न्यायिक जांच के बाद पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से लगभग 91 लाख नाम हटे

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न्यायिक जांच के बाद पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से लगभग 91 लाख नाम हटे


कोलकाता, 07 अप्रैल (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के बाद न्यायिक जांच पूरी होने पर राज्य की मतदाता सूची से लगभग 90.83 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार यह कुल मतदाता संख्या का लगभग 11.85 प्रतिशत है। हालांकि संशोधित अंतिम मतदाता संख्या की औपचारिक घोषणा अभी की जानी बाकी है।

आयोग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष अक्टूबर के अंत तक राज्य में कुल 7.66 करोड़ मतदाता दर्ज थे। पुनरीक्षण प्रक्रिया शुरू होने के बाद 28 फरवरी को जारी अंतरिम आंकड़ों में बताया गया था कि लगभग 63.66 लाख नाम पहले ही हटाए जा चुके थे, जिससे मतदाताओं की संख्या घटकर करीब 7.04 करोड़ रह गई थी। इस मतदाता आधार में 60.06 लाख मतदाताओं को “न्यायिक विचाराधीन” श्रेणी में रखा गया था।

न्यायिक अधिकारियों द्वारा की गई जांच के बाद इन 60.06 लाख मामलों में से 27.16 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए, जो कुल मामलों का लगभग 45.22 प्रतिशत है। वहीं 32.68 लाख मतदाताओं को पात्र पाए जाने के बाद अंतिम सूची में बनाए रखा गया है। आयोग के अनुसार न्यायिक विचाराधीन कुल 59.84 लाख मामलों का औपचारिक विवरण जारी कर दिया गया है, जबकि 22 हजार 163 मामलों का निपटारा हो चुका है लेकिन उनकी ई-हस्ताक्षर प्रक्रिया अभी बाकी है।

जिला स्तर पर सबसे अधिक नाम मुर्शिदाबाद जिले में हटाए गए, जहां न्यायिक जांच के दायरे में आए 11.01 लाख मतदाताओं में से 4.55 लाख नाम सूची से हटा दिए गए। उत्तर 24 परगना जिले में 5.91 लाख जांचे गए मतदाताओं में से 3.25 लाख को अपात्र पाया गया, जबकि मालदा जिले में 8.28 लाख में से 2.39 लाख नाम हटाए गए। दक्षिण 24 परगना में लगभग 2.23 लाख, पूर्व बर्धमान में 2.09 लाख और नदिया जिले में 2.98 लाख नाम हटाए गए।

प्रतिशत के हिसाब से नदिया जिले में 77.86 प्रतिशत और उत्तर 24 परगना में 55.08 प्रतिशत नाम हटाए जाने का आंकड़ा सामने आया है। कोलकाता दक्षिण क्षेत्र, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भवानीपुर विधानसभा सीट शामिल है, वहां न्यायिक जांच के दौरान 28 हजार से अधिक नाम हटाए गए, जो लगभग 36.19 प्रतिशत है। वहीं कोलकाता उत्तर क्षेत्र में लगभग 39 हजार मतदाताओं को अपात्र पाया गया, जो करीब 64 प्रतिशत है।

निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह पुनरीक्षण प्रक्रिया चरणबद्ध और पारदर्शी तरीके से की गई है और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जिला-वार आंकड़े सार्वजनिक किए गए हैं। जिन मतदाताओं के नाम अंतिम सूची से हटाए गए हैं, उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर राज्य में स्थापित विशेष न्यायाधिकरणों में अपील करने का विकल्प दिया गया है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि न्यायाधिकरण से पात्र घोषित होने वाले मतदाता आगामी चुनाव में मतदान कर पाएंगे या नहीं।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

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