विहिप केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक संपन्न, परिवार कानूनों की समीक्षा, गौ संरक्षण और नशा मुक्ति पर जोर

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विहिप केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक संपन्न, परिवार कानूनों की समीक्षा, गौ संरक्षण और नशा मुक्ति पर जोर


हरिद्वार, 19 जून (हि.स.)। विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की दो दिवसीय बैठक शुक्रवार को हरिद्वार स्थित निष्काम सेवा ट्रस्ट, भूपतवाला परिसर में संपन्न हो गई।

बैठक के उपरांत दण्डी स्वामी स्वामी जितेंद्रानन्द सरस्वती तथा विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने संयुक्त प्रेस वार्ता में बैठक के प्रमुख विषयों और प्रस्तावों की जानकारी दी। बैठक में परिवार संस्था की मजबूती, गौ रक्षा एवं गौ संवर्धन, नशा मुक्ति, सामाजिक समरसता, जनसंख्या असंतुलन और जनगणना से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा की गई। संतों और प्रतिनिधियों ने हिंदू समाज की एकता एवं सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण का आह्वान किया।

प्रेस वार्ता में कहा गया कि परिवार और विवाह संस्था भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। मार्गदर्शक मंडल ने हाल के वर्षों में व्यभिचार को अपराध की श्रेणी से बाहर किए जाने, लिव-इन संबंधों तथा समलैंगिक जोड़ों को साथ रहने की स्वतंत्रता जैसे विषयों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे विवाह संस्था कमजोर हो सकती है। परिषद ने परिवार कानूनों की व्यापक समीक्षा कर उन्हें परिवार और विवाह संस्था के अनुकूल बनाने की आवश्यकता बताई। साथ ही समाज, परिवार और संत समुदाय से नई पीढ़ी को स्वधर्म और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया गया।

अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े आरोपों पर विहिप नेतृत्व ने कहा कि मंदिर ट्रस्ट ने स्वयं मुख्यमंत्री से एसआईटी जांच कराने का अनुरोध किया है और जांच में पूरा सहयोग दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

विहिप ने यह भी कहा कि राम मंदिर के नाम पर धन या सोना एकत्र करने वाले अन्य ट्रस्टों के खातों की भी जांच होनी चाहिए। संगठन ने जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचने और मामले का राजनीतिकरण न करने की अपील की।

बैठक में गौ रक्षा और गौ संवर्धन को प्रमुख विषयों में शामिल किया गया। विहिप ने संपूर्ण गौवंश की रक्षा के लिए केंद्रीय कानून बनाए जाने की मांग की। साथ ही विभिन्न राज्यों में गौ संरक्षण कानूनों को और सख्त बनाने का आग्रह किया गया।

परिषद ने समाज के सक्षम लोगों को गौपालन के लिए प्रेरित करने का निर्णय लिया और कहा कि गोबर एवं गौमूत्र आधारित उत्पाद किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं। कुछ लोगों द्वारा गाय को “राष्ट्रमाता” का दर्जा देने के सुझाव पर भी चर्चा हुई, जिस पर देशव्यापी सहमति बनाने के लिए संतों के साथ अभियान चलाने की बात कही गई।

बैठक में देश में बढ़ती नशाखोरी पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया गया कि बजरंग दल पिछले एक वर्ष से नशा मुक्ति अभियान चला रहा है। अब इस अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए संत समाज भी व्यापक जनजागरण कार्यक्रम संचालित करेगा।

संतों ने संत रविदास की 650वीं जयंती को देशभर में सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक जागरण के रूप में मनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संत रविदास के संदेश समाज के सभी वर्गों तक पहुंचाए जाने चाहिए।

बैठक में आगामी जनगणना के संदर्भ में जनजातीय समाज को ओआरपी (अन्य धर्म और विश्वास) श्रेणी में दर्ज करने के प्रयासों पर चिंता व्यक्त की गई और इसे उनकी मूल सांस्कृतिक पहचान से अलग करने का प्रयास बताया गया। संतों ने कहा कि जनजातीय समाज हिंदू समाज का अभिन्न अंग है। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा जनसंख्या असंतुलन के अध्ययन के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति का स्वागत करते हुए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और अलगाववादी प्रवृत्तियों की रोकथाम की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

बैठक का समापन हिंदू समाज की एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक जागरूकता को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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