बल्लेबाज ओली पोप को भरोसा- एशेज में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद भी दिखाएंगे अपना सर्वश्रेष्ठ

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बल्लेबाज ओली पोप को भरोसा- एशेज में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद भी दिखाएंगे अपना सर्वश्रेष्ठ


बल्लेबाज ओली पोप को भरोसा- एशेज में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद भी दिखाएंगे अपना सर्वश्रेष्ठ


नई दिल्ली, 18 मार्च (हि.स.)। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एशेज सीरीज में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद इंग्लैंड के बल्लेबाज ओली पोप का मानना है कि उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन अभी आना बाकी है। इस सीरीज में इंग्लैंड को 4-1 से हार मिली थी और खराब फॉर्म के चलते पोप को टीम से बाहर भी होना पड़ा था। 28 वर्षीय बल्लेबाज ने ऑस्ट्रेलिया में खेले शुरुआती तीन टेस्ट मैचों में कुल 125 रन बनाए, जो उनके स्तर के हिसाब से काफी निराशाजनक रहा।

दौरे के बाद जब इंग्लैंड टीम की प्रतिबद्धता पर सवाल उठे तब पोप ने इसे आत्ममंथन और नए सिरे से तैयारी का मौका माना। अब उनका पूरा ध्यान खुद को बेहतर बनाने पर है, ताकि आगामी टेस्ट सीरीज के लिए टीम में वापसी कर सकें।

एशेज के दौरान छह पारियों में से एक में भी पोप पचास रन नहीं बना पाए और चौथे व पांचवें टेस्ट में उन्हें बेंच पर बैठा दिया गया था। उनकी जगह प्लेइंग इलेवन में जैकब बेथेल को शामिल किया गया था।

आईसीसी के अनुसार सरे के प्री-सीजन मीडिया डे पर पोप ने कहा कि मुझे अपनी स्थिति का पता था। टीम से बाहर होना मुश्किल था, लेकिन उस समय यह सही फैसला था।

उन्होंने आगे कहा कि बातचीत का मकसद बस यही था कि वापस जाकर खूब रन बनाऊं और अगर इंग्लैंड की प्लेइंग इलेवन में जगह न मिले तो यह सुनिश्चित करूं कि मैं देश का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज साबित होऊं। अगर कुछ होता है तो यह सुनिश्चित करना है कि मेरी जगह लेने के लिए मैं ही सही खिलाड़ी हूं। मैंने बहुत टेस्ट क्रिकेट खेला है, लेकिन मुझे अब भी लगता है कि मेरे बल्लेबाजी के सर्वश्रेष्ठ दिन अभी आने बाकी हैं।

पोप ने 'इंग्लैंड एशेज जीतने को लेकर गंभीर नहीं था' आरोपों पर भी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हम मैदान के अंदर और बाहर दोनों जगह एक लोकप्रिय टीम बनना चाहते हैं और दुर्भाग्य से ऑस्ट्रेलिया में हमारे प्रदर्शन ने ऐसा होने नहीं दिया। मैं समझ सकता हूं कि लोगों को ऐसा क्यों लगा। यह धारणा कि हम बेफिक्र थे, शायद सबसे मुश्किल बात थी। हर खिलाड़ी एशेज सीरीज के दबाव को संभालने और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश कर रहा था।

उन्होंने कहा कि हर कोई सिर्फ जीतना चाहता था। मुझे लगता है कि शायद कभी-कभी हमारे मन में यही बात थी कि हम टेस्ट मैच के दबाव को कम करने के लिए, जैसा कि हमने पिछले दौरों में किया था, इसे एक सामान्य सीरीज की तरह लें ताकि हम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें। दुर्भाग्य से, ऐसा नहीं हो पाया।

अपने प्रदर्शन का विश्लेषण करते हुए पोप ने माना कि उन्होंने अपनी स्वाभाविक शैली से हटकर खेलने की कोशिश की, जो उनके लिए नुकसानदायक साबित हुई। उन्होंने कहा कि मैं यह नहीं कहूंगा कि इसमें कोई बड़ी तकनीकी खामी थी, शायद मैं उस समय अनजाने में ही गेंदबाजों पर दबाव डालने के लिए कुछ ज्यादा ही उत्सुक था। जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं और इस पर विचार करता हूं, तो शायद यही मेरी गलती थी।

अब पोप का पूरा फोकस घरेलू क्रिकेट में दमदार प्रदर्शन कर इंग्लैंड टेस्ट टीम में वापसी करना है। उनका विश्वास साफ है कि यह सिर्फ एक खराब दौर है और उनका सर्वश्रेष्ठ अभी आना बाकी है।---------------

हिन्दुस्थान समाचार / वीरेन्द्र सिंह

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