एक ही कोच के भरोसे रहना, कोच को ट्रेनिंग नहीं देना और कई सालों तक एक ही पद पर जमे रहना बड़ी समस्या: बाईचुंग भूटिया

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एक ही कोच के भरोसे रहना, कोच को ट्रेनिंग नहीं देना और कई सालों तक एक ही पद पर जमे रहना बड़ी समस्या: बाईचुंग भूटिया


एक ही कोच के भरोसे रहना, कोच को ट्रेनिंग नहीं देना और कई सालों तक एक ही पद पर जमे रहना बड़ी समस्या: बाईचुंग भूटिया


रायपुर, 03 अप्रैल (हि.स.)। पूर्व भारतीय फुटबॉलर बाईचुंग भूटिया ने शुक्रवार को कहा कि एक ही कोच के भरोसे रहना, कोच को ट्रेनिंग नहीं देना और कई सालों तक एक ही पद पर जमे रहना बड़ी समस्या है। उन्हाेंने यह बात छत्तीसगढ़ की मेजबानी में पहली बार आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के समापन समारोह में मीडिया से कही।

भूटिया ने जहां 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स' की सराहना करते हुए इसे जनजातीय युवाओं के लिए एक नई शुरुआत बताया वहीं विश्व चैंपियन बॉक्सर मैरी कॉम ने भी साइंस कॉलेज मैदान में खिलाड़ियों के प्रदर्शन काे लेकर अपनी बात रखी।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के समापन समारोह में पहुंचे पूर्व भारतीय फुटबॉलर बाईचुंग भूटिया और विश्व चैंपियन बॉक्सर मैरी कॉम ने साइंस कॉलेज मैदान में खिलाड़ियों के प्रदर्शन काे लेकर आज मीडिया से मुखातिब हुए। उन्हाेंने 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स' की सराहना करते हुए इसे जनजातीय युवाओं के लिए एक नई शुरुआत बताया।

छह बार की विश्व चैंपियनशिप पदक विजेता एमसी मैरी कॉम और भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान बाइचुंग भूटिया ने मीडिया से बातचीत में जमीनी स्तर पर निवेश और संरचित विकास प्रणाली के महत्व पर जोर दिया। साथ ही भविष्य के चैंपियन तैयार करने के लिए दोनों दिग्गज खिलाड़ियों ने कहा कि भारतीय परिवारों को बच्चों को अत्यधिक स्क्रीन टाइम से दूर रखने और उन्हें विभिन्न खेलों का अनुभव लेने के लिए मैदान में भेजने की जरूरत है।

भूटिया ने भारतीय फुटबॉल और खेल के बुनियादी ढांचे को लेकर अपनी चिंताएं भी व्यक्त कीं। उन्हाेंने खेल संघों में अधिक पारदर्शिता, प्रतिबद्धता और दीर्घकालिक योजना की आवश्यकता पर बल दिया। उन्हाेंने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसे पहल एक मजबूत शुरुआत जरूर हैं, लेकिन दीर्घकालिक सफलता के लिए देश में खेलों की बुनियाद को और मजबूत करना बेहद जरूरी है। अपने करियर को याद करते हुए उन्होंने बताया कि भारतीय खेल प्राधिकरण ने युवा खिलाड़ियों को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

भूटिया ने कहा, “मैं साई का प्रोडक्ट रहा हूँ। 1986 के पहले बैच का साई प्रोडक्ट। जमीनी स्तर पर निवेश करना बहुत जरूरी है, लेकिन हम अक्सर इसे नजरअंदाज कर देते हैं और केवल शीर्ष स्तर पर ही ध्यान केंद्रित करते हैं।” साथ जी भूटिया ने खेलों की पिरामिड संरचना के आधार को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, खासकर आदिवासी क्षेत्रों में, लेकिन उसे निखरने के लिए सही माहौल और व्यवस्था की जरूरत होती है। युवाओं को मंच देना बहुत जरूरी है। मुझे लगता है कि आने वाले समय में आदिवासी समुदायों से और भी अधिक खिलाड़ी उभरकर सामने आएंगे।

