योगी सरकार ने बढ़ाया कारीगरों का हुनर, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 में अब 25 ट्रेडों को मिलेगा संबल
पारंपरिक हुनर को नई पहचान देने की पहल, 11 की जगह अब 25 ट्रेडों में प्रशिक्षण और स्वरोजगार का अवसर
5 नए पारंपरिक और 9 आधुनिक ट्रेड योजना में शामिल, कारीगरों को 15 हजार रुपये तक की निःशुल्क टूलकिट
प्रशिक्षण के दौरान 500 रुपये प्रतिदिन मानदेय, ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म और जेम पोर्टल से जुड़ने में भी मिलेगी मदद
वाराणसी, 4 अक्टूबर। पीढ़ियों से अपने हाथों के हुनर के दम पर परिवार चलाने वाले कारीगरों के लिए अब अपने काम को नई पहचान और नए बाजार से जोड़ने का रास्ता और मजबूत हो रहा है। पारंपरिक हुनर को आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में योगी सरकार ने विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना का विस्तार करते हुए इसे 2.0 के रूप में शुरू किया है। योजना के नए स्वरूप में अब 11 की जगह कुल 25 ट्रेडों के कारीगरों को लाभ मिलेगा। इसमें पांच नए पारंपरिक और नौ आधुनिक ट्रेड शामिल किए गए हैं। इस विस्तार का उद्देश्य पारंपरिक क्षेत्रों में काम करने वाले कामगारों के साथ-साथ नए क्षेत्रों से जुड़े लोगों को भी प्रशिक्षण, टूलकिट और स्वरोजगार का अवसर उपलब्ध कराना है।
हुनर को मिलेगा प्रशिक्षण का साथ, टूलकिट से काम को मिलेगी मजबूती
उपायुक्त उद्योग अभिषेक प्रियदर्शी ने बताया कि योजना के तहत लाभार्थियों को निःशुल्क प्रशिक्षण, प्रमाणपत्र और अधिकतम 15 हजार रुपये तक की टूलकिट उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशिक्षण 10 दिनों का होगा। प्रशिक्षण के दौरान प्रत्येक प्रशिक्षार्थी को प्रतिदिन 500 रुपये यानी कुल 5,000 रुपये मानदेय डीबीटी के माध्यम से दिया जाएगा। प्रशिक्षण गैर आवासीय होगा। इसके लिए आईटीआई, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड तथा संबंधित क्षेत्र की सरकारी, अर्ध सरकारी और अन्य मान्यता प्राप्त संस्थाओं की मदद लेना भी प्रस्तावित है। यानी कारीगरों को सिर्फ प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उनके हुनर को बेहतर संसाधनों के साथ आगे बढ़ाने का अवसर भी मिलेगा।
11 की जगह अब 25 ट्रेड, पारंपरिक हुनर से आधुनिक काम तक बढ़ा दायरा
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 1.0 में पहले से शामिल 11 पारंपरिक ट्रेडों में बढ़ई, दर्जी, कुम्हार, लोहार, नाई, राजमिस्त्री, सुनार, टोकरी बुनकर, हलवाई, मोची और धोबी शामिल हैं।अब योजना 2.0 में पांच नए पारंपरिक ट्रेड भी जोड़े गए हैं। इनमें मूर्तिकार, मालाकार, दूधवाला, भरभूजा और मछुआरा शामिल हैं। इसके अलावा बदलते समय और रोजगार की नई जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नौ आधुनिक ट्रेड भी योजना में शामिल किए गए हैं। इनमें मोबाइल मरम्मत, ऑटोमोबाइल मरम्मत, इलेक्ट्रॉनिक सामान की मरम्मत, विद्युत उपकरणों की मरम्मत, प्लंबर, कंप्यूटर मरम्मत, सोलर इंस्टॉलेशन, डिजिटल फोटोग्राफी और सौंदर्य एवं वेलनेस शामिल हैं। इस तरह योजना का दायरा पारंपरिक कारीगरी से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीक और नए रोजगार क्षेत्रों तक पहुंच गया है।
हुनर अब गांव और मोहल्ले तक सीमित नहीं, ऑनलाइन बाजार से जुड़ेंगे कारीगर
कारीगरों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक उनके उत्पादों और सेवाओं को बड़े बाजार से जोड़ने की पहल है। उपायुक्त उद्योग ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद कारीगरों को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए प्रमुख ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म और जेम पोर्टल से जुड़ने में मदद मिलेगी।कारीगरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म और एप के माध्यम से आम लोगों को अपनी सेवाएं उपलब्ध कराने से भी जोड़ा जाएगा। इसके लिए आवश्यक प्रशिक्षण और सहयोग दिया जाएगा।योजना के प्रगतिशील लाभार्थियों को संबंधित ट्रेड के विकसित क्लस्टर की एक्सपोजर विजिट भी कराई जाएगी। इसके माध्यम से उन्हें नई तकनीक, उत्पाद विकास, डिजाइन और मार्केटिंग के नए अवसरों की जानकारी मिलेगी।यानी जिस हुनर की पहचान अब तक स्थानीय बाजार तक सीमित थी, उसे डिजिटल माध्यम और नए बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
हुनर से स्वरोजगार तक, 10 लाख रुपये तक बिना गारंटी-बिना ब्याज ऋण
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद कारीगरों के लिए स्वरोजगार शुरू करने का रास्ता भी आसान किया गया है। उपायुक्त उद्योग ने जानकारी दी कि स्वरोजगार शुरू करने के लिए 10 लाख रुपये तक का ऋण बिना गारंटी और बिना ब्याज उपलब्ध कराया जाएगा।इसके साथ ही 15 प्रतिशत तक सरकारी सब्सिडी का भी प्रावधान है। इससे कारीगर अपने पारंपरिक काम को आगे बढ़ाने के साथ नए व्यवसाय की शुरुआत कर सकेंगे।विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 के जरिए योगी सरकार का फोकस अब केवल कारीगरों के हुनर को संरक्षित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक, बाजार और वित्तीय सहयोग से जोड़कर आत्मनिर्भरता का आधार बनाने पर भी है।

