वनवासी कल्याण आश्रम ने की अरावली परिभाषा समिति का कार्यकाल बढ़ाने की मांग
नई दिल्ली, 09 अगस्त (हि.स.)। अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम ने अरावली पर्वत को परिभाषित करने के लिए गठित समिति का कार्यकाल दो महीने बढ़ाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि मौजूदा 20 दिन का समय व्यापक और सार्थक परामर्श के लिए पर्याप्त नहीं है। समिति से सभी हितधारकों से व्यापक चर्चा करने की अपील की गई है।
अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम की ओर से 2 अगस्त को समिति के अध्यक्ष को एक पत्र भेजा गया । पत्र में कहा गया कि राजस्थान और गुजरात के अरावली क्षेत्र में बड़ी संख्या में जनजातीय समुदाय रहते हैं। यह क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची में भी आता है। इसलिए समिति को प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक दौरे करने चाहिए।
वनवासियों के लिए काम करने वाले इस संगठन की मांग है कि क्षेत्रीय दौरों का हिंदी और गुजराती में व्यापक प्रचार किया जाए। प्रभावित पंचायतों तक भी इसकी जानकारी पहुंचाई जाए। साथ ही राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग से व्यापक परामर्श किया जाए। पत्र में कहा गया है कि जनजातियों से जुड़े नीतिगत विषयों पर संविधान के अनुच्छेद 338ए के तहत आयोग से परामर्श आवश्यक है।
आश्रम ने सुझाव देने की प्रक्रिया को सरल बनाने की भी मांग की है। सुझाव हिंदी, गुजराती और अंग्रेजी में स्वीकार किए जाएं। डाक के माध्यम से लिखित सुझाव भेजने की व्यवस्था भी हो। उल्लेखनीय है कि अरावली पर्वत को परिभाषित करने के लिए समिति का गठन उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर किया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा

