(साक्षात्कार) विपक्ष के पास न नीति है, न विजन; उच्च शिक्षा में बड़े बदलाव ला रही सरकार : रजनी तिवारी
- प्रशांत शेखर मिश्र
नई दिल्ली, 15 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा में रिक्त पदों पर नियुक्तियां करने, ग्रामीण महाविद्यालयों में डिजिटल सुविधाएं बढ़ाने और परीक्षाओं को पारदर्शी एवं नकलविहीन बनाने पर काम कर रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में बदलाव किए जा रहे हैं। छात्राओं को टैबलेट और स्मार्टफोन वितरित करने के साथ मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने की योजना पर भी काम चल रहा है। उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा राज्यमंत्री और हरदोई के शाहाबाद से विधायक रजनी तिवारी ने हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत में उच्च शिक्षण संस्थानों में खाली पदों को भरने, ग्रामीण अंचलों में डिजिटल क्लासरूम के विस्तार, नकल माफिया पर अंकुश, राज्य के विकास कार्यों, महिला आरक्षण और आगामी राजनीतिक परिदृश्यों पर विभाग एवं सरकार का दृष्टिकोण विस्तार से साझा किया। प्रस्तुत हैं उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश -
सवाल: एक गृहिणी से लेकर चार बार की विधायक और मंत्री पद तक के इस लंबे सफर को आप किस रूप में देखती हैं?
जवाब: देखिए, वह एक ऐसा दौर था जब मैं अचानक परिस्थितियों के चलते राजनीति में आई, लेकिन राजनीति में आने के बाद हमको यह स्पष्ट महसूस हुआ कि जनता ने मुझपर बहुत गहरा भरोसा जताया है और उस विश्वास की कसौटी पर मुझे हर हाल में खरा उतरना है। मैंने अपने लोगों और क्षेत्र के लिए जो भी संभव था, वह सारे कार्य किए; जनता की सेवा के साथ-साथ विकास कार्यों को गति दी। मुझे लगता है कि जनता जो चाहती थी और जो उनका अटूट विश्वास था, उस पर खरा उतरने में मैं पूरी तरह कामयाब रही हूं।
सवाल: राजनीति में लगातार चार बार की यह जीत किस भरोसे पर टिकी है?
जवाब: निश्चित तौर पर राजनीति में शुरुआत तो किसी भी पृष्ठभूमि से हो सकती है, लेकिन व्यवस्था में टिके रहने के लिए निरंतर कड़ी मेहनत करनी पड़ती है और जनता के विश्वास को जीतना होता है। जनता आप पर तभी भरोसा करती है जब आप उनके सुख-दुख में हमेशा मौजूद रहें। मैंने सदैव लोगों के बीच रहकर काम किया है। पिछले लगभग 20 वर्षों में कभी ऐसा अवसर नहीं आया जब मैं लगातार 4-5 दिन भी अपने घर पर रुकी हूँ। मैं सातों दिन और चौबीसों घंटे जनता के बीच रही हूं। इसी निरंतर संपर्क की वजह से एक अटूट विश्वास कायम हुआ, हमें अपनी जनता पर और जनता को हम पर।
सवाल: प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में खाली पदों को भरने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?
जवाब: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020) का मूल उद्देश्य ही यह है कि हम शिक्षा को अपनी संस्कृति और संस्कारों से जोड़ें, उसे आधुनिक तकनीक से समृद्ध करें और युवाओं को रोजगार के सीधे अवसर उपलब्ध कराएं। हमारी पूरी शिक्षा व्यवस्था इसी विजन के साथ धरातल पर काम कर रही है। स्वाभाविक है कि जब भी कोई नई और व्यापक नीति लागू होती है, तो उसे पूरी व्यवस्था में ढालने में थोड़ा समय लगता है।
सवाल: ग्रामीण डिग्री कॉलेजों में डिजिटल क्लासरूम और लैब जैसी आधुनिक सुविधाओं की वर्तमान में स्थिति उतनी अच्छी नहीं है, इसके पिछड़ने का कारण क्या है?
जवाब: ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षण संस्थानों को सुदृढ़ करने के लिए बड़े स्तर पर कार्य किया गया है। हालांकि यह सही है कि कुछ सुदूर ग्रामीण इलाकों में अभी कार्य शत-प्रतिशत पूरा होना बाकी है, लेकिन हमने ग्रामीण पृष्ठभूमि के कॉलेजों में भी डिजिटल लाइब्रेरी और डिजिटल पार्क स्थापित किए हैं। हमारा लक्ष्य है कि जिस तरह हम हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचा रहे हैं, उसी तरह आधुनिक डिजिटल तकनीक भी हर छात्र तक पहुंचे। युवाओं के भविष्य को संवारना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है, और सरकार निरंतर बजट और संसाधन बढ़ाकर ग्रामीण अंचलों के कॉलेजों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने का काम कर रही है।
सवाल: परीक्षाओं में शुचिता, पारदर्शिता और समयबद्ध सत्र संचालन सुनिश्चित करने के लिए विभाग क्या कर रहा है?