उन्होंने कहा कि जब तक बुनियादी स्तर पर प्रतिभाओं को निखारने के लिए ठोस प्रयास नहीं होंगे, तब तक भारतीय फुटबॉल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष करता रहेगा। उन्हाेंने कहा कि खिलाड़ियों में पोटेंशियल है, लेकिन मेडल नहीं आने के कई कारण हैं। एक ही कोच के भरोसे रहना, कोच को ट्रेनिंग नहीं देना और कई सालों तक एक ही पद पर जमे रहना बड़ी समस्या है। उन्होंने कहा कि जब मेडल आ ही नहीं रहे हैं, तो ऐसे में उनके पद पर बने रहने का कोई मतलब नहीं है। न वे किसी को आगे आने देते हैं और न खुद हटते हैं, बस कुर्सी से चिपक कर बैठे रहते हैं। उन्हाेंने यह भी कहा कि खिलाड़ियों को सही ट्रेनिंग और बेहतर व्यवस्था नहीं मिल पा रही है। जब तक इस व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, तब तक यह शिकायत बनी रहेगी कि मेडल क्यों नहीं आ रहे हैं?

विश्व चैंपियन बॉक्सर मैरी कॉम ने युवा खिलाड़ियों को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनने के लिए कुछ अहम टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि आदिवासी युवाओं में स्वाभाविक रूप से शारीरिक शक्ति और मानसिक सहनशक्ति होती है, जिसे सही समर्थन के साथ विश्व स्तर पर बदला जा सकता है। सफलता के लिए उन्होंने कड़े अनुशासन, अटूट विश्वास और निरंतर प्रयास को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि खेल में अनुशासन ज़रूरी है और टाइमिंग का बहुत महत्वपूर्ण रोल होता है। उसका उपयोग आप कैसे करते हैं, यह आप पर निर्भर करता है। खिलाड़ियों में क्षमता (पोटेंशियल) होने के बावजूद मेडल नहीं आना एक बड़ा कारण है। मैदान में समय देने के बजाय खिलाड़ी सोशल मीडिया पर समय देने लगते हैं। सही समय पर न सोना और न ही सही समय पर उठना भी एक समस्या है। साथ ही खिलाड़ियों को सही ट्रेनिंग और सही डाइट मिलना बेहद ज़रूरी है। दबाव भी एक बड़ा कारण है, चाहे वह परिवार का हो या समाज का। इस प्रेशर को हैंडल करना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि अगर दबाव हैंडल नहीं हुए, तो खिलाड़ी मेडल खो देंगे।

मैरी कॉम ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की सराहना की और इसे एक परिवर्तनकारी पहल बताया, जो लंबे समय से चली आ रही अवसर और जागरूकता की कमी को दूर कर सकती है। 2012 लंदन ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता मुक्केबाज़ ने कहा, “सबसे पहले, मैं छत्तीसगढ़ सरकार को बधाई देना चाहती हूँ। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत यहीं से हुई है और मुझे इस पर बहुत खुशी है। मुझे इस पहल का समर्थन करने के लिए आमंत्रित किया गया और मैं पूरे दिल से इसका समर्थन करती हूँ, क्योंकि हमारे आदिवासी समुदायों में अपार क्षमता है। पहले उन्हें इस तरह के मंच नहीं मिलते थे और न ही पर्याप्त जागरूकता थी। शायद यही कारण था कि कई प्रतिभाशाली बच्चे आगे नहीं बढ़ पाए।”

मणिपुर की इस स्टार मुक्केबाज़ ने बताया कि सरकार द्वारा समर्थित कार्यक्रमों ने अब परिदृश्य को बदलना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा, “लेकिन आज, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के खेलो इंडिया और फिट इंडिया कार्यक्रमों की बदौलत बच्चे धीरे-धीरे आगे आ रहे हैं, भाग ले रहे हैं और देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। यह भारत के खेलों के भविष्य के लिए बहुत बड़ी बात है।”

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हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा

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