एशियाई खेल 2026 (विशेष): भारत ने लिखी नई इबारत, 15 अभूतपूर्व उपलब्धियां और 83 नए पदकवीरों का उदय
नई दिल्ली, 03 अक्टूबर (हि.स.)। एशियाई खेल 2026 भारत के लिए सिर्फ पदकों की संख्या बढ़ाने वाला अभियान नहीं रहा बल्कि कई खेलों और स्पर्धाओं में नए इतिहास लिखने वाला संस्करण भी साबित हुआ। उपलब्धियों की सूची पर नजर डालें तो भारत ने कम-से-कम 15 ऐसी उपलब्धियां दर्ज की हैं, जिन्हें पहली बार या ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज किया गया है। इसके अलावा कई खिलाड़ियों ने लंबे अंतराल के बाद देश को पदक दिलाया, पुराने रिकॉर्ड में सुधार किया और कई नए खिलाड़ियों ने पदार्पण करते हुए पदक जीतकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
आधिकारिक उपलब्धि तालिका के अनुसार, भारत के 310 पदार्पण करने वाले खिलाड़ियों में से 83 ने पदक जीते। इनमें 43 महिलाएं और 40 पुरुष शामिल हैं। यानी लगभग 26.77 प्रतिशत पदार्पण करने वाले भारतीय खिलाड़ी एशियाई खेलों में पदक जीतने में सफल रहे। पदार्पण करने वाले पदक विजेताओं ने कुल 41 पदक जीते, जिनमें 14 स्वर्ण, 12 रजत और 15 कांस्य शामिल हैं।
एमएमए से सॉफ्ट टेनिस तक पहली बार भारत की दस्तक
भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धियों की शुरुआत उन खेलों से हुई, जहां इससे पहले एशियाई खेलों में देश का पदक खाता नहीं खुला था।
सुचिका तारियाल ने महिला पारंपरिक 60 किग्रा वर्ग में पदक जीतकर एमएमए में भारत का पहला एशियाई खेल पदक हासिल किया। वहीं, जय मीणा ने पुरुष एकल में कांस्य पदक जीतकर सॉफ्ट टेनिस में भारत को पहला एशियाई खेल पदक दिलाया।
शूटिंग में भी दो स्पर्धाओं में भारत ने पहली बार पदक जीते। महेश्वरी चौहान, परिनाज धालीवाल और राइजा ढिल्लों ने महिला स्कीट टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीता, जबकि परिनाज धालीवाल और अनंतजीत सिंह नरूका ने स्कीट मिश्रित टीम स्पर्धा में कांस्य अपने नाम किया। दोनों उपलब्धियां इन स्पर्धाओं में भारत के पहले एशियाई खेल पदक के रूप में दर्ज हुईं।
रोइंग में सतनाम सिंह और सलमान खान ने पुरुष डबल स्कल्स में कांस्य जीतकर इस स्पर्धा में भारत को पहला एशियाई खेल पदक दिलाया। एथलेटिक्स में बारानिका एलंगोवन ने महिला पोल वॉल्ट में कांस्य जीतकर इस स्पर्धा में भारत का पहला एशियाई खेल पदक हासिल किया।
शूटिंग में पहली बार स्वर्ण, तीरंदाजी में ऐतिहासिक कामयाबी
शूटिंग में कमलजीत और सुरूची इंदर सिंह ने 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। यह इस स्पर्धा में भारत का पहला एशियाई खेल स्वर्ण रहा।
स्क्वैश में अनाहत सिंह ने महिला एकल में रजत पदक जीता। वह एशियाई खेलों में महिला एकल फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं और भारत को इस स्पर्धा में पहला महिला एकल रजत पदक दिलाया।
वुशु में नाओरेम रोशिबिना देवी ने 60 किग्रा महिला सांडा में रजत पदक जीतकर लगातार तीन एशियाई खेलों में पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनने की उपलब्धि हासिल की।
शूटिंग में कायनान चेनाई और नीरू ने ट्रैप मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण जीता। यह एशियाई खेलों में इस स्पर्धा में भारत का पहला स्वर्ण था। दोनों ने 40 में से 34 निशाने लगाकर नया एशियाई रिकॉर्ड भी बनाया।
तीरंदाजी में अंकिता भकत, कुमकुम अनिल मोहोद और कीर्ति ने महिला रिकर्व टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। यह इस स्पर्धा में एशियाई खेलों में भारत का पहला स्वर्ण था। वहीं धीरज बोम्मदेवरा और कुमकुम अनिल मोहोद ने रिकर्व मिश्रित टीम में रजत पदक जीता, जो इस स्पर्धा में भारत का पहला रजत था।
मुक्केबाजी और नौकायन में भी नए अध्याय
