भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियां और सांस्कृतिक विविधता सबसे बड़ी ताकत : रवि कुमार अय्यर

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भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियां और सांस्कृतिक विविधता सबसे बड़ी ताकत : रवि कुमार अय्यर


रुद्रपुर, 14 जून (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय सम्पर्क टोली सदस्य रवि अय्यर ने कहा कि भारत की प्रगति केवल तकनीकी और आर्थिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक समरसता भी उसकी शक्ति का आधार हैं।

द्रोण कॉलेज, रुद्रपुर जनपद उधमसिंह नगर में राष्ट्रीय स्वयसेवक संघ कार्यकर्ता विकास वर्ग (प्रथम) समापन समारोह को बतौर मुख्य वक्ता रवि अय्यर ने यह विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता शिवकुमार अग्रवाल ने की।

मुख्य वक्ता ने कहा कि भारत आज विश्व के शक्तिशाली राष्ट्रों में शामिल है और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। उन्होंने कहा कि सीमित लागत में चंद्रयान मिशन की सफलता और रक्षा क्षेत्र में बढ़ती आत्मनिर्भरता देश की क्षमता, प्रतिभा और वैज्ञानिक कौशल का प्रमाण है।

अय्यर ने कहा कि भारत की प्रगति केवल आर्थिक और तकनीकी उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत भी विश्व को दिशा देने का कार्य कर रही है। उन्होंने जनसंख्या संतुलन के महत्व पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज और राष्ट्र के दीर्घकालिक विकास के लिए इस विषय पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

उन्होंने देश निर्माण में सिख और बंगाली समाज के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। विभिन्न भाषाओं, परंपराओं और संस्कृतियों के बावजूद देश की एकता और राष्ट्रीय चेतना उसे विश्व में विशिष्ट पहचान प्रदान करती है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य शांति, अध्यात्म और सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र है। देवभूमि देश ही नहीं, बल्कि विश्व भर के लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक विरासत भारत की वैश्विक पहचान को और मजबूत कर रही है।

समापन समारोह में स्वयंसेवकों ने दंड, नियुद्ध, शारीरिक, बौद्धिक और संगठनात्मक प्रशिक्षण की झलक प्रस्तुत करते हुए अनुशासन एवं राष्ट्रसेवा का प्रदर्शन किया। घोष वादन की प्रस्तुति ने भी उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया।

वर्ग कार्यवाह ने 20 दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए प्रशिक्षण अवधि के दौरान आयोजित शारीरिक, बौद्धिक एवं संगठनात्मक गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ग का उद्देश्य स्वयंसेवकों के व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रकार्य के प्रति समर्पण की भावना को सुदृढ़ करना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

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