‘एक देश में दो विधान नहीं चलेंगे’, भोपाल में अशोक सिंघल जन्मशताब्दी का शंखनाद

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‘एक देश में दो विधान नहीं चलेंगे’, भोपाल में अशोक सिंघल जन्मशताब्दी का शंखनाद


‘एक देश में दो विधान नहीं चलेंगे’, भोपाल में अशोक सिंघल जन्मशताब्दी का शंखनाद


‘एक देश में दो विधान नहीं चलेंगे’, भोपाल में अशोक सिंघल जन्मशताब्दी का शंखनाद


‘एक देश में दो विधान नहीं चलेंगे’, भोपाल में अशोक सिंघल जन्मशताब्दी का शंखनाद


- मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव बोले- बहुविवाह मध्य प्रदेश में किसी कीमत पर स्वीकार नहीं

- विहिप ने मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने का उठाया संकल्प

- रवींद्र भवन में उमड़ा जनसैलाब, रामजन्मभूमि आंदोलन से सामाजिक समरसता तक गूंजा अशोक सिंघल का स्मरण; 27 सितंबर 2026 से 27 सितंबर 2027 तक देश-विदेश में चलेगा वर्षभर का अभियान

भोपाल, 27 सितंबर (हि.स.)। “एक ही देश और एक ही प्रदेश में दो विधान नहीं चलेंगे। समान नागरिक संहिता समय की मांग है। जब हिंदू राम कानूनन एक शादी करता है, तो मुस्लिम रहीम को भी एक ही शादी करनी होगी। मध्य प्रदेश में बहुविवाह किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।” मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को रवींद्र भवन में अशोक सिंघल जन्मशताब्दी वर्ष के प्रांतीय समारोह में यह कहते हुए समान नागरिक संहिता को लेकर अपनी सरकार का रुख स्पष्ट कर दिया।

उनके इस बयान के साथ ही मंच से मंदिरों की स्वायत्तता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के मुद्दे भी मुखर हुए। विश्व हिंदू परिषद के मध्य भारत प्रांत के इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बीच श्रद्धेय अशोक सिंघल के जीवन, रामजन्मभूमि आंदोलन में उनकी भूमिका और हिंदू समाज के संगठन के लिए किए गए कार्यों को स्मरण किया गया।

उल्लेखनीय है कि 27 सितंबर 1926 को जन्मे अशोक सिंघल की जन्मशताब्दी के अवसर पर विश्व हिंदू परिषद ने रविवार से वर्षभर चलने वाले राष्ट्रव्यापी अभियान का शुभारंभ किया। यह अभियान 27 सितंबर 2026 से 27 सितंबर 2027 तक चलेगा। विहिप के अनुसार देश के 47 प्रमुख केंद्रों सहित विदेशों में भी वैचारिक संगोष्ठियां, सामाजिक समरसता सम्मेलन, सेवा कार्य, जनजागरण कार्यक्रम और अन्य गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। जन्मशताब्दी वर्ष के माध्यम से अशोक सिंघल के जीवन और उनके सामाजिक-सांस्कृतिक योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की योजना है।

भोपाल में दिखी जन्मशताब्दी की व्यापक झलक

रवींद्र भवन सभागार में आयोजित प्रांतीय समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, विहिप के केंद्रीय सह संगठन महामंत्री विनायक राव देशपांडे और बजरंग दल के पूर्व राष्ट्रीय संयोजक एवं राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया प्रमुख वक्ताओं के रूप में उपस्थित रहे। मंच पर गुफा मंदिर धाम के पीठाधीश्वर स्वामी रामप्रवेशदास देवाचार्य महाराज, बौद्ध भिक्षु भदंत बुद्धघोष सहित संतगण एवं प्रबुद्धजन मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी चौधरी ओ.पी. गोंदिया ने की। वहीं मंच पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्यभारत प्रांत संघचालक अशोक पाण्डेय उपस्थित रहे।

समारोह का वातावरण अशोक सिंघल के व्यक्तित्व और कृतित्व के स्मरण के साथ वर्तमान सामाजिक-सांस्कृतिक प्रश्नों पर विमर्श से भी भरा रहा। वक्ताओं ने उनके जीवन को रामजन्मभूमि आंदोलन, हिंदू समाज के संगठन, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ते हुए जन्मशताब्दी वर्ष को व्यापक सामाजिक अभियान के रूप में आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

