उपराष्ट्रपति ने युवाओं से सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का किया आह्वान

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उपराष्ट्रपति ने युवाओं से सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का किया आह्वान


नई दिल्ली, 24 फरवरी (हि.स.)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मंगलवार को दार्जिलिंग से आए युवाओं के एक प्रतिनिधिमंडल से उपराष्ट्रपति भवन में मुलाकात के दौरान उनसे विकास की राह पर आगे बढ़ते हुए अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और राष्ट्र निर्माण में योगदान के लिए विख्यात दार्जिलिंग क्षेत्र से आए ऊर्जावान युवाओं से मिलना अत्यंत सुखद है। देश की युवा शक्ति एक आत्मविश्वासी और प्रगतिशील भारत की आकांक्षाओं का प्रतीक है। इस अवसर पर राज्यसभा सदस्य हर्षवर्धन शृंगला भी उपस्थित थे।

राधाकृष्णन ने भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति को देश की महत्वपूर्ण संपदा बताते हुए कहा कि विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने में युवाओं की भूमिका निर्णायक है। उन्होंने युवाओं से नवाचार, ईमानदारी और उद्यमिता के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया और कहा कि आत्मनिर्भरता हमारी क्षमताओं पर विश्वास और अपनी विरासत पर गर्व का प्रतीक है।

संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने पलायन, सतत पर्यटन, डिजास्टर रेजिलिएंस, दार्जिलिंग चाय और खेल अवसंरचना जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे। पलायन पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह वैश्विक घटना है। यह आर्थिक उम्मीदों से चलती है, लेकिन अपनी पहचान, संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखना आवश्यक है। उन्होंने पर्यावरणीय संतुलन के साथ सतत पर्यटन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।

पर्वतीय क्षेत्रों की संवेदनशीलता का उल्लेख करते हुए उन्होंने बेहतर आपदा तैयारी, सुदृढ़ अवसंरचना और समन्वित प्रयासों की जरूरत बताई तथा आपदा-रोधी अवसंरचना के लिए गठबंधन (सीडीआरआई) जैसी पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने दार्जिलिंग चाय की वैश्विक पहचान को रेखांकित करते हुए मूल्य संवर्धन और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने की बात कही। खेल क्षेत्र में उन्होंने जमीनी स्तर की प्रतिभाओं को निखारने के लिए समेकित अवसंरचना और संस्थागत समर्थन की आवश्यकता पर जोर दिया।

उपराष्ट्रपति ने युवाओं को पारंपरिक परिधान में देखकर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि जो लोग अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजते हैं, वे समाज के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि युवा अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए बदलती दुनिया के अवसरों को अपनाकर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

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