भारत में साइक्लिंग को नई रफ्तार देने की तैयारी, रक्षा खड़से ने तय किया रोडमैप
नई दिल्ली, 02 जुलाई (हि.स.)। केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा खड़से ने गुरुवार को साइक्लिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (सीएफआई) के पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर भारत में साइक्लिंग के खेल को जमीनी स्तर से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक मजबूत बनाने की रणनीति पर चर्चा की। बैठक में प्रतिभा की पहचान, खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, कोचिंग और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में बेहतर प्रदर्शन के लिए व्यापक रोडमैप तैयार करने पर जोर दिया गया।
बैठक में पुणे ग्रैंड टूर के आगामी आयोजन की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने कहा कि इस तरह की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं भारतीय खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय अनुभव प्रदान करने के साथ-साथ भारत की वैश्विक खेल आयोजक के रूप में पहचान भी मजबूत करती हैं।
साइक्लिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के महासचिव मनिंदर पाल सिंह ने बताया कि यूनियन साइक्लिस्ट इंटरनेशनल (यूसीआई) की वार्षिक रिपोर्ट-2026 में वैश्विक साइक्लिंग के विकास में भारत के बढ़ते योगदान को विशेष रूप से सराहा गया है। रिपोर्ट में पुणे ग्रैंड टूर-2025 और भारतीय साइक्लिंग के विकास की भी प्रशंसा की गई है।
बैठक में भारतीय साइक्लिंग की एक बड़ी उपलब्धि का भी उल्लेख किया गया। हर्षिता जाखड़ के बाद अब भारत के पांच शीर्ष स्प्रिंटर—रोनाल्डो सिंह, एसो अल्बान, रोजित सिंह, डेविड बेकहम एलकटोचूंगो और जेम्स सिंह—सहित चार सहयोगी स्टाफ सदस्यों का चयन स्विट्जरलैंड स्थित यूसीआई वर्ल्ड साइक्लिंग सेंटर के प्रतिष्ठित प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए हुआ है। मंत्री ने इसे भारतीय साइक्लिंग के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे खिलाड़ियों और कोचों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण एवं खेल विज्ञान का लाभ मिलेगा।
बैठक में खेलो इंडिया अस्मिता साइक्लिंग सिटी लीग की प्रगति की भी समीक्षा की गई। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई यह पहल देश के सबसे बड़े महिला-केंद्रित ग्रासरूट साइक्लिंग कार्यक्रमों में शामिल हो चुकी है। मंत्री ने कहा कि इससे महिला खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का बेहतर मंच मिला है और भविष्य के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान आसान हुई है।
रक्षा खड़से ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसी योजनाओं के माध्यम से देश का खेल तंत्र तेजी से मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि मजबूत ग्रासरूट व्यवस्था, गुणवत्तापूर्ण कोचिंग, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और नियमित अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में भागीदारी भारतीय साइक्लिस्टों को एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल, विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक में बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार करेगी।
बैठक में खेल अवसंरचना के विस्तार, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, खेल विज्ञान के अधिक उपयोग और जिला स्तर से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक खिलाड़ियों के लिए सुगम प्रगति पथ विकसित करने पर भी सहमति बनी। सरकार ने विकसित भारत-2047 के लक्ष्य के अनुरूप भारत में विश्वस्तरीय खेल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय

