आईएमए पासिंग आउट परेड शनिवार को, 16 मित्र देशों के साथ 515 जेंटलमैन कैडेट भरेंगे 'अंतिम पग'

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आईएमए पासिंग आउट परेड शनिवार को, 16 मित्र देशों के साथ 515 जेंटलमैन कैडेट भरेंगे 'अंतिम पग'


देहरादून, 13 जून (हि.स.)। देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में शनिवार को होने वाली पासिंग आउट परेड (पीओपी) राष्ट्रीय गौरव और वैश्विक सैन्य सहयोग का प्रतीक बनेगी। परेड में कुल 515 जेंटलमैन कैडेट अंतिम कदम बढ़ाएंगे, जिनमें 481 भारतीय कैडेट और 16 मित्र देशों के 34 विदेशी कैडेट शामिल हैं। परेड की समीक्षा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी, जो दो दिवसीय दौरे पर देहरादून पहुंच चुकी हैं।

पासिंग आउट परेड के साथ ही 481 भारतीय कैडेट भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में अपनी नई जिम्मेदारियां संभालेंगे, जबकि 16 मित्र देशों के 34 विदेशी कैडेट भी प्रशिक्षण पूर्ण कर अपने-अपने देशों की सेनाओं में सेवाएं देंगे। आईएमए से प्रशिक्षित अधिकारी दुनिया के अनेक देशों की सेनाओं में महत्वपूर्ण दायित्व निभा रहे हैं, जिससे यह संस्थान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैन्य नेतृत्व तैयार करने के प्रमुख केंद्रों में गिना जाता है।

राष्ट्रपति के दौरे और परेड को देखते हुए राजधानी देहरादून में सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर की गई है। पुलिस, खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। शहर के प्रमुख मार्गों, चौराहों और संवेदनशील स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। राष्ट्रपति के प्रस्तावित मार्गों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है और सुरक्षा एजेंसियां लगातार निरीक्षण कर रही हैं।

दून पुलिस ने शहर में प्रवेश करने वाले वाहनों की सघन जांच शुरू कर दी है। जिले की सीमाओं पर स्थापित चेक पोस्टों पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की गहन जांच के साथ सत्यापन अभियान भी चलाया जा रहा है। राष्ट्रपति के कार्यक्रम को लेकर विभिन्न मार्गों पर रूट डायवर्जन योजना भी लागू की गई है।

आईएमए की पासिंग आउट परेड केवल सैन्य परंपरा का आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सैन्य प्रशिक्षण क्षमता और मित्र देशों के साथ मजबूत होते रक्षा संबंधों का भी प्रतीक है। 16 देशों के विदेशी कैडेटों की भागीदारी भारत की बढ़ती सैन्य कूटनीति और वैश्विक रक्षा सहयोग को रेखांकित करती है।

'अंतिम पग' की ऐतिहासिक परंपरा के साथ कैडेटों का अधिकारी बनने का सपना साकार होगा और भारतीय सेना को युवा नेतृत्व की नई खेप मिलेगी। वहीं विदेशी कैडेट अपने देशों में भारतीय सैन्य प्रशिक्षण की उत्कृष्टता का संदेश लेकर लौटेंगे,जिससे अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग को और मजबूती मिलेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

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