भेदभाव मन का विषय, शक्ति और संस्कार से होगा समाज परिवर्तन: डॉ मोहन भागवत

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भेदभाव मन का विषय, शक्ति और संस्कार से होगा समाज परिवर्तन: डॉ मोहन भागवत


देहरादून, 22 फरवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में “संघ यात्रा-नये क्षितिज, नये आयाम” विषय पर प्रमुख जन गोष्ठी व विविध क्षेत्र समन्वित संवाद के द्वितीय सत्र में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया। हिमालयन कल्चरल सेंटर के सभागार में आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में कुल 190 प्रश्न आए। इनमें से प्रमुख प्रश्नों का सर संघचालक डॉ मोहन भागवत ने उत्तर दिए।

भेदभाव और सामाजिक परिवर्तन संबधी प्रश्न के उत्तर में डॉ भागवत ने कहा कि सामाजिक कुरीतियों और भेदभाव का मूल कारण व्यवस्था नहीं, बल्कि मन है। अंधकार को पीटने से नहीं, प्रकाश जलाने से समाप्त किया जाता है। व्यवहार में परिवर्तन से ही भेदभाव मिटेगा। संघ में कई स्वयंसेवक दशकों तक कार्य करते हैं, पर पहचान की अपेक्षा नहीं रखते क्योंकि कार्य ही प्रधान है। संघ में नाम के आगे जाति लिखने का प्रावधान नहीं है।

तकनीक और संस्कार से संबंधित सवाल के उत्तर में उन्होंने कहा कि तकनीक साधन है, साध्य नहीं। उसका उपयोग संयम और अनुशासन से होना चाहिए। परिवार में आत्मीयता और समय देना आवश्यक है, तकनीक के लिए मनुष्य की बलि नहीं चढ़ाई जा सकती। तकनीकी के साथ संस्कार का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। सांस्कृतिक पहचान और शक्ति से संबंधित प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि जो जोड़ने का कार्य करे वही हिंदू है। मातृभूमि के प्रति भक्ति अनिवार्य है। विश्व सत्य से अधिक शक्ति को समझता है, इसलिए शक्ति अर्जित करना आवश्यक है, किंतु उसका उपयोग मर्यादित होना चाहिए।

संघ में राष्ट्रीय स्वयंसेविका संघ से संबंधित सवाल के उत्तर में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेविका संघ पूर्णतः स्वतंत्र हैं। उन्होंने कहा कि सेविका समिति अपने निर्णय स्वयं लेती है और उनका अनुपालन भी करती है। उन्होंने कहा कि देश संचालन में उनकी भागीदारी 33 प्रतिशत ही नहीं, 50 प्रतिशत तक होनी चाहिए। प्रतिबंध काल में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

पर्यावरण, शिक्षा और सामाजिक सद्भाव संबंधित प्रश्न के उत्तर में उन्होंने उत्तराखंड की नदियों और पर्यावरण संरक्षण पर समन्वित नीति और स्थानीय सहभागिता पर जोर दिया। इसके अलावा उन्होंने शिक्षा में पाठ्यक्रम, आरक्षण, वर्गीकरण और समान नागरिक संहिता जैसे विषयों से संबंधित सवालों के भी उत्तर दिए। लिव-एंड-रिलेशन संबंधित सवाल पर उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल गलत है और इस तरह की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि विवाह एक संस्कार है और इस संस्कार के बाद ही पति-पत्नी साथ रह सकते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल

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