जवाब: प्रदेश ने वह दौर भी देखा है जब पूर्ववर्ती सरकारों के समय मंचों से कहा जाता था कि 'तुम हमें वोट दो, हम तुम्हें नकल करने की छूट देंगे'। उस समय की व्यवस्था ने युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेलने का काम किया था। आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में परीक्षा और सत्र प्रणाली में आमूलचूल बदलाव आया है। उच्च शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और नकलविहीन बनाया गया है। आज हमारी नीतियां युवाओं को केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाने के लिए तैयार कर रही हैं। परीक्षाओं और सत्रों को नियमित रखने के लिए व्यवस्था को पूरी तरह जवाबदेह बनाया गया है ताकि देश का युवा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सके।
सवाल: उच्च शिक्षा में छात्राओं का ड्रॉप-आउट रोकने और उनका इनरोलमेंट बढ़ाने के लिए क्या विशेष प्रयास हुए हैं?
जवाब: पहले सामाजिक और आर्थिक कारणों से बेटियों की पढ़ाई बीच में ही छूट जाती थी, लेकिन अब इसमें भारी गिरावट आई है। एक तरफ जहां प्रदेश की सुदृढ़ कानून व्यवस्था ने छात्राओं में सुरक्षा की भावना पैदा की है, वहीं, दूसरी तरफ सरकार की कल्याणकारी योजनाओं ने उन्हें संबल दिया है। छात्राओं को तकनीक से जोड़ने के लिए हमने बड़े पैमाने पर टैबलेट और स्मार्टफोन वितरित किए हैं और अब प्रदेश सरकार मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने की योजना पर भी तेजी से काम कर रही है। साथ ही, जिन मंडलों में विश्वविद्यालय नहीं थे, वहां राज्य विश्वविद्यालय और निजी विश्वविद्यालय स्थापित किए गए। बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर न जाना पड़े, इसके लिए स्थानीय स्तर पर महिला डिग्री कॉलेज और राजकीय महाविद्यालय खोले गए हैं ताकि ग्रामीण परिवेश की बेटियां भी बिना किसी रुकावट के अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें।
सवाल: 12वीं के बाद उच्च शिक्षा में छात्रों का इनरोलमेंट बढ़ाने के लिए विभाग किस रणनीति पर कार्य कर रहा है?
जवाब: पूर्व में बुनियादी शिक्षा में ही बच्चे स्कूलों से बाहर रह जाते थे, जिसके लिए हमने 'स्कूल चलो अभियान' चलाकर शत-प्रतिशत दाखिले सुनिश्चित किए। अब हमने बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के बीच एक सीधा समन्वय स्थापित किया है। विभाग इस बात की गहन निगरानी कर रहा है कि यदि कोई छात्र 12वीं के बाद उच्च शिक्षा में प्रवेश नहीं ले रहा है, या प्रथम वर्ष व सेमेस्टर के बाद पढ़ाई छोड़ रहा है, तो उसके पीछे क्या कारण हैं। इस ड्रॉप-आउट को रोकने के लिए व्यवस्थागत कदम उठाए जा रहे हैं। आज उच्च शिक्षा में छात्र और छात्राएं दोनों समान रूप से आगे बढ़ रहे हैं और सरकार शिक्षा की गुणवत्ता को लगातार बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
सवाल: महिला आरक्षण के विषय पर विपक्षी दलों की भूमिका को आप किस प्रकार देखती हैं?
जवाब: देश की संसद में विपक्ष का दोहरा चरित्र पूरे देश ने देखा है। जब संसद में ऐतिहासिक 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पेश किया गया, तो किस प्रकार विपक्षी दलों ने महिलाओं को विधायी संस्थाओं में उचित प्रतिनिधित्व मिलने से रोकने का कुत्सित प्रयास किया। विपक्ष के नेता मंचों पर खड़े होकर आधी आबादी के हितैषी बनने का दिखावा करते हैं, लेकिन जब वास्तव में नीतियां बनाने और महिलाओं को अधिकार देने का समय आता है, तो वे विरोध में खड़े हो जाते हैं। वे केवल वोट बैंक की खातिर बात करते हैं, लेकिन जब नीतिगत फैसले की घड़ी आती है तो अपने कदम पीछे खींच लेते हैं। प्रदेश और देश की महिलाएं विपक्ष के इस अवसरवादी और दोहरे चरित्र को बहुत अच्छी तरह समझ चुकी हैं।
सवाल: समाजवादी पार्टी के 'पीडीए' फॉर्मूले की काट के लिए आपके पास क्या रणनीति है?
जवाब: विपक्ष अपने नारों को लेकर खुद ही असमंजस में है। कभी वे 'पी' का अर्थ पिछड़ा बताते हैं, तो कभी पंडित तो कभी कुछ और। उनकी न कोई विचारधारा है, न कोई स्पष्ट नीति और न ही कोई विजन। वे स्थान देखकर अपनी परिभाषाएं बदलते हैं। भारतीय जनता पार्टी सर्वसमाज की पार्टी है, जिसने बिना किसी तुष्टीकरण के हर वर्ग के उत्थान के लिए योजनाएं बनाई हैं। जनता बेहद जागरूक है; आप किसी को एक बार भ्रमित कर सकते हैं, लेकिन बार-बार नहीं। काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती। मोदी जी और योगी जी के विकास कार्यों के सामने विपक्ष के पास कोई ठोस चुनावी मुद्दा नहीं बचा है।
सवाल: सत्ता और संगठन में महिला प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के लिए सरकार क्या कर रही है?
