारी को बेहद व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया गया। उन्होंने कोलोराडो स्प्रिंग्स में अनुभवी मैराथन धावकों के साथ प्रशिक्षण को उनके विकास में महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा, “उसे उस स्तर के खिलाड़ियों के साथ प्रशिक्षण करने का मौका मिला है।”
बरवाल की कम उम्र और मैराथन में कम अनुभव का जिक्र करते हुए सिमंस ने कहा, “उसे कुछ मुश्किलें आती हैं क्योंकि वह अभी युवा है और इस दूरी के लिए नया है लेकिन यह बहुत अच्छी तैयारी थी। अगली बार यह और बेहतर होगा। वह मैराथन विशेष तैयारी के जरिए आगे और सुधार कर सकता है और उम्मीद है कि यह प्रगति अंततः उसे बीजिंग विश्व चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई करने में मदद करेगी।”
सीमा कुमारी ने भी जीता कांस्य
भारतीय खिलाड़ियों की सफलता केवल गुलवीर और सावन तक सीमित नहीं रही। सिमंस ने अपने प्रशिक्षण समूह की अन्य भारतीय एथलीटों के प्रदर्शन का भी उल्लेख किया। इनमें सीमा कुमारी शामिल हैं, जिन्होंने नागोया में महिलाओं की 10,000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता। यह इस स्पर्धा में 2010 के बाद एशियन खेल में भारत का पहला पदक है।
सिमंस ने कहा कि इन खिलाड़ियों की सफलता के पीछे एक ऐसा माहौल है, जहां एथलीट साथ में प्रशिक्षण लेते हैं, एक-दूसरे से सीखते हैं और सामूहिक रूप से अगले स्तर तक पहुंचने के लिए खुद को चुनौती देते हैं।
उन्होंने कहा, “जब हम सभी साथ मिलकर प्रशिक्षण लेते हैं, तो हर कोई बेहतर होता है और हर कोई अगले स्तर तक पहुंच सकता है। हमने नागोया में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन में यही देखा।”
लॉस एंजिल्स ओलंपिक पर नजर
अब सिमंस की नजर लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक पर है। उनका मानना है कि कोलोराडो स्प्रिंग्स में प्रशिक्षण ले रहे भारतीय खिलाड़ियों के भीतर अब ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने का विश्वास पैदा हुआ है, हालांकि क्वालीफिकेशन मानक पहले से कहीं अधिक कठिन होते जा रहे हैं।
सिमंस ने कहा, “उन्हें विश्वास है कि वे क्वालीफाई कर सकते हैं और क्वालीफाई करना पहले से कहीं अधिक कठिन है। लेकिन फिर से, वे ऐसे प्रशिक्षण समूह में हैं, जहां दूसरे खिलाड़ी भी इसी लक्ष्य पर नजर लगाए हुए हैं।”
अमेरिकी कोच ने भारतीय लंबी दूरी के कार्यक्रम में अब दो से चार युवा खिलाड़ियों को शामिल करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक इस स्तर की क्षमता हासिल करने में खिलाड़ियों को दो से चार साल लग सकते हैं।
नागोया में भारतीय दूरी धावकों के ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद सिमंस का संदेश साफ है- निरंतर प्रशिक्षण, अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ अभ्यास और लंबी अवधि की योजना के जरिए भारत के दूरी धावक अब बड़े वैश्विक मंच पर भी अपनी दावेदारी मजबूत कर सकते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे

