काशी में तीन दिवसीय सम्राट विक्रमादित्य महोत्सव का भव्य आगाज, उप्र और मप्र के मुख्यमंत्री ने किया शुभारंभ

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काशी में तीन दिवसीय सम्राट विक्रमादित्य महोत्सव का भव्य आगाज, उप्र और मप्र के मुख्यमंत्री ने किया शुभारंभ


काशी में तीन दिवसीय सम्राट विक्रमादित्य महोत्सव का भव्य आगाज, उप्र और मप्र के मुख्यमंत्री ने किया शुभारंभ


- उप्र के मुख्यमंत्री योगी और मप्र के मुख्यमंत्री डॉ मोहन ने किया शुभारंभ

- एक समय रहा जब समाज के खलनायकों को हीरो के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास होता था: योगी

वाराणसी, 03 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी काशी में विक्रमोत्सव-2026 के तहत उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन और न्यायप्रियता को जन-जन तक पहुंचाने के लिये शुक्रवार को तीन दिवसीय महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य का जीवंत मंचन किया गया। बीएलडब्ल्यू मैदान पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का आगाज हुआ।

महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ की ओर से आयोजित इस महानाट्य की परिकल्पना मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की है। पद्मश्री डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित द्वारा रचित और राजेश कुशवाहा द्वारा निर्मित और संजीव मालवी के निर्देशन में प्रस्तुत महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य भारत की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। इसमें 225 से ज्यादा कलाकार हाथी, घोड़े, रथ, पालकियां, भव्य युद्ध, लाइट शो, आतिशबाजी नृत्य और बाबा महाकाल की भस्म आरती की दिव्य झलकियां शामिल रही। महान सम्राट विक्रमादित्य के जन्म से राजतिलक तक की गाथा, विक्रम बेताल की कथा और सनातन धर्म के उत्थान की महा काव्य कथा इस महानाट्य में जीवंत हुई।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध है और ऐसे आयोजन उस विरासत को जीवित रखने का माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि “सम्राट विक्रमादित्य केवल एक राजा नहीं थे, बल्कि न्याय, धर्म और लोककल्याण के प्रतीक थे। उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।” मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार सांस्कृतिक आयोजनों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, ताकि नई पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास से जुड़ सके। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस नाट्य कार्यक्रम की शैव परम्परा की काशी में होना प्रासंगिक है। इस नाट्य की प्रस्तुति मात्र एक नाट्य कार्यक्रम नहीं बल्कि अपने मूल्यों से जोड़ने का माध्यम भी बनेगा। एक समय रहा जब समाज के खलनायकों को हीरो के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास होता रहा। जिससे निश्चित रूप से इसका दुष्प्रभाव पीढ़ियों पर पड़ी। लेकिन आज समय बदल गया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में 66 करोड़ श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। श्री काशी विश्वनाथ धाम बनने के बाद से ही यहां श्रद्धालुओं का आगम अत्यधिक बढ़ा है। उन्होंने अयोध्या में श्रीराम की मंदिर का खोज एवं पूर्व में सम्राट विक्रमादित्य ने ही बनवाया था।

इससे पूर्व मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य भारतीय इतिहास के ऐसे महान शासक थे, जिनकी कीर्ति आज भी जनमानस में जीवित है। उन्होंने कहा कि “विक्रमादित्य का नाम न्याय और पराक्रम का पर्याय है। उनके जीवन पर आधारित यह मंचन न केवल मनोरंजक है, बल्कि शिक्षाप्रद भी है।” मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि मां गंगा के तीरे महान् सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित नाट्य कार्यक्रम की प्रस्तुति सारगर्भित है। तीन भाईयों की जोड़ी की चर्चा करते हुए कहा कि श्रीराम व लक्ष्मण, श्री कृष्ण व बलदाऊ तथा भर्तृहरि एवं विक्रमादित्य देश ही नहीं दुनिया में प्रसिद्ध है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश सरकार के साथ पर्यटन एवं संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए मिलकर कार्य कर रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशा निर्देशन में बेतवा नदी को भी जोड़ने का कार्य मध्यप्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश के साथ मिलकर किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने धर्म पट्टिका व पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया। उन्होंने 700 किलोग्राम की विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भी भेट की। जो शनिवार को श्री बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित होगा। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का प्रदेश के मंत्री राकेश सचान व मंत्री अनिल राजभर ने धर्म पट्टिका व पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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