जवाब: भारतीय जनता पार्टी में मातृशक्ति का सम्मान सर्वोच्च है। समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास तभी संभव है जब आधी आबादी की उसमें सक्रिय और बराबर की भागीदारी हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करके महिला सशक्तिकरण को ऐतिहासिक दिशा दी है। ग्रामीण स्तर पर स्वयं सहायता समूहों और विभिन्न योजनाओं के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
सवाल: शाहाबाद क्षेत्र के विकास के लिए आपके प्रमुख कार्य और 'ड्रीम प्रोजेक्ट' क्या हैं?
जवाब: जनता ने हमसे जो भी मांगें रखीं, चाहे वह ग्रामीण अंचल की हों या नगर क्षेत्र की, हमने उन सभी को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया है। क्षेत्र में ऐसा कोई बड़ा वादा नहीं है जिसे हमने अधूरा छोड़ा हो। आंझी-शाहाबाद रेलवे ओवरब्रिज की बहुप्रतीक्षित मांग को हमने पूरा कराया। शाहाबाद-पिहानी, शाहाबाद-सांडी और पाली-अनंगपुर जैसे कई प्रमुख संपर्क मार्गों का चौड़ीकरण और कायाकल्प कराया गया। कोरोना महामारी के दौरान अपनी विधायक निधि से ऑक्सीजन प्लांट की व्यवस्था सुनिश्चित की। कस्बे में आधुनिक रोडवेज बस अड्डे का निर्माण करवाया और मुंसिफ कोर्ट की स्थापना के लिए शासन से धन स्वीकृत कराया। क्षेत्र में नई सीएचसी, पीएचसी और बेटियों के लिए राजकीय महिला डिग्री कॉलेज का निर्माण कराया गया है। साथ ही, हमारा अगला बड़ा संकल्प शाहाबाद में एक अत्याधुनिक इंजीनियरिंग कॉलेज स्थापित करने का है, जिसे हम आगामी समय में अवश्य पूरा करेंगे।
सवाल: लंबे समय तक प्रतिनिधित्व के बाद बनने वाली संभावित सत्ता-विरोधी लहर (एंटी-इनकंबेंसी) को आप कैसे देखती हैं?
जवाब: मुझे आश्चर्य होता है जब लोग एंटी-इनकंबेंसी की बात करते हैं। लगभग दो दशकों के इस राजनीतिक सफर के बाद भी हमारे क्षेत्र में कहीं कोई सत्ता-विरोधी लहर नहीं है। इसका सीधा कारण यह है कि हम जनता के बीच एक जनप्रतिनिधि के रूप में नहीं, बल्कि उनके परिवार के सदस्य के रूप में रहते हैं। केंद्र में मोदी जी का सशक्त नेतृत्व और उत्तर प्रदेश में योगी जी की सुशासन नीति हमारे साथ है। जनता इन विकास नीतियों को भली-भांति समझती है, इसलिए हमें क्षेत्र में कोई कठिनाई नहीं है; हम सभी मिलकर एक परिवार की तरह कार्य कर रहे हैं।
सवाल: विपक्ष का आरोप है कि ग्रामीण जनता स्थानीय स्तर पर बदलाव चाहती है, इस पर आपका क्या कहना है?
जवाब: चुनाव नजदीक आते ही विपक्ष के पास अनर्गल आरोप लगाने के सिवा कोई विकल्प नहीं बचता। विपक्ष भली-भांति जानता है कि चुनाव परिणाम क्या आने वाले हैं। जनता का विश्वास उन पर से पूरी तरह उठ चुका है और उनकी राजनीतिक जमीन खिसक चुकी है। हार के बाद जनता के बीच क्या बहाना बनाना है, वे अभी से उसका ताना-बाना बुन रहे हैं। हमारी पार्टी केवल विकास, सुशासन और जनसेवा के एजेंडे पर अडिग है।
सवाल: क्या क्षेत्र में कोई ऐसा वादा बाकी है जिसका जवाब आपको आगामी चुनाव में देना पड़े?
जवाब: जनता से किए गए सभी प्रमुख वादों को हमने धरातल पर उतारा है लेकिन विकास एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है; आवश्यकताएं कभी समाप्त नहीं होतीं। जिस प्रकार हम अपने घर को निरंतर और सुंदर व व्यवस्थित बनाते हैं, उसी प्रकार पूरी विधानसभा हमारा परिवार है। हमने व्यापक कार्य कराए हैं, किंतु क्षेत्र को और अधिक विकसित और समृद्ध बनाने का संकल्प हमेशा बना रहेगा। विकास की यह गति कभी रुकने वाली नहीं है। भाजपा और हम पूरी तरह 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' के मूल मंत्र पर काम करते हैं। हमने क्षेत्र में बिना किसी भेदभाव के विकास कार्य कराए हैं और समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़े हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

