उत्तराखंड के 12 जिलों में अगले 24 घंटे फ्लैश फ्लड का खतरा, आपदा प्रबंधन तंत्र अलर्ट

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उत्तराखंड के 12 जिलों में अगले 24 घंटे फ्लैश फ्लड का खतरा, आपदा प्रबंधन तंत्र अलर्ट


देहरादून, 10 अगस्त (हि.स.)। उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश के बीच मौसम विभाग ने उत्तराखंड के लिए अगले 24 घंटे का फ्लैश फ्लड रिस्क बुलेटिन जारी किया है। इसके अनुसार मंगलवार शाम 5:30 बजे तक राज्य के 12 जिलों के कुछ जलग्रहण क्षेत्रों और आसपास के इलाकों में कम से मध्यम स्तर के फ्लैश फ्लड का जोखिम बना हुआ है।

मौसम विभाग के हाइड्रोमेट डिवीजन स्थित फ्लैश फ्लड गाइडेंस सेल बुलेटिन के अनुसार अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, चंपावत, देहरादून, टिहरी गढ़वाल, हरिद्वार, नैनीताल, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पौड़ी गढ़वाल के कुछ क्षेत्रों में अचानक बाढ़ का खतरा है। अत्यधिक संतृप्त मिट्टी और लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में सतही जल बहाव और जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि मौसम विभाग और अन्य तकनीकी संस्थानों से प्राप्त चेतावनियों के आधार पर राज्य का आपदा प्रबंधन तंत्र अलर्ट मोड पर है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) से प्रदेश की स्थिति पर 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है और सभी जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि संभावित फ्लैश फ्लड, जलभराव, भूस्खलन और नदी-नालों में अचानक जलस्तर बढ़ने की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को आवश्यक एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के साथ ही किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने के लिए संबंधित एजेंसियों को तैयार रखा गया है।

सुमन ने प्रदेशवासियों और पर्यटकों से मौसम खराब होने या लगातार बारिश की स्थिति में अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि नदी, नालों, गदेरों और बरसाती जलधाराओं के समीप न जाएं तथा जलस्तर बढ़ने पर सुरक्षित स्थानों पर रहें।

उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में छोटी जलधाराओं में भी अचानक तेज जलप्रवाह आ सकता है। ऐसे में पुल-पुलियों, नदी किनारे और जलभराव वाले स्थानों को पार करने का प्रयास न करें। भूस्खलन संभावित मार्गों पर विशेष सावधानी बरतें और यात्रा से पहले मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी प्राप्त करें।

उन्होंने बताया कि राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की ओर से मौसम, नदियों के जलस्तर और प्रदेश के संवेदनशील क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

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