धर्म को जाने बिना राष्ट्र की रक्षा संभव नहीं, यज्ञ और संत समागम ही ज्ञान का आधार : श्रीजीयर स्वामी

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धर्म को जाने बिना राष्ट्र की रक्षा संभव नहीं, यज्ञ और संत समागम ही ज्ञान का आधार : श्रीजीयर स्वामी


- धन्य हैं वे लोग जो अयोध्या की पावन भूमि पर ऐसे यज्ञ का आयोजन कर रहे : श्रीगादी स्वामी

- राष्ट्र और समाज की रक्षा के लिए धर्म को जानना जरूरी, धर्म ही राष्ट्र की असली शक्ति : चिन्ना जीयर स्वामी

- अयोध्या में आस्था का सैलाब, श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ की पूर्णाहुति के साथ संतों ने जगाई धर्म चेतना

- धर्म सम्मेलन में देशभर से जुटे संत, महायज्ञ समापन पर बोले- संस्कार बिना संसाधन बेकार

अयोध्या, 28 मार्च (हि.स.)। राजघाट में आयोजित श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ का शनिवार को अत्यंत भव्य और दिव्य वातावरण में समापन हो गया। धर्म सम्मेलन में देशभर से जुटे संतों ने एक स्वर में कहा कि धर्म, संस्कार और संत परंपरा ही राष्ट्र की असली शक्ति हैं। इनके बिना समाज की दिशा तय नहीं हो सकती।

धर्म सम्मेलन को संबोधित करते हुए स्वामी श्री श्री निवासाचार्य श्रीगादी स्वामीजी महाराज ने कहा कि धन्य हैं वे लोग जो अयोध्या जैसी पावन भूमि पर इस तरह के महायज्ञ का आयोजन कर रहे हैं। वहीं चिन्ना जीयर स्वामी ने कहा कि राष्ट्र और समाज की रक्षा के लिए धर्म को जानना जरूरी है। धर्म की समझ यज्ञ व संत समागम से ही आती है। यदि संत समागम नहीं होगा तो न धर्म की जानकारी होगी, न ही ज्ञान की प्राप्ति। मुख्य आयोजक श्रीजीयर स्वामी ने कहा कि जब तक हम धर्म को नहीं जानेंगे, तब तक राष्ट्र की रक्षा नहीं कर सकते। साधन और संसाधन यदि संस्कार से नहीं जुड़े तो वही साधन बोझ बन जाते हैं।

5000 यजमानों की आहुति के साथ महायज्ञ की पूर्णाहुति

राजघाट स्थित यज्ञ मंडप में करीब 5000 यजमानों ने अंतिम आहुति देकर महायज्ञ की पूर्णाहुति की। यह दृश्य अत्यंत श्रद्धा और आस्था से ओत-प्रोत रहा। इसके बाद दूर-दूर से आए साधु-संतों को वस्त्र व दक्षिणा देकर सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ की पूर्णाहुति से पहले यज्ञ मंडप में अचानक आग लग गई। हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ। कार्यक्रम सकुशल सम्पन्न हो गया।

श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद

महायज्ञ की पूर्णाहुति के बाद हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इससे पूरा क्षेत्र भक्ति और उत्साह से सराबोर नजर आया।

धर्म सम्मेलन में देशभर के संत एक मंच पर

दोपहर 2 बजे से आयोजित धर्म सम्मेलन इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा। इसमें

उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक के सैकड़ों संत, महात्मा और पीठाधीश्वर एक ही मंच पर विराजमान हुए। यह दृश्य अत्यंत भव्य और आध्यात्मिक था। सम्मेलन में प्रमुख रूप से अहोविल जीयर स्वामी, चिन्ना जीयर स्वामी, विलूपुनूर जीयर स्वामी, विशेष प्रसन्न तीर्थ स्वामी, द्वारकेश लाल महाराज सहित श्रीनिवास राघवन, आत्मानंद महाराज, निधि स्वामी समेत सैकड़ों संतों की उपस्थिति रही। सभी संतों ने बारी-बारी से अपने विचार रखे और धर्म, संस्कृति तथा राष्ट्र निर्माण पर गहन चिंतन प्रस्तुत किया।

मंत्री ने किया संतों का सम्मान

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने भी सहभागिता की।

उन्होंने श्रीजीयर स्वामी के साथ मंच से उपस्थित सभी संतों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।

देशभर से उमड़ा आस्था का सैलाब

मीडिया प्रभारी अखिलेश बाबा ने बताया कि उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, दिल्ली और दक्षिण भारत सहित देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल होने पहुंचे। कार्यक्रम की संपूर्ण व्यवस्था अयोध्या नाथ स्वामी के निर्देशन में संपन्न हुई। वहीं आयोजन को सफल बनाने में मलू उपाध्याय, राहुल सिंह, वीरेंद्र दुबे, कमलेश सिंह, बच्चा दुबे और परमानंद महाराज सहित कई लोगों की सक्रिय भूमिका रही।

आध्यात्मिक संदेश के साथ भव्य समापन

राजघाट का यह महायज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि धर्म, संस्कार और राष्ट्रीय चेतना का विराट संगम बनकर उभरा। संतों ने स्पष्ट संदेश दिया कि यज्ञ, संत समागम और संस्कार ही समाज को दिशा देते हैं। इन्हीं के माध्यम से राष्ट्र सशक्त और सुरक्षित बन सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ .राजेश

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