गंगोत्री ग्लेशियर क्षेत्र में छोटी हिमनदीय झीलों से फिलहाल बड़े खतरे का संकेत नहीं, वाडिया संस्थान ने साफ की स्थिति

WhatsApp Channel Join Now
गंगोत्री ग्लेशियर क्षेत्र में छोटी हिमनदीय झीलों से फिलहाल बड़े खतरे का संकेत नहीं, वाडिया संस्थान ने साफ की स्थिति


देहरादून, 02 सितंबर (हि.स.)। गंगोत्री ग्लेशियर क्षेत्र में कुछ छोटी हिमनदीय झीलों के दिखाई देने और उनसे संभावित खतरे से संबंधित मीडिया रिपोर्टों के बाद उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) ने वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान से स्थिति की वैज्ञानिक जानकारी मांगी। संस्थान ने नवीनतम उपग्रह चित्रों, क्षेत्रीय अवलोकनों और ग्लेशियर की भौगोलिक एवं जलवैज्ञानिक परिस्थितियों के आधार पर स्पष्ट किया है कि फिलहाल इन छोटी झीलों से किसी बड़े तात्कालिक खतरे की स्थिति नहीं है।

वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के अनुसार गंगोत्री ग्लेशियर क्षेत्र में दिखाई देने वाली अधिकांश छोटी ग्लेशियल झीलें अस्थायी प्रकृति की हैं और इनमें जल की मात्रा भी कम होती है। इनका निर्माण मुख्यतः ग्लेशियर की सतह पर बर्फ पिघलने से बने छोटे-छोटे अवसादों में पानी के अस्थायी रूप से जमा होने से होता है।

तापमान, हिमपिघलन, वर्षा और ग्लेशियर की सतह की परिस्थितियों में बदलाव के साथ इन झीलों के आकार तथा जल की मात्रा में तेजी से परिवर्तन हो सकता है। जल निकास, बर्फ के दोबारा जमने अथवा सतही परिस्थितियों में बदलाव के कारण ये झीलें कुछ समय बाद स्वतः समाप्त भी हो सकती हैं।

संस्थान के आकलन के मुताबिक गंगोत्री क्षेत्र में देखी गई झीलों का आकार अपेक्षाकृत छोटा और जल आयतन बहुत कम है। इनमें बड़े हिमनदीय जलाशयों की तरह भारी मात्रा में पानी संचित होने की क्षमता नहीं है। उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर इनसे अचानक बड़े पैमाने पर बाढ़ अथवा ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड जैसी गंभीर आपदा का तत्काल खतरा नहीं पाया गया है।

वाडिया संस्थान ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी हिमनदीय जल निकायों को एक ही श्रेणी में रखना उचित नहीं है। किसी झील के संभावित खतरे का आकलन उसके केवल अस्तित्व के आधार पर नहीं किया जाता, बल्कि उसके आकार, जल आयतन, जल संचयन की प्रकृति, बांध या अवरोध की संरचना, संभावित निकासी मार्ग और आसपास की भौगोलिक परिस्थितियों के समग्र अध्ययन के आधार पर किया जाता है।

संस्थान के अनुसार हिमालयी ग्लेशियरों और हिमनदीय झीलों में जलवायु तथा हिमपिघलन की परिस्थितियों के कारण होने वाले बदलावों की नियमित निगरानी की जा रही है। यूएसडीएमए के सहयोग से उपग्रह आधारित निगरानी के साथ आवश्यकता के अनुसार क्षेत्रीय वैज्ञानिक सर्वेक्षण और अध्ययन भी किए जाते हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रत्येक हिमनदीय झील की भौगोलिक स्थिति, जलग्रहण क्षेत्र, हिमनदीय संरचना और स्थानीय भू-आकृतिक परिस्थितियां अलग होती हैं। इसलिए प्रत्येक झील के संभावित जोखिम का आकलन उसकी स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर पृथक रूप से किया जाना आवश्यक है।

--------

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

Share this story