नगर विकास एवं नगर पालिका विभाग ने केएमसी बोर्ड को भंग किया

WhatsApp Channel Join Now

कोलकाता, 08 जून (हि.स.)। पश्चिम बंगाल सरकार के नगर विकास एवं नगरपालिका मामलों के विभाग ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए कोलकाता नगर निगम (केएमसी) को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। सोमवार को जारी आदेश संख्या 1188/MA-15011(22)/22/2026-LS-MA SEC में कहा गया है कि निगम अपनी वैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में अक्षम हो गया है, जिसके चलते यह कदम उठाया गया। सरकार का यह निर्णय पांच जून को कोलकाता नगर निगम के मेयर के इस्तीफे के बाद उत्पन्न परिस्थितियों के मद्देनजर लिया गया है।

विभाग ने पहले पांच जून को निगम को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा था कि आखिर निगम को क्यों न भंग कर दिया जाए। सरकारी आदेश के अनुसार, मेयर के इस्तीफे के बाद निगम की प्रशासनिक संरचना गंभीर रूप से प्रभावित हो गई थी।

निगम आयुक्त द्वारा राज्य सरकार को भेजी गई रिपोर्ट में बताया गया कि मेयर के पद छोड़ने से नगर निगम की प्रमुख प्रशासनिक व्यवस्था लगभग ठप हो गई है। इसके साथ ही मेयर-इन-काउंसिल के एक सदस्य, बरो-12 के चेयरमैन और नगर निगम की विभिन्न समितियों से जुड़े प्रतिनिधियों के इस्तीफों ने स्थिति को और जटिल बना दिया।

रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले दो महीनों से मेयर-इन-काउंसिल की कोई बैठक नहीं हुई है। निगम की मासिक बैठकें भी निर्धारित नियमों के अनुसार नहीं हो पा रही हैं। कई महत्वपूर्ण समितियां निष्क्रिय हो चुकी हैं, जिससे नागरिक सेवाओं से जुड़े नीतिगत निर्णय प्रभावित हो रहे हैं। निगम प्रशासन ने आशंका जताई कि यदि यही स्थिति जारी रही तो कोलकाता में गंभीर नागरिक संकट उत्पन्न हो सकता है। मामले की समीक्षा के लिए राज्य सरकार ने एक विशेष समिति का गठन किया था।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि निगम में उत्पन्न गतिरोध के कारण प्रशासनिक कार्य लगभग ठप होने की स्थिति में पहुंच गए हैं और नागरिक सेवाओं को सुचारु रखने के लिए कानूनी प्रावधानों के तहत हस्तक्षेप आवश्यक है। समिति की सिफारिशों और निगम आयुक्त की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद राज्यपाल की ओर से कोलकाता नगर निगम अधिनियम, 1980 की धारा 117(1) के तहत निगम को अक्षम घोषित करते हुए तत्काल प्रभाव से भंग करने का आदेश जारी किया गया। इस फैसले के बाद अब कोलकाता नगर निगम के प्रशासनिक संचालन और भविष्य की व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार आगे की कार्रवाई करेगी।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस निर्णय को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह राज्य के सबसे बड़े शहरी निकाय से जुड़ा मामला है।

--------------------

हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा

Share this story