(लीड) राहुल गांधी हिन्दू धर्म विरोधी मानसिकता, असत्य प्रचार छोड़ें : शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
ज्योतिर्मठ, 25 अगस्त (हि.स.)। ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के मनुस्मृति संबंधी बयानों पर आज कड़ी नाराज़गी व्यक्त की और उन्हें चेतावनी दी कि वह राजनीतिक मतभेदों के कारण हिन्दू धर्मशास्त्र विरोधी मानसिकता, असत्य प्रचार एवं भारत की सांस्कृतिक विरासत का अपमान करना छोड़ें।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मंगलवार को एक कठोर बयान जारी करके कहा, पुणे में एक कार्यक्रम के दौरान श्री राहुल गाँधी द्वारा हिन्दुओं के प्रमुख धर्मशास्त्र मनुस्मृति और सनातन सांस्कृतिक विचारों पर दिया गया बयान उनकी घोर अज्ञानता, सतही समझ और सनातन परम्परा के प्रति दुर्भावनापूर्ण मानसिकता को उजागर करता है। राजनीतिक लाभ पाने के लिए प्राचीन धर्मशास्त्रों के श्लोकों को सन्दर्भ से काटकर पेश करना केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत का अपमान ही नहीं, बल्कि समाज को भ्रमित करने का कुत्सित प्रयास है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, राहुल गांधी ने मनुस्मृति और सनातन सांस्कृतिक विचारों के संबंध में जो टिप्पणियां कीं, वे धर्मशास्त्रों की सतही समझ को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि संसद से लेकर सार्वजनिक मंचों तक मनुस्मृति और धर्मशास्त्रों के संबंध में बार-बार असत्य एवं भ्रामक प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन धर्म और शास्त्रों के विषय में टिप्पणी करते समय तथ्य, संदर्भ और अध्ययन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मनुस्मृति सहित हिन्दू धर्मशास्त्रों को लेकर समाज में विभिन्न मत और व्याख्याएं प्रचलित हैं। ऐसे में किसी ग्रंथ के संबंध में एकतरफा धारणा प्रस्तुत करने के बजाय उसके मूल स्वरूप, संदर्भ, उद्देश्य और शास्त्रीय परंपरा को समझना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मंचों से धर्मग्रंथों पर की जाने वाली टिप्पणियों का समाज के विभिन्न वर्गों पर प्रभाव पड़ता है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मनुस्मृति के श्लोक ‘पिता रक्षति कौमारे, भर्ता रक्षति यौवने...’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें स्त्री की परतंत्रता की बात नहीं कही गई है, बल्कि परिवार और समाज की ओर से उसकी सुरक्षा और दायित्व का उल्लेख है। उन्होंने कहा, संरक्षण और दायित्व का विधानः जिस श्लोक पिता रक्षति कौमारे, भर्ता रक्षति यौवने... को राहुल गाँधी ने अनुचित रूप से उद्धृत किया, वह स्त्री की परतन्त्रता का नहीं, बल्कि परिवार और समाज द्वारा उसकी सुरक्षा, सम्मान और भरण-पोषण के दायित्व का विधान है। संस्कृत व्याकरण की दृष्टि से यहाँ 'रक्षति' (रक्षा करना) मूल अर्थ में सुरक्षा का विधान करती है, न कि किसी प्रकार के नियंत्रण 'नियन्त्रयति' की।
शंकराचार्य ने कहा कि सनातन परम्परा में नारी का स्थान, भारतीय वांग्मय में नारी को केवल आश्रित नहीं, बल्कि 'शक्ति' और महानिर्मात्री माना गया है। ऋग्वेद की मन्त्रद्रष्टा ऋषिकाओं गार्गी, मैत्रेयी, लोपामुद्रा से लेकर यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः का उद्घोष करने वाली यह संस्कृति अधिकार-केन्द्रित संघर्ष के स्थान पर परस्पर पूरकता और सर्वोच्च आदर पर आधारित है।
उन्होंने राहुल गांधी के इस कथित तर्क को भी खारिज किया कि भारतीय जनता पार्टी मनुस्मृति की समर्थक है। उन्होंने कहा, राहुल गाँधी को यह राजनीतिक भ्रम भी व्याप्त है कि भारतीय जनता पार्टी मनुस्मृति की समर्थक पार्टी है, जबकि यह पूर्णतः निराधार और सत्य से परे है। स्वतन्त्र भारत का शासन और किसी भी राजनीतिक व्यवस्था का संचालन केवल भारत के संविधान से होता है। अपने राजनीतिक नैरेटिव को गढ़ने के लिए किसी दल को जबरन मनुस्मृति से जोड़ना राहुल गाँधी का एक और मनगढ़ंत असत्य है।
शंकराचार्य ने कहा, राहुल गाँधी के लगातार मनुस्मृति विरोधी बयानों से यह पूरी तरह सिद्ध हो चुका है कि उनकी मानसिकता मूलतः हिन्दू धर्मशास्त्रों और सनातन जीवन-दृष्टि के विरोध की है। संसद् से लेकर सार्वजनिक मञ्च्चों तक मनुस्मृति और धर्मशास्त्रों के विषय में बार-बार असत्य व भ्रामक प्रचार करने के कारण ही हमने पूर्व में उन्हें 'हिन्दू धर्म से बहिष्कृत' घोषित किया था।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, हम उन्हें चेतावनी देते हैं कि वे अपनी इस धर्मविरोधी और शास्त्रविरोधी बयानबाजी से बाज़ आएं। यदि वे और उनकी कांग्रेस पार्टी बिना पूर्ण शास्त्रीय अध्ययन और बोध के सनातन धर्मग्रन्थों पर इसी प्रकार भ्रामक और अपमानजनक टिप्पणियाँ करते रहे, तो देश का प्रबुद्ध और सनातनप्रेमी समाज उनकी इस वैचारिक अपरिपक्वता का तीव्र और मुखर विरोध जारी रखेगा।
ज्योतिष्पीठेश्वर शंकराचार्य ने पहली बार कांग्रेस के शीर्ष नेता के विरुद्ध इस प्रकार से कठोर वक्तव्य दिया है।
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हिन्दुस्थान समाचार/ राजेश पाण्डेय
हिन्दुस्थान समाचार / सचिन बुधौलिया

