(लीड) महिला आरक्षण पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के खिलाफ विधानसभा में निंदा प्रस्ताव पारित

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(लीड) महिला आरक्षण पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के खिलाफ विधानसभा में निंदा प्रस्ताव पारित


विधानसभा ने राजनीति में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण शीघ्र लागू करने का किया अनुरोध

देहरादून, 28 अप्रैल (हि.स.)। उत्तराखंड विधानसभा का ‘नारी सम्मान-लोकतंत्र में अधिकार’ विषय पर एक दिवसीय विशेष सत्र में भाजपा ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की माैजूदगी में नारी आरक्षण विधेयक काे लेकर उनके नकारात्मक रुख की निंदा का प्रस्ताव पारित करा दिया। इस घटनाक्रम ने विपक्ष को असहज स्थिति में ला दिया। बाद में शाम 6 बजकर 10 मिनट पर सदन काे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। मंगलवार काे उत्तराखंड विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र ‘नारी सम्मान-लोकतंत्र में अधिकार’ विषय पर आयोजित किया गया। इस सत्र के दौरान महिला सशक्तिकरण,अधिकारों और समान भागीदारी से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। सत्र में विभिन्न दलों के सदस्यों ने अपने विचार रखे और महिला अधिकारों को लेकर नीतिगत पहल पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। सत्र में दोनों पक्षों के विधायकों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए आंगनबाड़ी मानदेय, शिक्षा व्यवस्था और जनहित से जुड़े विषयों पर अपने-अपने विचार रखे। सत्ता पक्ष ने सरकार की उपलब्धियों और नीतियों का पक्ष मजबूती से रखा, जबकि विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों पर सवाल उठाते हुए जवाबदेही की मांग की।

सदन में चर्चा के दौरान माहौल कई बार तीखा भी हुआ, लेकिन सदन में लोकतांत्रिक परंपराओं के तहत संवाद जारी रहा। सत्ता पक्ष ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान हुए विभिन्न घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। खटीमा गोलीकांड, मसूरी गोलीकांड और रामपुर तिराहा कांड का भी जिक्र किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान विपक्ष के सवालों का तथ्यात्मक और स्पष्ट जवाब दिया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न मुद्दों—आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के मानदेय, मदरसा शिक्षा और चारधाम यात्रापर सरकार का रुख विस्तार से रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पूर्व में आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के मानदेय में वृद्धि कर चुकी है। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में भी इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लिए जाएंगे, क्योंकि कार्यकर्त्रियों की अपेक्षाओं को सरकार समझती है। मदरसा शिक्षा के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 'पुरानी कुप्रथाओं और कबीलाई मानसिकता' को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अल्पसंख्यक बच्चों को भी नई शिक्षा नीति से जोड़ा जाएगा, ताकि उन्हें समान अवसर और बेहतर भविष्य मिल सके। मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से समाज में सकारात्मक संदेश देने की अपील करते हुए कहा कि सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत पर काम कर रही है। चारधाम यात्रा को लेकर मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने स्वार्थ के लिए इस पवित्र यात्रा को बदनाम करने का प्रयास कर रही है।

सदन में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के रुख को महिला विरोधी बताया। विशेष बात यह रही कि उत्तराखंड विधानसभा में कांग्रेस इस बार वॉकआउट नहीं कर पाई और सरकार ने कांग्रेस विधायकों की मौजूदगी में ही उनके नकारात्मक रुख की निंदा का प्रस्ताव पारित करा दिया। इस घटनाक्रम ने विपक्ष को असहज स्थिति में ला दिया। सदन में केवल आलोचना तक बात सीमित नहीं रही, बल्कि एक सकारात्मक पहल भी सामने आई। उत्तराखंड विधानसभा ने केंद्र सरकार से संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण शीघ्र लागू करने का अनुरोध भी किया गया। इस कदम को महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

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