काशी नगरी ने रचा वैश्विक कीर्तिमान, रामनगर में ‘शहरी वन’ के लिए पौधरोपण कर चीन को पीछे छोड़ा
— 350 बीघा क्षेत्र में 2.50 लाख पौधों का किया रोपण
— 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' की टीम भी मौजूद
वाराणसी, 01 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी (काशी) में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में रविवार को एक वैश्विक कीर्तिमान रचा गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गोद लिए गांव डोमरी सुजाबाद में लगभग 350 बीघा क्षेत्र में विकसित किए जा रहे आधुनिक ‘शहरी वन’ में महज एक घंटे में 2,50,000 से अधिक पौधे लगाकर धर्मनगरी ने चीन का वृक्षारोपण रिकॉर्ड तोड़ दिया। इस दाैरान रिकाॅर्ड के माैके पर 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' की टीम भी मौके पर मौजूद रही।
नगर निगम के महापौर अशोक कुमार तिवारी व नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के नेतृत्व में इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट की शुरूआत सुबह 9:11 बजे हुई और इसे 10:11 पर पूरा कर लिया गया। वाराणसी नगर निगम के नेतृत्व में मियावाकी तकनीक से हुए पौधरोपण की गिनती अभी जारी है। इस ऐतिहासिक क्षण को अपने रिकॉर्ड में दर्ज करने के लिए 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' की टीम भी मौके पर मौजूद रही। खास बात यह है कि वर्ष 2018 में चीन में एक घंटे में 1,53,981 पौधों का रोपण कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था।
महापौर अशोक कुमार तिवारी ने मीडियाकर्मियों को बताया कि काशीवासियों के सहयोग से ये विश्व रिकॉर्ड संभव हो सका। सभी पौधों को जीवित रखना नगर निगम का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि अपरान्ह ढाई बजे मुख्यमंत्री वृक्षारोपण कार्यक्रम के संबंध में प्रस्तुतीकरण देखेंगे। प्रमाणपत्रों का वितरण भी करेंगे। इस कार्य में सहयोग देने के लिए नगर निगम के पांच हजार कर्मचारियों के साथ विभिन्न शिक्षण संस्थानों के बच्चे, एनडीआरफ, 39 जीटीसी, यूपी पुलिस, सिविल डिफेंस, सामाजिक संगठन, एनसीसी के कैडेट एनएसएस के छात्र और काशी की जनता मौजूद रही। लगभग पन्द्रह हजार लोगों ने इस वैश्विक रिकार्ड में पूरे उत्साह से भागीदारी की।
शहरी वन में गंगा घाटों के नाम पर होंगे 60 सेक्टर
इस 'शहरी वन' की सबसे अनूठी विशेषता इसकी बनावट है। पूरे वन क्षेत्र को 60 सेक्टरों में बांटा गया है। प्रत्येक सेक्टर का नाम काशी के प्रसिद्ध गंगा घाटों जैसे-दशाश्वमेध, ललिता घाट, नया घाट, केदार घाट, चौशट्टी घाट, मानमंदिर घाट और शीतला घाट के नाम पर रखा गया है। प्रत्येक सेक्टर में पांच हजार पौधे रोपे गए हैं। नगर आयुक्त के अनुसार इस 'शहरी वन' से गंगा किनारे एक हरा-भरा 'मिनी काशी' का स्वरूप नजर आएगा। डोमरी में विकसित हो रहा यह शहरी वन आने वाली पीढ़ियों के लिए ऑक्सीजन बैंक का काम करेगा। यह आध्यात्मिक शांति और आधुनिक अर्थशास्त्र का एक अनूठा उदाहरण है। यह परियोजना केवल हरियाली तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर निगम के लिए आय का बड़ा स्रोत भी बनेगी। मध्य प्रदेश की एमबीके संस्था के साथ हुए समझौते के तहत तीसरे वर्ष से ही निगम को दो करोड़ रुपये की आय होने लगेगी, जो सातवें वर्ष तक सात करोड़ रुपये वार्षिक तक पहुच सकती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

