कायु रिचुअल्स के वेलनेस कॉन्क्लेव में प्रिवेंटिव हेल्थकेयर पर जोर, महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर विशेषज्ञों ने की चर्चा

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कायु रिचुअल्स के वेलनेस कॉन्क्लेव में प्रिवेंटिव हेल्थकेयर पर जोर, महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर विशेषज्ञों ने की चर्चा


कायु रिचुअल्स के वेलनेस कॉन्क्लेव में प्रिवेंटिव हेल्थकेयर पर जोर, महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर विशेषज्ञों ने की चर्चा


कायु रिचुअल्स के वेलनेस कॉन्क्लेव में प्रिवेंटिव हेल्थकेयर पर जोर, महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर विशेषज्ञों ने की चर्चा


नई दिल्ली, 19 सितंबर (हि.स.)। देश में बढ़ती जीवनशैली संबंधी बीमारियों और महिलाओं से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के बीच प्रिवेंटिव हेल्थकेयर (निवारक स्वास्थ्य देखभाल), समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली को प्राथमिकता देने के लिए आयुर्वेद और वेलनेस ब्रांड 'कायू रिचुअल्स' द्वारा आयोजित एक विशेष वेलनेस कॉन्क्लेव में जुटे शीर्ष चिकित्सकों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नीति निर्धारकों ने मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति), इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ), यौन स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर गहन मंथन किया।

यहां शनिवार को आयुर्वेद और वेलनेस ब्रांड 'कायू रिचुअल्स' द्वारा आयोजित एक विशेष वेलनेस कॉन्क्लेव में जुटे शीर्ष चिकित्सकों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नीति निर्धारकों ने मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति), इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ), यौन स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर गहन मंथन किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने इलाज-केंद्रित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर जागरूकता, समय पर रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम में एम्स आयुर्वेद के सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रवीण के.एस., दिल्ली सरकार के आयुष विभाग के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. अभिषेक साहा, वरिष्ठ प्रजनन एवं आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. अंशिका लेखी, होम्योपैथ एवं जीवनशैली विशेषज्ञ डॉ. निश्चल गुप्ता तथा कंसल्टेंट गायनेकोलॉजिस्ट एवं आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. जागृति राम ने अपने विचार रखे। विशेषज्ञों ने कहा कि आज का समाज कई तरह की छिपी हुई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा है, जिनमें मेनोपॉज, बांझपन, फेफड़ों का स्वास्थ्य, हार्मोनल असंतुलन और यौन समस्याएं शामिल हैं। इन मुद्दों पर समाज में खुलकर चर्चा नहीं होती, जिसके कारण महिलाएं और युवा समय पर सही परामर्श नहीं ले पाते। जब तक प्रारंभिक स्तर पर रोकथाम और जीवनशैली में सुधार नहीं किया जाएगा, तब तक बीमारियों के बढ़ते बोझ को नियंत्रित करना संभव नहीं होगा।

कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए कायू रिचुअल्स की संस्थापक और हेल्थकेयर उद्यमी प्रीति चौधरी ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प की असली नींव स्वस्थ नागरिक ही रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि उपचार से कहीं अधिक महत्वपूर्ण प्रिवेंटिव हेल्थकेयर है। शरीर में किसी भी समस्या की शुरुआत होते ही शरीर हमें संकेत देने लगता है, लेकिन जागरूकता के अभाव में लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। उन्होंने कहा कि केवल उत्पाद बेचने से स्वास्थ्य नहीं सुधर सकता, इसके लिए हॉलिस्टिक वेलनेस यानी समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है, जिसमें खानपान, दिनचर्या और मानसिक संतुलन का समन्वय हो।

