मगरा में सुकांत मजूमदार का विपक्ष पर निशाना, कहा- भारत को बांटने वाली ताकतों से सावधान रहना होगा

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मगरा में सुकांत मजूमदार का विपक्ष पर निशाना, कहा- भारत को बांटने वाली ताकतों से सावधान रहना होगा


मगरा, 14 अगस्त (हि. स.)। पश्चिम बंगाल के शिक्षा राज्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता सुकांत मजूमदार ने शुक्रवार को हुगली जिले के मगरा में विभिन्न मुद्दों पर बयान देते हुए विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। वंदे मातरम्, आर.जी. कर मामले में गिरफ्तारियों, नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर टिप्पणी, एनआरएस अस्पताल में नर्स की मौत, आरएसएस की विदेशी फंडिंग और सरकारी स्कूलों में घटती छात्र संख्या सहित कई मुद्दों पर उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी।

सुकांत मजूमदार ने कहा कि राष्ट्रवाद की मूल भावना में ‘वंदे मातरम्’ का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने ‘वंदे मातरम्’ का पूरा गीत गाने की व्यवस्था की है, लेकिन कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ‘वंदे मातरम्’ गाने में किसी को परेशानी नहीं हुई, तो आज इसके गायन पर आपत्ति क्यों होनी चाहिए। इसी दौरान उन्होंने विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि जिन लोगों को ‘वंदे मातरम्’ से परेशानी है, उन्हें अपना डीएनए टेस्ट कराना चाहिए कि उनका डीएनए भारतीय है या नहीं।

सुकांत मजूमदार ने पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के भारत दौरे के दौरान कथित बयान का हवाला देते हुए कहा कि भारत विरोधी गतिविधियों के लिए आईएसआई की जरूरत नहीं होने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि देश में रहकर भारत का ही विरोध करने और देश को विभाजित करने की कोशिश करने वाली ताकतों से सावधान रहना होगा।

उन्होंने कहा कि भाजपा के रहते ऐसी ताकतों को अपने उद्देश्य में सफल नहीं होने दिया जाएगा और पार्टी इसके खिलाफ लड़ाई जारी रखेगी।

आरजी कर मामले में पूर्व विधायक निर्मल घोष के बाद पूर्व तृणमूल कांग्रेस पार्षद संजीव मुखर्जी की गिरफ्तारी पर सुकांत मजूमदार ने कहा कि संजीव पर निर्मल घोष के साथ ‘छाया’ की तरह काम करने और कथित तौर पर सबूत मिटाने में भूमिका निभाने का आरोप है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि मामले में जो भी लोग जानकारी या सबूत मिटाने में शामिल पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि कार्रवाई हो रही है और कोई इसे रोक नहीं सकता।

अदालत की भूमिका पर उन्होंने कहा कि आगे क्या होगा, यह अदालत का विषय है, लेकिन सरकार की ओर से जांच में किसी तरह की कमी नहीं छोड़ी जाएगी।

अनंत महाराज द्वारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस को लेकर की गई टिप्पणी के संदर्भ में सुकांत मजूमदार ने कहा कि उन्होंने माफी मांगी है, यह अच्छी बात है। हालांकि उन्होंने किसी व्यक्ति का नाम लिए बिना कहा कि नेताजी जैसे व्यक्तित्व, जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश के लिए समर्पित कर दिया, उनके बारे में किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से पहले कई बार सोचना चाहिए।

एनआरएस अस्पताल में नर्स की मौत के मामले में सुकांत मजूमदार ने कहा कि मुख्यमंत्री ने जांच समिति गठित की है और समिति पूरे मामले की जांच करेगी।

उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी तरह का अपराध सामने आता है और कोई व्यक्ति उससे जुड़ा पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि सरकार किसी अपराध को छिपाने या मामले को दबाने की कोशिश नहीं करेगी।

आरएसएस की कथित विदेशी फंडिंग को लेकर माकपा नेता मोहम्मद सलीम के बयान पर सुकांत मजूमदार ने कहा कि आरएसएस एक राष्ट्रवादी संगठन है और इस संबंध में संगठन स्वयं जवाब देगा। उन्होंने सलीम पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्हें आरएसएस के बारे में जानकारी नहीं है और उन्हें एक दिन आरएसएस कार्यालय का दौरा करना चाहिए।

सरकारी स्कूलों में लगातार घट रही छात्र संख्या पर शिक्षा राज्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने इस समस्या पर काम शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि समाज में यह धारणा बन गई है कि निजी स्कूलों में बेहतर शिक्षा मिलती है, जबकि देश के कई बड़े वैज्ञानिक, शोधकर्ता और शिक्षाविद सरकारी स्कूलों से पढ़कर निकले हैं।

उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का उदाहरण देते हुए कहा कि देश के कई महान लोगों ने सरकारी स्कूलों में शिक्षा प्राप्त की है। उन्होंने कहा कि नई सरकार शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की दिशा में काम कर रही है और में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कदम उठाए जाएंगे।

‘एक देश, एक शिक्षा’ के मुद्दे पर सुकांत मजूमदार ने कहा कि यह तभी संभव है जब देश के सभी राज्य इस पर सहमत हों। उन्होंने कहा कि एक देश, एक शिक्षा का मतलब यह हो सकता है कि विज्ञान और गणित जैसे विषयों का आधार एक समान हो, लेकिन इतिहास और भूगोल में संबंधित राज्य की जरूरतों के अनुसार बदलाव हो सकता है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी राज्य का पाठ्यक्रम केंद्रीय पाठ्यक्रम से पूरी तरह अलग रहता है, तो वहां के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में नुकसान हो सकता है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में समन्वय और समानता की आवश्यकता पर जोर दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय

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