स्वदेशी आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का राष्ट्रीय दर्शन : कश्मीरी लाल
देहरादून, 28 जून (हि.स.)। स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय संघटक कश्मीरी लाल ने कहा है कि स्वदेशी केवल आर्थिक अवधारणा नहीं, बल्कि भारत के सांस्कृतिक, सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन का मूल दर्शन है। उन्होंने कहा कि देश को आर्थिक, बौद्धिक और तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्थानीय संसाधनों, कौशल, उद्योग और उद्यमिता को बढ़ावा देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उत्तराखंड प्रांत के दो दिवसीय 'प्रांत विचार वर्ग' रविवार को संपन्न हुआ। इस अवसर पर कश्मीरी लाल ने कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के वर्तमान दौर में भारत को अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आत्मनिर्भर बनना होगा। स्वदेशी का अर्थ दुनिया से अलग-थलग होना नहीं, बल्कि अपनी क्षमता, संसाधनों और नवाचार के आधार पर एक सशक्त तथा आत्मविश्वासी राष्ट्र का निर्माण करना है।
उन्होंने कहा कि बदलते समय की चुनौतियों के अनुरूप 'युगानुकूल स्वदेशी' की अवधारणा को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना आवश्यक है, ताकि भारत का विकास मॉडल उसकी अपनी परिस्थितियों, परंपराओं और आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित हो सके।
कश्मीरी लाल ने कहा कि स्वदेशी आंदोलन केवल स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाली जनचेतना का व्यापक अभियान है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से गांव-गांव और घर-घर तक स्वदेशी का संदेश पहुंचाने तथा स्थानीय उत्पादों के उपयोग, कुटीर एवं लघु उद्योगों के संवर्धन और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। युवाओं को उद्यमिता, कौशल विकास और स्वरोजगार से जोड़कर देश की आर्थिक शक्ति को मजबूत किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से स्वदेशी जागरण मंच स्वावलंबन केंद्रों के माध्यम से प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और रोजगारोन्मुख गतिविधियों का विस्तार कर रहा है।
उन्होंने कहा कि स्वदेशी का विचार केवल आर्थिक समृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्वाभिमान, सामाजिक समरसता और सतत विकास की आधारशिला है। इसके व्यापक प्रसार से भारत वैश्विक स्तर पर आत्मनिर्भर, सशक्त और विकसित राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान और अधिक मजबूत कर सकता है।
दो दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग में स्वदेशी की विकास यात्रा, उद्यमिता विकास, स्वावलंबन केंद्रों की कार्यप्रणाली, स्वदेशी मेलों के आयोजन, संगठन विस्तार, पूर्णकालिक कार्यकर्ता निर्माण, टीम वर्क, संगठन की कार्यपद्धति तथा विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और सरकारी संस्थाओं के साथ समन्वय जैसे विषयों पर 14 सत्र आयोजित किए गए।
प्रांत सह संयोजक गौरव कुमार ने कहा कि संगठन समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए महिला, युवा और वरिष्ठ नागरिक आयामों को और अधिक सक्रिय बनाएगा। उन्होंने कहा कि स्वदेशी विचार के व्यापक प्रसार के लिए सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और डिजिटल माध्यमों का प्रभावी उपयोग किया जाएगा।
शिविर में संगठन के प्रेरणा स्रोत श्रद्धेय दत्तोपंत ठेंगड़ी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, बाबू गेनू व अन्य स्वदेशी पुरोधाओं के जीवन एवं विचारों का स्मरण किया गया। इसके अलावा कार्यालय व्यवस्था, वित्तीय अनुशासन, पारदर्शी निधि संग्रह, स्वावलंबन केंद्रों की आर्थिक संरचना और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषयों पर भी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया।
समापन सत्र में निर्णय लिया गया कि स्वदेशी के वैचारिक अधिष्ठान को उत्तराखंड के प्रत्येक जिले, तहसील और ग्राम स्तर तक पहुंचाते हुए 'स्वावलंबी भारत अभियान' को और गति दी जाएगी। इसके लिए व्यापक जनसंपर्क, प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम चलाने की कार्ययोजना भी तैयार की गई।
शिविर में नितिन जोशी, पद्म शर्मा, सुनील, सुशील कुमार, अजय, सुषमा, अलका, शुभाशीष, अमित शर्मा सहित बड़ी संख्या में प्रांत स्तरीय पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत के साथ हुआ।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

