महिलाओं में क्यों होती है कैल्शियम की कमी, जानिए वजहें, लक्षण और इसे पूरा करने के आसान तरीके 

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 कैल्शियम शरीर के लिए सबसे जरूरी मिनरल्स में से एक है. यह सिर्फ हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने का काम ही नहीं करता, बल्कि मांसपेशियों, नसों और दिल के सामान्य कामकाज में भी अहम भूमिका निभाता है. हालांकि, महिलाओं में कैल्शियम की कमी पुरुषों की तुलना में अधिक देखने को मिलती है. इसकी वजह शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव, गर्भावस्था, ब्रेस्टफीडिंग, मेनोपॉज, विटामिन डी की कमी और असंतुलित खानपान हो सकते हैं. अगर समय रहते इस कमी को पूरा न किया जाए तो आगे चलकर हड्डियां कमजोर होने, ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है. आइए जानते हैं इस कमी को कैसे दूर करें.


महिलाओं में कैल्शियम की कमी क्यों होती है?

महिलाओं के शरीर में जीवन के अलग-अलग चरणों में हार्मोनल बदलाव होते हैं. गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान मां के शरीर से बच्चे को कैल्शियम मिलता है, जिससे महिलाओं में इसकी कमी हो सकती है. वहीं मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है, जिसका असर हड्डियों की मजबूती पर पड़ता है. इसके अलावा विटामिन डी की कमी भी कैल्शियम के अवशोषण को प्रभावित करती है. अगर शरीर को पर्याप्त विटामिन डी नहीं मिलता, तो कैल्शियम का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं हो पाता.

कैल्शियम की कमी के लक्षण

शुरुआती दौर में कैल्शियम की कमी के लक्षण हल्के हो सकते हैं, लेकिन समय के साथ समस्या बढ़ सकती है. इसके कुछ सामान्य संकेत हैं.

हड्डियों और जोड़ों में दर्द
बार-बार मांसपेशियों में ऐंठन
जल्दी थकान महसूस होना
नाखूनों का कमजोर होना
दांतों की समस्याएं
हाथ-पैरों में झुनझुनी
बार-बार हड्डी टूटने का खतरा
अगर ये लक्षण लगातार बने रहें, तो डॉक्टर की सलाह लेकर जांच कराना जरूरी है.

डाइट से कैसे पूरी करें कैल्शियम की कमी?

कैल्शियम की जरूरत पूरी करने के लिए रोजाना संतुलित आहार लेना सबसे आसान और प्रभावी तरीका है.

दूध, दही, पनीर और छाछ को रोजाना डाइट में शामिल करें.
रागी, तिल, सोयाबीन और चना जैसे खाद्य पदार्थ कैल्शियम के अच्छे स्रोत हैं.
पालक, मेथी, सरसों, ब्रोकोली जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां भी फायदेमंद होती हैं.
बादाम, अंजीर और अन्य ड्राई फ्रूट्स सीमित मात्रा में खाए जा सकते हैं.
अगर आप शाकाहारी हैं, तो कैल्शियम से फोर्टिफाइड प्लांट-बेस्ड दूध या अन्य फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ भी विकल्प हो सकते हैं.
सिर्फ कैल्शियम नहीं, विटामिन डी भी है जरूरी

कैल्शियम तभी शरीर को पूरा फायदा पहुंचाता है जब विटामिन डी का स्तर भी सही हो. इसलिए रोजाना कुछ समय सुबह की हल्की धूप में बैठना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से विटामिन डी की जांच करवाना लाभदायक हो सकता है.

सप्लीमेंट लेने से पहले रखें सावधानी

कई लोग कैल्शियम की कमी पूरी करने के लिए खुद से सप्लीमेंट लेना शुरू कर देते हैं, लेकिन ऐसा करना सही नहीं है. जरूरत से ज्यादा कैल्शियम सप्लीमेंट लेने से किडनी स्टोन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है. इसलिए किसी भी सप्लीमेंट का सेवन डॉक्टर की सलाह के बाद ही करें.

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