पतंजलि विश्वविद्यालय में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के चिंतन शिविर में सांस्कृतिक संरक्षण पर हुई चर्चा

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पतंजलि विश्वविद्यालय में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के चिंतन शिविर में सांस्कृतिक संरक्षण पर हुई चर्चा


पतंजलि विश्वविद्यालय में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के चिंतन शिविर में सांस्कृतिक संरक्षण पर हुई चर्चा


हरिद्वार, 30 अप्रैल (हि.स.)। नगर में स्थित पतंजलि विश्वविद्यालय में गुरुवार को केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय की ओर से दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ आयोजित किया गया।

इस माैके पर केंद्रीय जनजातीय कल्याण मंत्री जुएल ओराम ने कहा कि जनजातीय संस्कृति, परंपराएँ और जीवनशैली समृद्ध हैं और उनका विकास, पहचान और सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखते हुए किया जाएगा। कार्यक्रम में राज्यमंत्री दुर्गादास उइके ने ऐतिहासिक उदाहरणों से जनजातीय समाज के गौरव और योगदान पर प्रकाश डाला। मंत्रालय के सचिव मनीष ठाकुर ने समावेशी विकास और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा पर जोर दिया, जबकि सचिव रंजना चोपड़ा ने जनजातीय समुदायों को पर्यावरण संरक्षक बताया।

शिविर में आचार्य बालकृष्ण और योगऋषि स्वामी रामदेव ने आयुर्वेद और योग के माध्यम से जनजातीय स्वास्थ्य और सशक्तीकरण पर बल दिया। शिविर में शिक्षा, आजीविका, स्वास्थ्य, संस्कृति संरक्षण और डिजिटल सशक्तीकरण पर चर्चा हुई। कार्यक्रम का समापन अतिथियों के आभार और विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना के साथ हुआ।

कार्यक्रम का उद्देश्य जनजातीय समुदायों के समग्र विकास और सशक्तीकरण को सुनिश्चित करना था। इसमें विभिन्न राज्यों के प्रधान सचिव, वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ और जनजातीय क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल हुए। पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण तथा स्वामी रामदेव ने अतिथियों का शॉल, माला और स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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