(अपडेट) सांस्कृतिक सहयोग के नए संकल्प के साथ वाराणसी में ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की बैठक संपन्न
- ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की बैठक में सांस्कृतिक क्षेत्र में साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने पर बनी सहमति- सदस्य देशों ने विरासत, सहयोग और सतत विकास पर बातचीत के ज़रिए सांस्कृतिक साझेदारी को किया मज़बूत
वाराणसी, 05 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक एवं धार्मिक नगरी वाराणसी में आयोजित ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह (सीडब्ल्यूजी) की दो दिवसीय बैठक शुक्रवार को संपन्न हो गई। नदेसर मिंट हाउस स्थित एक तारांकित होटल में आयोजित बैठक के दूसरे दिन शुक्रवार को सदस्य देशों ने सांस्कृतिक विरासत संरक्षण, सांस्कृतिक संपदा की वापसी, साझा विरासत के संरक्षण तथा सतत विकास में संस्कृति की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया। बैठक का शुभारंभ भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ. अरविंद कुमार के उद्घाटन संबोधन से हुआ। उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने तथा साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
बैठक में पहला सत्र सांस्कृतिक विरासत संरक्षण एवं सांस्कृतिक संपदा की वापसी के लिए संस्थागत रणनीतियाँ विषय पर आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के डीन प्रो. रमेश सी. गौर ने की। इस दौरान सदस्य देशों ने सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और उनकी वापसी से जुड़े अनुभवों एवं सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को साझा किया। प्रतिनिधियों ने सांस्कृतिक संपदा की वापसी से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। चर्चा में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि सांस्कृतिक विरासत न केवल पहचान और परंपराओं की संरक्षक है, बल्कि यह सामुदायिक अधिकारों की रक्षा और अंतर-सांस्कृतिक समझ को भी मजबूत करती है।
दूसरे सत्र में साझा विरासत के संरक्षण हेतु सहयोगात्मक दृष्टिकोण : यूनेस्को विश्व धरोहर सम्मेलन, अमूर्त सांस्कृतिक विरासत और मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड कार्यक्रम के अंतर्गत संयुक्त नामांकन विषय पर विचार-विमर्श हुआ। इस सत्र का संचालन डॉ. अरविंद कुमार ने किया। प्रतिनिधियों ने संयुक्त नामांकन की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए इसे साझा सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, वैश्विक पहचान और भावी पीढ़ियों तक उनके हस्तांतरण का प्रभावी माध्यम बताया। साथ ही, इसे ब्रिक्स देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण अवसर भी माना गया।
दिन का अंतिम सत्र सतत विकास के प्रेरक के रूप में संस्कृति : 2030 के बाद का एजेंडा विषय पर केंद्रित रहा, जिसकी अध्यक्षता भारत सरकार की अतिरिक्त सचिव अमृता सरभाई ने की। चर्चा में संस्कृति को सामाजिक समावेशन, पर्यावरणीय स्थिरता, आर्थिक सुदृढ़ता और सामुदायिक कल्याण के महत्वपूर्ण आधार के रूप में रेखांकित किया गया। प्रतिभागियों ने 2030 के बाद के वैश्विक विकास एजेंडे में सांस्कृतिक आयामों को प्रभावी ढंग से शामिल करने के विभिन्न उपायों पर भी विचार साझा किए।
मेहमानों ने नमोघाट पर देखी भव्य गंगा आरती, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का किया भ्रमण
बैठक के समापन अवसर पर प्रतिनिधियों को काशी की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से परिचित कराने के लिए विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। विदेशी प्रतिनिधियों ने भव्य गंगा आरती, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का भ्रमण तथा लाइट एंड साउंड शो का अवलोकन किया। इन आयोजनों ने भारत की जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं और प्राचीन सभ्यतागत विरासत की एक सशक्त झलक प्रस्तुत की। दो दिवसीय इस बैठक के सफल समापन के साथ ब्रिक्स सदस्य देशों ने सांस्कृतिक सहयोग को और अधिक गहरा करने तथा लोगों के बीच संपर्क एवं पारस्परिक समझ को मजबूत बनाने की अपनी साझा प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया। दिन के कार्यक्रम में काशी की समृद्ध और जीवंत विरासत को प्रदर्शित करने वाला एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।--------------
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

