आज मैं जो कुछ भी हूं, वह खेलो इंडिया की वजह से हूं : दादासो पुजारी

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आज मैं जो कुछ भी हूं, वह खेलो इंडिया की वजह से हूं : दादासो पुजारी


आज मैं जो कुछ भी हूं, वह खेलो इंडिया की वजह से हूं : दादासो पुजारी


दीव, 06 जनवरी (हि.स.)। महाराष्ट्र के उभरते कबड्डी स्टार दादासो शिवाजी पुजारी ने 'खेलो इंडिया बीच गेम्स 2026' में अपने सफर का एक पूरा चक्र पूरा कर लिया है। कोल्हापुर में जन्मे दादासो उसी मंच पर लौटे हैं, जिसने उन्हें प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) तक पहुंचने का रास्ता दिखाया था। दीव के घोघला बीच की रेतीली सतह पर खेलते हुए दादासो अब अपने अनुभव से नई पीढ़ी को प्रेरित कर रहे हैं।

दादासो ने भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) मीडिया से बातचीत में कहा कि आज मैं जो कुछ भी हूं, वह खेलो इंडिया की वजह से हूं। पंचकुला के यूथ गेम्स ने मेरे लिए प्रो कबड्डी लीग के दरवाजे खोले। उस स्तर पर खेलने के बाद भी मेरा जुड़ाव खेलो इंडिया से बना रहा। यहां लौटना घर वापसी जैसा लगता है।

खेलो इंडिया यूथ गेम्स पंचकुला से अपने करियर की शुरुआत करने वाले दादासो पुजारी ने तीन सीजन तक प्रो कबड्डी लीग में पुनेरी पलटन के लिए बतौर भरोसेमंद राइट-कॉर्नर डिफेंडर खेला। आज वही खिलाड़ी खेलो इंडिया बीच गेम्स में भाग लेकर यह दिखा रहा है कि किस तरह खेलो इंडिया का रास्ता भारतीय कबड्डी को शीर्ष स्तर तक पहुंचा रहा है और फिर वही खिलाड़ी वापस आकर इस मंच को और मजबूत बना रहे हैं।

मैट कबड्डी में अपनी तेज एंकल होल्ड और मजबूत डिफेंसिव समझ के लिए पहचाने जाने वाले दादासो के लिए बीच कबड्डी एक नई चुनौती है। उन्होंने कहा कि रेत पर खेलना मैट से बिल्कुल अलग है। मूवमेंट धीमा होता है, संतुलन बनाना मुश्किल होता है और हर टैकल में ज्यादा ताकत लगती है, लेकिन यही चुनौतियां एक खिलाड़ी को और बेहतर बनाती हैं।

दादासो अकेले ऐसे खिलाड़ी नहीं हैं जो खेलो इंडिया मंच पर लौटे हैं। खेलो इंडिया बीच गेम्स 2026 के दूसरे संस्करण में प्रो कबड्डी लीग में खेल चुके करीब सात खिलाड़ी अलग-अलग राज्यों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। यही नहीं, हाल ही में जयपुर में संपन्न खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में भी प्रो कबड्डी लीग का अनुभव रखने वाले लगभग 25 खिलाड़ियों ने अपने-अपने विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किया।

दादासो ने कहा कि खेलो इंडिया युवा खिलाड़ियों को एक्सपोजर, आत्मविश्वास और एक साफ दिशा देता है। जब प्रोफेशनल खिलाड़ी वापस आकर यहां खेलते हैं, तो मुकाबले का स्तर अपने आप बढ़ जाता है और युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / वीरेन्द्र सिंह

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