यूसीसी पर मुख्यमंत्री का सीधा संदेश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समान नागरिक संहिता को लेकर अपने संबोधन में किसी तरह की अस्पष्टता नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रदेशवासियों के सुझावों के आधार पर यूसीसी को लागू किया गया । एक देश और एक प्रदेश में अलग-अलग विधान नहीं चल सकते। यूसीसी को समय की मांग बताते हुए उन्होंने विवाह व्यवस्था और बहुविवाह के मुद्दे पर भी अपना रुख स्पष्ट किया।मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून के सामने समानता का सिद्धांत सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होना चाहिए। उन्होंने बहुविवाह के प्रश्न पर मध्य प्रदेश सरकार की नीति को भी स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रदेश में बहुविवाह किसी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने बताया कि प्रदेश सरकार गौ-पालन को बढ़ावा दे रही है। गौशालाओं को प्रति गाय मिलने वाला अनुदान ₹20 से बढ़ाकर ₹40 किया गया है। आगे भी जो आवश्यकता होगी वह इस दिशा में किया जाएगा।

मंदिर सरकारी नियंत्रण से मुक्त हों

समारोह में विहिप के केंद्रीय सह संगठन महामंत्री विनायक राव देशपांडे ने मंदिरों की स्वायत्तता का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि देशभर के देवालयों को सरकारी नियंत्रण से पूरी तरह मुक्त किया जाना चाहिए। मंदिरों के संचालन के लिए समाज और संतों की भागीदारी वाली स्वतंत्र, स्वायत्त और पारदर्शी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है।

उन्होंने स्वायत्त देवास्वम बोर्ड अथवा धर्म परिषद जैसी व्यवस्था की आवश्यकता बताते हुए कहा कि मंदिरों का संचालन समाज और संतों के हाथों में होना चाहिए। उनका यह वक्तव्य विहिप की लंबे समय से चली आ रही मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की मांग के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना गया। देशपांडे ने मंदिरों को केवल धार्मिक आस्था का केंद्र मानने के बजाय समाज के सांस्कृतिक और सेवा जीवन से जोड़ने पर जोर दिया। जन्मशताब्दी वर्ष में मंदिरों से जुड़े विषयों को भी व्यापक सामाजिक विमर्श के केंद्र में लाने का संकेत उनके संबोधन में दिखाई दिया।

पवैया बोले- रामजन्मभूमि आंदोलन था सांस्कृतिक पुनर्जागरण

बजरंग दल के पूर्व राष्ट्रीय संयोजक जयभान सिंह पवैया ने अशोक सिंघल के जीवन को रामजन्मभूमि आंदोलन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जोड़ते हुए कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा सांस्कृतिक पुनर्जागरण था। उन्होंने आंदोलन से जुड़े कारसेवकों के योगदान और बलिदान का स्मरण किया। साथ ही काशी में डोम राजा के घर संतों द्वारा भोजन ग्रहण किए जाने की घटना का उल्लेख करते हुए इसे सामाजिक समरसता का अनुपम उदाहरण बताया।

पवैया ने कहा कि सामाजिक समरसता और समाज की एकजुटता ही नए भारत की वास्तविक शक्ति है। उनके संबोधन में अशोक सिंघल की भूमिका को सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक संगठन के व्यापक संदर्भ में प्रस्तुत किया गया।

दिल्ली में अमित शाह और दत्तात्रेय होसबाले की मौजूदगी में मुख्य कार्यक्रम

अशोक सिंघल जन्मशताब्दी वर्ष का मुख्य राष्ट्रीय कार्यक्रम नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया गया। इसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले की उपस्थिति रही। देश के विभिन्न हिस्सों में भी जन्मशताब्दी कार्यक्रम आयोजित किए गए। लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में समारोह हुआ, जबकि कर्णावती यानी अहमदाबाद में भी मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई की उपस्थिति में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस तरह एक ही दिन देश के विभिन्न प्रमुख केंद्रों से अशोक सिंघल जन्मशताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों का शुभारंभ हुआ।

47 प्रमुख केंद्रों से विदेशों तक पहुंचेगा अभियान

विहिप ने जन्मशताब्दी वर्ष को एक दिन या एक आयोजन तक सीमित रखने के बजाय इसे वर्षभर चलने वाला अभियान बनाया है। संगठन के अनुसार देश के 47 प्रमुख केंद्रों सहित दुनिया के विभिन्न हिस्सों में कार्यक्रम होंगे। वैचारिक संगोष्ठियां, सामाजिक समरसता सम्मेलन और सेवा गतिविधियां इसके प्रमुख हिस्से होंगे। इस दौरान अशोक सिंघल के जीवन और कार्यों को केंद्र में रखकर उनके विचारों, संगठनात्मक योगदान और सामाजिक कार्यों पर चर्चा होगी। विहिप की ओर से हिंदू जागरण, सामाजिक समरसता, सेवा, गौरक्षा, संगठन विस्तार और मंदिरों से जुड़े विषयों को भी अभियान के प्रमुख आयामों में रखा गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी

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