मुक्केबाजी में लवलीना बोरगोहेन ने महिला 75 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इस भार वर्ग में एशियाई खेलों का भारत का पहला स्वर्ण हासिल किया।
नौकायन में नेत्रा कुमानन ने महिला डिंगी स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। यह इस स्पर्धा में भारत का पहला एशियाई खेल पदक था।
सेपकटकरॉ में भारतीय टीम ने पुरुष क्वाड्रेंट स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। यह एशियाई खेलों में पुरुष क्वाड्रेंट स्पर्धा में भारत का पहला पदक था।
इस तरह पहली बार पदक जीतने वाले खेलों और स्पर्धाओं की सूची में एमएमए, सॉफ्ट टेनिस, शूटिंग की कई स्पर्धाएं, रोइंग, पोल वॉल्ट, स्क्वैश, तीरंदाजी, मुक्केबाजी, नौकायन और सेपकटकरॉ शामिल रहे।
मीराबाई से हॉकी तक, पुराने इंतजार भी खत्म
भारत की ऐतिहासिक उपलब्धियां केवल पहली बार पदक जीतने तक सीमित नहीं रहीं। मीराबाई चानू ने महिला 49 किग्रा भारोत्तोलन में रजत पदक जीतकर अपने करियर का पहला एशियाई खेल पदक हासिल किया और भारत के 28 साल लंबे भारोत्तोलन पदक सूखे को समाप्त किया।
सावन बरवाल के नाम भी पुरुष मैराथन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। तालिका के अनुसार यह 1982 के बाद भारत का पुरुष मैराथन में पहला एशियाई खेल पदक और देश के बाहर इस स्पर्धा में पहला ऐसा पदक था।
क्रिकेट में शेफाली वर्मा ने महिला टी20 में शतक लगाया। तालिका इसे एशियाई खेलों में किसी भारतीय महिला का पहला शतक और महिला क्रिकेट के एशियाई खेल इतिहास का पहला शतक बताती है। स्मृति मंधाना ने भी 11,000 अंतरराष्ट्रीय रन पूरे करने वाली पहली महिला क्रिकेटर बनने की उपलब्धि दर्ज की।
टेबल टेनिस में मनुष शाह और दिया चितले ने मिश्रित युगल में कांस्य जीता। यह एशियाई खेलों के इतिहास में भारत का टेबल टेनिस में चौथा और मिश्रित युगल में दूसरा पदक था।
कुश्ती में लगातार सफलता
कुश्ती में सुनील कुमार ने 87 किग्रा ग्रीको-रोमन में कांस्य पदक जीतकर एशियाई खेलों में लगातार दो संस्करणों में पोडियम पर पहुंचने वाले पहले भारतीय ग्रीको-रोमन पहलवान की उपलब्धि हासिल की।
नितेश कुमार ने 97 किग्रा ग्रीको-रोमन में रजत जीतकर एशियाई खेलों के फाइनल में पहुंचने वाले और रजत जीतने वाले भारत के इतिहास के केवल दूसरे ग्रीको-रोमन पहलवान बनने की उपलब्धि हासिल की। तालिका में उनके प्रदर्शन को 1962 के रजत पदक विजेता मारुति माने के 64 साल बाद की उपलब्धि के रूप में दर्ज किया गया है।
सुजीत कलकल ने पुरुष 65 किग्रा फ्रीस्टाइल में स्वर्ण जीतकर इस भार वर्ग में स्वर्ण जीतने वाले भारत के तीसरे पहलवान बनने का रिकॉर्ड बनाया। उनसे पहले योगेश्वर दत्त ने 2014 और बजरंग पूनिया ने 2018 में यह उपलब्धि हासिल की थी।
मुक्केबाजी में परवीन ने महिला 65 किग्रा वर्ग का स्वर्ण जीतकर एशियाई खेलों के इतिहास में स्वर्ण जीतने वाली तीसरी भारतीय महिला मुक्केबाज बनने की उपलब्धि हासिल की।
44 साल बाद महिला हॉकी में स्वर्ण
भारतीय महिला हॉकी टीम ने भी ऐतिहासिक वापसी की। टीम ने स्वर्ण पदक जीतकर 44 साल का इंतजार खत्म किया। इससे पहले भारत ने महिला हॉकी में आखिरी बार 1982 के एशियाई खेलों में स्वर्ण जीता था।
बॉक्सिंग में भारत के अभियान को भी तालिका ने सबसे सफल अभियानों में शामिल किया है। एशियाई खेल 2026 में भारतीय मुक्केबाजों ने कुल छह पदक-तीन स्वर्ण और तीन कांस्य जीते। तालिका के अनुसार स्वर्ण पदकों के लिहाज से यह भारत का मुक्केबाजी में सबसे सफल एशियाई खेल अभियान रहा, जिसने 2010 के प्रदर्शन को पीछे छोड़ा, जब भारत ने दो स्वर्ण, तीन रजत और चार कांस्य सहित कुल नौ पदक जीते थे।
पदार्पण करने वालों ने भी छोड़ी मजबूत छाप
