स्वस्थ भारत ही विकसित भारत की आधारशिला, 2047 तक विकसित राष्ट्र बनना साझा लक्ष्य : नड्डा

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स्वस्थ भारत ही विकसित भारत की आधारशिला, 2047 तक विकसित राष्ट्र बनना साझा लक्ष्य : नड्डा


देहरादून, 24 जून (हि.स.)। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता जगत प्रकाश नड्डा ने बुधवार को कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य अब पूरे देश का साझा संकल्प बन चुका है। आज हर नागरिक के सामने एक सामान्य लक्ष्य है कि 2047 तक भारत विकसित राष्ट्र बने।

देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि 'सेहत अच्छी होगी तो आर्थिक विकास होगा,क्योंकि इससे उत्पादकता बढ़ेगी। इसलिए स्वास्थ्य क्षेत्र पर विशेष ध्यान देना समय की आवश्यकता है।'

उन्होंने कहा कि देश के आर्थिक विकास की नींव बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था पर टिकी है और स्वस्थ नागरिक ही विकसित भारत के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अब देश में 'हम कर सकते हैं और हम करेंगे' की भावना विकसित हुई है, जिसने विकास और सुशासन को नई दिशा दी है।

केंद्रीय मंत्री ने देश की राजनीतिक और सामाजिक सोच में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय ऐसा था जब आम नागरिकों ने यह मान लिया था कि व्यवस्था में कोई बदलाव संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि लगभग 12-13 वर्ष पहले लोगों के मन में यह धारणा घर कर गई थी कि परिस्थितियां नहीं बदलेंगी, लेकिन पिछले एक दशक में देश की राजनीतिक सोच में व्यापक परिवर्तन आया है।

उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में केंद्र सरकार की नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के मूल ढांचे में महत्वपूर्ण परिवर्तन किया गया। उन्होंने कहा कि पहले स्वास्थ्य सेवाओं का फोकस केवल बीमारी के इलाज तक सीमित था, जबकि वर्तमान सरकार ने उपचार आधारित व्यवस्था के साथ-साथ रोकथाम आधारित स्वास्थ्य प्रणाली को प्राथमिकता दी है।

उन्होंने कहा कि अब स्वास्थ्य क्षेत्र में लोगों को बीमार होने के बाद उपचार उपलब्ध कराने के बजाय बीमारियों की रोकथाम,जागरूकता और समय रहते हस्तक्षेप पर जोर दिया जा रहा है।

उत्तराखंड में स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि एम्स ऋषिकेश स्वास्थ्य क्षेत्र में अग्रणी संस्थान के रूप में उभरा है और ऊधमसिंह नगर में लगभग 500 करोड़ रुपये की लागत से इसका सैटेलाइट सेंटर स्थापित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि एम्स ऋषिकेश में 124 करोड़ रुपये की लागत से क्रिटिकल केयर ब्लॉक विकसित किया गया है। इसके अलावा अल्मोड़ा, ऊधमसिंह नगर, पिथौरागढ़ और हरिद्वार में एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से चार नए मेडिकल कॉलेज विकसित किए जा रहे हैं, जिससे पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और मजबूत होगी।

मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में केंद्र सरकार की पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि लंबे समय तक मानसिक स्वास्थ्य को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिली। उन्होंने कहा कि मानसिक रोगों से प्रभावित लोग अक्सर अपनी समस्या को सार्वजनिक नहीं करना चाहते और कई बार उसे बीमारी के रूप में स्वीकार करने से भी हिचकते हैं।

उन्होंने बताया कि इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने ‘टेली-मानस’ पहल शुरू की है, जिसके तहत टोल-फ्री माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को विशेषज्ञ परामर्श और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र के साथ कार्य कर रही है और विकास योजनाओं का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

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