चक्रवाती असर से बदला बांधवगढ़ का मौसम, जंगल की सुरक्षा के लिए टाइगर रिजर्व प्रबंधन अलर्ट

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चक्रवाती असर से बदला बांधवगढ़ का मौसम, जंगल की सुरक्षा के लिए टाइगर रिजर्व प्रबंधन अलर्ट


ताला, मगधी और खितौली समेत सभी पर्यटन जोन खुले, सफारी वाहनों में हूड लगाने के निर्देश, वन्यजीवों और पर्यटकों की सुरक्षा पर विशेष निगरानी

उमरिया, 30 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन स्थलों में शामिल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में इन दिनों प्रकृति के बदले मिजाज के बीच वन विभाग की निगरानी बढ़ गई है। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तंत्र के प्रभाव से उमरिया जिले में हल्की से मध्यम असामयिक बारिश हो रही है। इसके साथ ही 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हवाओं ने जंगल के वातावरण में ठंडक घोल दी है। पर्यटकों के लिए यह मौसम भले ही सुहावना नजर आ रहा हो, दूसरी ओर वन प्रबंधन के सामने पेड़ों, वन्यजीवों, जंगल के रास्तों और सफारी व्यवस्था को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है।

टाइगर रिजर्व प्रबंधन की ओर से इस संबंध में शुक्रवार को बताया गया कि बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवात अर्नब ने आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र में लैंडफॉल किया था। इस दौरान हवाओं की गति 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की जानकारी सामने आ रही है। चक्रवात के अवशेषों से प्रभावित नम हवाओं के मध्य भारत की ओर बढ़ने के कारण उमरिया और बांधवगढ़ क्षेत्र में मौसम में बदलाव आया है। भारतीय मौसम विभाग की ओर से पूर्वी मध्य प्रदेश के लिए येलो अलर्ट जारी किए जाने के बाद प्रबंधन ने परिस्थितियों पर लगातार नजर रखने की व्यवस्था की है। साथ ही मौसम की इस असामान्य स्थिति को देखते हुए प्रबंधन ने जंगल, वन्यजीवों और पर्यटकों की सुरक्षा के लिए सतर्कता बढ़ाई गई है। राहत की बात यह है कि फिलहाल टाइगर रिजर्व के सभी कोर और बफर पर्यटन जोन खुले हैं तथा सफारी सामान्य रूप से संचालित हो रही है।

जंगल में स्थिति सामान्य, वन्यजीवों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने बताया कि अभी तक किसी वन्यप्राणी की हानि, पेड़ गिरने अथवा पर्यटन मार्ग अवरुद्ध होने की सूचना प्राप्त नहीं हुई है। जंगल के भीतर स्थिति सामान्य और नियंत्रण में है। उन्होंने बताया कि मौसमी परिस्थितियों को देखते हुए मैदानी अमले को लगातार गश्त करने तथा संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

क्षेत्र संचालक सहित अन्य अधिकारियों ने विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर मौजूदा परिस्थितियों की समीक्षा की है। निचले इलाकों में जलभराव, तेज हवा से पेड़ों की संभावित क्षति और जंगल के रास्तों पर किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होने जैसी स्थितियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कर्मचारियों को किसी भी असामान्य गतिविधि अथवा नुकसान की सूचना तत्काल उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

तीनों प्रमुख कोर जोन में जारी है पर्यटकों की सफारी

मौसम में बदलाव के बावजूद बांधवगढ़ के प्रमुख पर्यटन क्षेत्रों ताला, मगधी और खितौली में सफारी जारी है। कोर क्षेत्र के साथ बफर क्षेत्र के सभी पर्यटन जोन भी पर्यटकों के लिए खुले रखे गए हैं। प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसी भी पर्यटन गेट को बंद करने का निर्णय नहीं लिया गया है।

उल्लेखनीय है कि आगामी दिनों में बारिश की संभावना को देखते हुए सफारी वाहनों में हूड यानी बारिश से बचाव के लिए कवर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इससे पर्यटक जंगल भ्रमण के दौरान बारिश से सुरक्षित रह सकेंगे। वाहन चालकों और पर्यटन से जुड़े कर्मचारियों को तेज हवाओं, फिसलन भरे रास्तों और बदलती मौसमी परिस्थितियों के अनुरूप सावधानी बरतने के लिए कहा गया है।

बाघों की धरती बांधवगढ़ में मौसम का बदलाव महत्वपूर्ण

विंध्य क्षेत्र में स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता और बाघों की उपस्थिति के कारण देश-दुनिया में पहचान रखता है। यहां साल और मिश्रित पर्णपाती वनों के साथ घास के मैदान, पहाड़ियां, प्राकृतिक जलस्रोत और वन्यजीवों के अनुकूल विविध आवास मौजूद हैं। बाघों के अलावा तेंदुआ, भालू, जंगली हाथी, गौर, सांभर, चीतल और अनेक प्रजातियों के पक्षी इस जंगल की जैविक संपन्नता को दर्शाते हैं।

बांधवगढ़ का ऐतिहासिक किला, शेषशैया में भगवान विष्णु की विशाल शयन प्रतिमा और जंगल के भीतर फैले प्राकृतिक एवं ऐतिहासिक स्थल भी इसे विशिष्ट पर्यटन पहचान देते हैं। यहां का ताला क्षेत्र विशेष रूप से बाघों के दीदार के लिए लोकप्रिय है। देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशी पर्यटक भी वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने के लिए यहां पहुंचते हैं। ऐसे में असामयिक बारिश और तेज हवाओं के दौरान प्रबंधन की सतर्कता का महत्व और बढ़ जाता है। जंगल में पेड़ों की स्थिति, प्राकृतिक जलस्रोतों, वन्यजीवों की गतिविधियों और पर्यटन मार्गों की निगरानी पर्यावरणीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

फिलहाल सफारी पर रोक नहीं, परिस्थितियों के अनुसार होंगे निर्णय

बांधवगढ़ प्रबंधन के सामने इस समय दोहरी चुनौती है। एक ओर वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, वहीं दूसरी ओर पर्यटकों के सुरक्षित वन भ्रमण की व्यवस्था बनाए रखनी है। फिलहाल सभी पर्यटन जोन खुले हैं और सफारी सामान्य रूप से चल रही है। मौसम की परिस्थितियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। बारिश और हवाओं की तीव्रता में बदलाव के अनुसार आगे के निर्णय लिए जाएंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुरेन्‍द्र त्रिपाठी

Livevns.news Desk
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