पश्चिम बंगाल में दवा दुकानों की हड़ताल का आंशिक असर, अस्पतालों की मेडिकल सेवाएं रहीं सामान्य

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पश्चिम बंगाल में दवा दुकानों की हड़ताल का आंशिक असर, अस्पतालों की मेडिकल सेवाएं रहीं सामान्य


कोलकाता, 20 मई (हि. स.)। पश्चिम बंगाल में बुधवार को आयोजित देशव्यापी दवा विक्रेता बंद का असर सीमित रूप में देखने को मिला। बंद का समर्थन मुख्य रूप से बंगाल केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन से जुड़े दवा कारोबारियों ने किया, जबकि कई सरकारी और अस्पताल आधारित मेडिकल स्टोर सामान्य रूप से खुले रहे।

व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, राज्य में संगठन से जुड़ी करीब 32 से 35 हजार इकाइयों में अधिकांश खुदरा दवा दुकानें शामिल हैं। संगठन के पदाधिकारियों ने दावा किया कि बड़ी संख्या में सदस्य दुकानदारों ने बंद में हिस्सा लिया।

इसके बावजूद, प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र, अमृत फार्मेसी दुकानें और अस्पतालों के भीतर संचालित मेडिकल स्टोर खुले रहने से आम मरीजों को अधिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। निजी नर्सिंग होम और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में दवा आपूर्ति भी सामान्य बनी रही।

यह बंद ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर किया गया था। संगठन का आरोप है कि ई-फार्मेसी कंपनियां भारी छूट और आक्रामक मूल्य नीति अपनाकर पारंपरिक दवा कारोबार को प्रभावित कर रही हैं।

दवा विक्रेताओं ने ऑनलाइन दवा बिक्री की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पर्याप्त सत्यापन प्रणाली के अभाव में फर्जी पर्चियों के जरिए नशीली और नियंत्रित दवाओं के दुरुपयोग की आशंका बढ़ रही है।

संगठन ने केंद्र सरकार व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से ई-फार्मेसी से जुड़ी कुछ डिजिटल सुविधाओं और रियायतों की समीक्षा करने की मांग की है। वहीं सरकारी सूत्रों का कहना है कि दवा नियामक एजेंसियां इस क्षेत्र के नियमों की समीक्षा कर रही हैं, ताकि ऑनलाइन सेवाओं और पारंपरिक दवा कारोबार के बीच संतुलन कायम रखा जा सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

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