सावन में मेहंदी और चूड़ियों के बिना क्यों नहीं होता पूरा श्रृंगार? जानें वजह
सावन सिर्फ पूजा-पाठ का महीना नहीं है, बल्कि यह मौसम खुद को कुदरत से जोड़ने और जीवन में पॉजिटिव एनर्जी लाने का एक खास मौका भी है। इस मौसम में चारों तरफ हरियाली बिखरी होती है। अधिकतर महिलाएं इस पावन महीने में श्रृंगार करती हैं। क्या आप जानती हैं कि हाथों में रची मेहंदी और हरे रंग की चूड़ी पहनना सिर्फ हमारी परंपरा ही नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई धार्मिक, ज्योतिषीय और साइंटिफिक कारण भी छिपे हैं। सावन के दौरान हरा रंग और मेहंदी अपनाना अच्छी सेहत, खुशहाली और सुहाग के लिए बेहद शुभ माना जाता है।

सावन में मेहंदी लगाने और चूड़ियां पहनने के धार्मिक कारण
सावन महीने में भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती की भी पूजा की जाती है। मंगला गौरी व्रत और हरियाली तीज जैसे मौकों पर मेहंदी लगाना और हरे कपड़े पहनना पति की लंबी उम्र और शादीशुदा जिंदगी में मिठास के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। हमारी परंपराओं में महिलाओं को कुदरत का ही एक रूप माना गया है। ऐसे में जब महिलाएं हरे रंग का श्रृंगार करती हैं, तो इससे भगवान शिव, माता पार्वती, विष्णु जी और शनिदेव का आशीर्वाद मिलता है। यह रंग मन में शांति और प्यार भरता है।
सेहत और आयुर्वेद से जुड़ा वैज्ञानिक कारण
सावन का महीना मौसम में बदलाव का समय होता है। बारिश के कारण हवा में नमी बढ़ जाती है, जिससे पसीना, स्किन की समस्याएं और कई तरह के इंफेक्शन होने का खतरा रहता है। मेहंदी में कुदरती एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। बदलते मौसम के कारण होने वाले इंफेक्शन या स्किन से जुड़ी परेशानियां से मेहंदी बचाव करती है।
आयुर्वेद के मुताबिक मेहंदी की तासीर काफी ठंडी होती है। इसे हाथों और पैरों में लगाने से शरीर की अंदरूनी गर्मी बाहर निकलती है और दिमाग शांत रहता है। यही नहीं मेहंदी में जलन और सूजन को कम करने वाले एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो पैरों के तलवों को ठंडक और आराम देते है।

सावन का यह श्रृंगार देता है खुशहाली और सकारात्मकता का एहसास
सावल का महीने में महिलाएं हरी चूड़ियां पहनती हैं, मेहंदी लगाती हैं और पारंपरिक श्रृंगार करती हैं। ये छोटी-छोटी चीजें मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर डाल सकती हैं। मनपसंद कपड़े पहनना, मेहंदी लगाना या सजना-संवरना व्यक्ति को खुश महसूस करा सकता है। खुद की देखभाल करने वाली एक्टिविटी से मूड बेहतर होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।
मेहंदी लगाना और हरी चूड़ियां पहनना कई महिलाओं के लिए खुशी से जुड़ा अनुभव होता है। इससे तनाव कम होता है और मन शांत रहता है।
सावन के दौरान होने वाले त्योहार, गीत, पूजा और श्रृंगार की परंपराएं लोगों को परिवार और समाज से जोड़ती हैं।
अपनों के साथ समय बिताना और खुशियां शेयर करना मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है।
हरा रंग प्रकृति, शांति और ताजगी से जुड़ा माना जाता है। प्रकृति के करीब रहना और पसंदीदा रंगों का इस्तेमाल करना मन को सकारात्मक महसूस कराता है।
सावन का श्रृंगार केवल बाहरी सुंदरता बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह कई लोगों के लिए खुशी, खुद की देखभाल और इमोशनल जुड़ाव का जरिया भी बन सकता है।

