समान नागरिक संहिता पर भाजपा का दांव, बंगाल चुनाव में वैचारिक टकराव तेज

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समान नागरिक संहिता पर भाजपा का दांव, बंगाल चुनाव में वैचारिक टकराव तेज


कोलकाता, 10 अप्रैल (हि. स.)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में वैचारिक मुकाबला और तीखा हो गया जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने घोषणापत्र में सत्ता में आने के छह माह के भीतर समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने का वादा किया है। वरिष्ठ भाजपा नेता व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कोलकाता में ‘संकल्प पत्र’ जारी करते हुए कहा कि राज्य में “हर नागरिक के लिए एक समान कानून” लागू किया जाएगा, चाहे उसका धर्म कुछ भी हो।

उन्होंने कहा कि यूसीसी लागू कर सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में एक समान कानून सुनिश्चित किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री ने इसे संवैधानिक समानता का मुद्दा बताते हुए कहा कि अलग-अलग कानून रखना तुष्टिकरण की नीति को बढ़ावा देता है।

भाजपा ने अपने घोषणापत्र में यूसीसी के साथ-साथ घुसपैठ और पशु तस्करी पर रोक लगाने का भी वादा किया है, जिससे चुनावी अभियान को सीमा सुरक्षा और पहचान की राजनीति के मुद्दों पर केंद्रित किया गया है।

राज्य में मुस्लिम आबादी लगभग 30 प्रतिशत है और 294 में से 110 से अधिक सीटों पर उनका प्रभाव माना जाता है। ऐसे में इस मुद्दे को चुनाव से ठीक पहले उठाना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

अमित शाह ने यह भी कहा कि समान नागरिक संहिता का विचार नया नहीं है, बल्कि यह संविधान सभा की सिफारिशों का हिस्सा रहा है और लंबे समय तक तुष्टिकरण की राजनीति के कारण इसे लागू नहीं किया गया।

वहीं, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने इस मुद्दे को चुनाव के ध्रुवीकरण की कोशिश करार दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले भी कह चुकी हैं कि समान नागरिक संहिता देश की बहुलतावादी संरचना के खिलाफ है और इसे बहुसंख्यक एजेंडा थोपने की कोशिश बताया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे से जहां एक ओर भाजपा हिंदू मतदाताओं को एकजुट करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर यह अल्पसंख्यक मतदाताओं को तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में फिर से संगठित कर सकता है।

हाल के महीनों में मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर और उत्तर 24 परगना जैसे अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में तृणमूल कांग्रेस को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा था, जहां छोटे दल खुद को स्वतंत्र अल्पसंख्यक आवाज के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे थे।

हालांकि, इन प्रयासों को उस समय झटका लगा जब कथित वीडियो विवाद के बाद एआईएमआईएम ने हुमायूं कबीर से दूरी बना ली। कबीर ने इस वीडियो को कृत्रिम तकनीक से तैयार और राजनीतिक साजिश करार दिया है।

इन घटनाक्रमों के बीच समान नागरिक संहिता का मुद्दा अब चुनावी बहस के केंद्र में आ गया है। राज्य में मतदान 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होना है, और इस बीच यह मुद्दा चुनावी परिदृश्य को और अधिक ध्रुवीकृत कर सकता है।------------------

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

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