एशियाई खेल 2026 में भारत के 310 खिलाड़ी पहली बार एशियाई खेलों में उतरे। इनमें से 83 खिलाड़ी पदक जीतने में सफल रहे। इनमें 43 महिलाएं और 40 पुरुष हैं। इन पदार्पण करने वाले पदक विजेताओं ने कुल 41 पदक जीते- 14 स्वर्ण, 12 रजत और 15 कांस्य।
खेलवार आंकड़ों में कबड्डी के 15 पदार्पण खिलाड़ियों में सभी 15 पदक विजेता रहे और उन्होंने दो स्वर्ण पदक जीते। एथलेटिक्स में 51 पदार्पण खिलाड़ियों में 14 ने पदक जीते और उनके खाते में एक स्वर्ण, तीन रजत और छह कांस्य सहित 10 पदक रहे।
शूटिंग में 17 पदार्पण खिलाड़ियों में 13 ने पदक जीते। उन्होंने तीन स्वर्ण, छह रजत और दो कांस्य सहित कुल 11 पदक हासिल किए। क्रिकेट में 20 पदार्पण खिलाड़ियों में 10 पदक विजेता रहे और उन्होंने एक स्वर्ण पदक जीता।
तीरंदाजी में नौ पदार्पण खिलाड़ियों में सभी नौ पदक विजेता बने। उनके खाते में चार स्वर्ण और दो रजत सहित छह पदक रहे। मुक्केबाजी में छह पदार्पण खिलाड़ियों में दो ने पदक जीते और उनके खाते में एक स्वर्ण और दो कांस्य सहित दो पदक दर्ज हैं।
रोइंग में 15 पदार्पण खिलाड़ियों में एक पदक विजेता रहा, जबकि स्क्वैश में चार में से तीन पदार्पण खिलाड़ियों ने पदक जीते और कुल दो कांस्य हासिल किए। कुश्ती में 10 पदार्पण खिलाड़ियों में दो ने पदक जीते—एक स्वर्ण और एक रजत। सेपकटकरॉ में 14 पदार्पण खिलाड़ियों में तीन पदक विजेता रहे और उन्होंने एक कांस्य पदक जीता।
कई पदार्पण खिलाड़ियों ने एक से अधिक पदक भी जीते
पदार्पण करने वाले खिलाड़ियों की व्यक्तिगत सूची यह भी दिखाती है कि कुछ खिलाड़ियों ने अपने पहले ही एशियाई खेल में एक से अधिक पदक जीते। एथलेटिक्स में विशाल थेन्नारासु कायलविझी और मनु थेक्किनालिल साजी ने मिश्रित चार गुणा 400 मीटर रिले में रजत और पुरुष चार गुणा 400 मीटर रिले में कांस्य हासिल किया। यशवीर सिंह ने पुरुष भाला फेंक में पदक जीता, जबकि सावन बरवाल ने पुरुष मैराथन में पदक हासिल किया।
महिला एथलेटिक्स में किरण पहल ने चार गुणा 400 मीटर महिला रिले में स्वर्ण और मिश्रित चार गुणा 400 मीटर रिले में रजत जीता। बारानिका एलंगोवन ने महिला पोल वॉल्ट में पदक हासिल किया।
बैडमिंटन में आयुष शेट्टी, थारुन मन्नेपल्ली और हरिहरन अम्साकरुणन पुरुष टीम के पदक अभियान का हिस्सा रहे। क्रिकेट में प्रतीका रावल, भारती फुलमाली, जी. कमालिनी, श्री चरणी, श्रेयंका पाटिल, राधा यादव, अरुंधति रेड्डी, रेणुका ठाकुर और अन्य पदार्पण खिलाड़ियों ने महिला टीम के स्वर्ण में योगदान दिया।
कबड्डी में भी पदार्पण खिलाड़ियों की बड़ी संख्या ने पदक जीते। महिला और पुरुष दोनों टीमों के कई खिलाड़ी पहली बार एशियाई खेलों में उतरकर स्वर्ण पदक जीतने वाली टीमों का हिस्सा बने। निशानेबाजी, तीरंदाजी, कुश्ती और स्क्वैश में भी कई पदार्पण खिलाड़ियों ने व्यक्तिगत और टीम स्पर्धाओं में पदक हासिल किए।
नए नाम, नए खेल और नए रिकॉर्ड
एशियाई खेल 2026 की उपलब्धियों की यह तस्वीर बताती है कि भारत का अभियान केवल पारंपरिक पदक जीतने वाले खेलों तक सीमित नहीं रहा। एमएमए, सॉफ्ट टेनिस, सेपकटकरॉ, नौकायन और पोल वॉल्ट जैसी स्पर्धाओं में पहली बार पदक जीतने के साथ भारत ने कई नई दिशाओं में अपनी मौजूदगी दर्ज की।
दूसरी ओर, तीरंदाजी, शूटिंग, कुश्ती, मुक्केबाजी, हॉकी और क्रिकेट जैसे खेलों में खिलाड़ियों ने पुराने रिकॉर्ड और उपलब्धियों को आगे बढ़ाया। सबसे खास बात यह रही कि 83 पदार्पण खिलाड़ी पदक जीतने में सफल रहे। इनमें 14 स्वर्ण पदक विजेता शामिल हैं।
इस लिहाज से एशियाई खेल 2026 भारत के लिए केवल पदकों का अभियान नहीं, बल्कि नए खेलों में प्रवेश, ऐतिहासिक सूखे की समाप्ति, पुराने रिकॉर्ड में सुधार और नई पीढ़ी के पदक विजेताओं के उभरने का संस्करण भी बनकर सामने आया।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे

