असली खतरे में देश का बचपन, युवाओं का भविष्य और देश की संस्कृति : बाबा रामदेव

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असली खतरे में देश का बचपन, युवाओं का भविष्य और देश की संस्कृति : बाबा रामदेव


रायपुर, 17 अगस्त (हि.स.)। योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि देश में न तो कोई धर्म या जाति खतरे में है और न ही हिंदू और मुस्लिम, बल्कि असली खतरे में देश का बचपन, युवाओं का भविष्य और देश की संस्कृति है।

बाबा रामदेव सोमवार को रायपुर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि देश में हिंदू धर्म, इस्लाम या ईसाई धर्म को कोई खतरा नहीं है, बल्कि भारत का सम्मान और गरिमा दांव पर है। उन्होंने कहा कि कि देश में न तो कोई धर्म या जाति खतरे में है और न ही हिंदू-मुस्लिम, बल्कि असली खतरे में देश का बचपन, युवाओं का भविष्य और देश की संस्कृति है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़गानिस्तान एक दिन फिर से भारत का हिस्सा बन जाएंगे।

उन्होंने छोटे बच्चों को विरोध प्रदर्शनों या आंदोलनों में धकेले जाने पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि दुनिया में कहीं भी ऐसा नहीं होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की पूरी व्यवस्था को बदलने की क्षमता किसी एक राजनीतिक दल, विपक्षी समूह या व्यक्ति में नहीं है, बल्कि इसके लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है।

उन्होंने पडोसी मुल्क पाकिस्तान में हिंदुओं की स्थिति पर पाकिस्तान राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं को अत्याचार और अन्याय का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा, पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए अत्याचार और अन्याय मानव सभ्यता की सबसे बड़ी क्रूरताओं में से हैं।

धर्मांतरण और इसे रोकने के लिए छत्तीसगढ़ में बनाए गए कानून पर रामदेव ने कहा कि हिंदुओं, ईसाइयों या मुसलमानों के उत्पीड़न के आरोप राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा, देश में जो भी धार्मिक बदलाव हुए हैं, कम से कम यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में किसी का उत्पीड़न न हो। हिंदू धर्म, इस्लाम या ईसाई धर्म को कोई खतरा नहीं है। खतरा भारत के सम्मान और गरिमा को है।

रामदेव ने कहा, मैं चाहता हूं कि भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे अच्छी बने, रुपये की कीमत कम से कम डॉलर और पाउंड के बराबर हो जाए, और भारतीय पासपोर्ट इतना मजबूत हो जाए कि भारतीयों को दुनिया में कहीं भी वीजा की जरूरत न पड़े। उन्होंने कहा कि अमेरिका, चीन और रूस सहित हर देश में भारत का समान सम्मान होना चाहिए। सनातन धर्म पर उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में ऐसी कोई कमी नहीं है, जिसके कारण लोगों को इस्लाम या ईसाई धर्म अपनाने की जरूरत पड़े, सनातन संस्कृति और धर्म प्राचीन हैं, उनमें ऐसी कौन सी कमी या खामी है जो हमें मुस्लिम या ईसाई बनने के लिए मजबूर करेगी?

छत्तीसगढ़ में ईसाइयों को प्रताड़ित किए जाने के कांग्रेस के आरोपों पर भी बाबा रामदेव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कोई हिंदुओं पर ईसाइयों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाता है और कोई कहता है कि ईसाइयों को प्रताड़ित किया जा रहा है, यह राजनीतिक वितंडा है। उन्होंने कहा कि वह इस विवाद में नहीं पड़ना चाहते।

बाबा रामदेव ने भारत और उसके पड़ोसी देशों के भविष्य को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि वह दिन भी आएगा जब बांग्लादेश, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत एक साथ होंगे। इसके लिए उन्होंने लोगों से थोड़ा सब्र रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि सनातनी होने का मतलब है भगवान राम की गरिमा, भगवान कृष्ण के योग और कर्म, भगवान शिव से जुड़ी पवित्रता और सच्चाई को अपनाना है। उन्होंने कहा, अगर इन मूल्यों का पालन किया जाए, तो धर्म परिवर्तन का सवाल ही नहीं उठेगा।

योग गुरु ने कहा कि यह सुनिश्चित करने में सरकार की बड़ी जिम्मेदारी है कि धार्मिक और सामाजिक व्यवस्थाएं ठीक से काम करें और उनमें कोई साजिश या गलत काम न हो। उन्होंने कहा, सरकार की जिम्मेदारी है कि वह धर्म, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, अर्थव्यवस्था और कृषि की व्यवस्थाओं में कोई गड़बड़ी न होने दें, क्योंकि यही लोकतंत्र का असली मतलब है। उन्होंने कहा, मुख्य ध्यान इन व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने पर होना चाहिए, तभी हम 2047 तक एक विकसित भारत बना पाएंगे।

पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती के दिए गए बयान कि वह एक दिमागी नक्सली हैं, योग गुरु ने कहा कि ऐसे बयानों से देश में बौद्धिक अराजकता फैलती है। उन्होंने कहा, मैं राजनीतिक बयानों में नहीं पड़ना चाहता, लेकिन बौद्धिक अराजकता अलोकतांत्रिक है। उन्होंने कहा कि लोगों को विरोध करने और अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन ऐसी गतिविधियां लोकतांत्रिक, संवैधानिक, नैतिक और आध्यात्मिक सीमाओं के भीतर होनी चाहिए, बाहर नहीं। उन्होंने कहा, लोकतंत्र में हर किसी को बोलने की आजादी है, लेकिन उस आजादी का इस्तेमाल किसी भी तरह से देश को बर्बाद करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा

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