प्रीति चौधरी ने दिल्ली में अपने एक निजी अनुभव को साझा करते हुए बताया कि उन्होंने राजधानी में महज छह किलोमीटर की यात्रा के दौरान 16 आईवीएफ सेंटर देखे। यह स्थिति दर्शाती है कि समाज में फर्टिलिटी और स्वास्थ्य से जुड़ी जटिलताएं किस तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि जब समस्या सामने है तो उसका समाधान भी खोजना होगा। इसके लिए जरूरी है कि बिना किसी झिझक के 'जिम्मेदार संवाद' शुरू किया जाए। उन्होंने कहा कि भारत गांवों और शहरों दोनों में बसता है, इसलिए स्वास्थ्य से जुड़ी जागरूकता ऐसी सरल भाषा में पहुंचनी चाहिए जो गांव और शहर के हर वर्ग को समझ आ सके। इसमें डॉक्टरों की सहभागिता सबसे अहम है ताकि वैज्ञानिक और प्रामाणिक जानकारी आम लोगों तक पहुंचे।

उन्होंने आधुनिक तकनीक और नई पीढ़ी की जीवनशैली पर चर्चा करते हुए कहा कि आज की जेनरेशन-जी (Gen-Z) और युवा पीढ़ी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल युग में जी रही है। इस पीढ़ी को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए ऐसे सुरक्षित और सहज मंच उपलब्ध कराने होंगे जहां वे अपने स्वास्थ्य, मानसिक दबाव और यौन समस्याओं पर बिना किसी संकोच के खुलकर बात कर सकें। जब युवा खुलकर संवाद करेंगे, तभी समाज में व्याप्त वर्जनाएं टूटेंगी और लोग समय रहते चिकित्सीय परामर्श ले सकेंगे।

कॉन्क्लेव के दौरान कायू रिचुअल्स ने अपने तीन नए वेलनेस उत्पाद भी लॉन्च किए, जो आयुर्वेद के पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के शोध पर आधारित हैं। प्रीति चौधरी ने बताया कि लगभग 18 वर्षों के अंतरराष्ट्रीय विनियामक (रेगुलेटरी) और फार्मास्युटिकल अनुभव तथा अपने जीवन के व्यक्तिगत संघर्षों के बाद उन्होंने इस ब्रांड की नींव रखी, ताकि आधुनिक जीवनशैली के अनुरूप सुरक्षित, प्रमाणित और प्रभावी उत्पाद लोगों को मिल सकें। उन्होंने कहा कि पारंपरिक ज्ञान और समकालीन विज्ञान का संगम ही स्वास्थ्य क्षेत्र का भविष्य है और इसी सोच के साथ स्वास्थ्य को 'सेल्फ-केयर' यानी आत्म-देखभाल में बदलना उनका मुख्य ध्येय है।

कार्यक्रम में उपस्थित डॉक्टरों ने भी इस बात पर सहमति जताई कि आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के बीच बेहतर तालमेल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि खानपान में मिलावट, तनाव और गतिहीन जीवनशैली ने कम उम्र में ही लोगों को जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की गिरफ्त में ले लिया है। विशेषज्ञों ने समय पर जांच, संतुलित आहार, योग और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाकर स्वस्थ समाज के निर्माण में सहयोग देने का संकल्प दोहराया।

उल्लेखनीय है कि कायू रिचुअल्स और प्रो-बिजनेस कंसल्टिंग (पीबीसी) की संस्थापक प्रीति चौधरी एक प्रमुख हेल्थकेयर उद्यमी, रेगुलेटरी अफेयर्स लीडर और वेलनेस इनोवेटर हैं। यूके, यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और एशिया में फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइसेज और डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में उन्हें 18 वर्षों से अधिक का व्यापक अंतरराष्ट्रीय अनुभव है। यूनाइटेड किंगडम की न्यूकैसल अपॉन टाइन यूनिवर्सिटी से इंडस्ट्रियल बायोटेक्नोलॉजी में परास्नातक प्रीति चौधरी ने अपने नवजात बेटे के गंभीर न्यूरोलॉजिकल संक्रमण से उबरने के व्यक्तिगत संघर्ष और माइक्रोबायोलॉजिस्ट के रूप में अपने शोध अनुभवों से प्रेरित होकर इस वेलनेस ब्रांड की स्थापना की है। वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें 'मोस्ट इन्फ्लुएंशियल वुमन अवार्ड 2024' और 'कंसल्टिंग चैंपियन ऑफ द ईयर 2024' सहित कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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