ब्रिटिश संसद में गूंजा शांतिकुंज का संदेश, चिन्मय पण्ड्या ने मानवीय संवेदनाओं व नैतिकता से दूर किसी भी तकनीक प्रगति को बताया विनाशकारी
हरिद्वार, 01 मई (हि.स.)। ब्रिटिश संसद के ऐतिहासिक परिसर में आयोजित 'पीस कॉन्क्लेव' में अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के वैज्ञानिक अध्यात्म के सिद्धांत गूंजे। इस सम्मलेन में शांतिकुंज ने मानवीय संवेदनाओं और नैतिकता से दूर किसी
भी तकनीक प्रगति को विनाशकारी बताया।
हरिद्वार स्थित शांतिकुंज की मीडिया विभाग ने बताया कि लंदन में स्थित ब्रिटिश संसद के ऐतिहासिक परिसर में आयोजित 'पीस कॉन्क्लेव' में अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रतिनिधि और देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने भाग लिया। उन्होंने सम्मेलन में नैतिक एआई और वैश्विक शांति का भविष्य विषय पर दुनिया के प्रतिष्ठित नीति-निर्धारकों, वैज्ञानिकों और विचारकों को संबोधित किया।
डॉ. पण्ड्या ने युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के वैज्ञानिक अध्यात्म के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीकी प्रगति तब तक विनाशकारी है, जब तक वह मानवीय संवेदनाओं और नैतिकता से न जुड़ी हो। डॉ. पण्ड्या ने आगाह किया कि भविष्य की सुरक्षा केवल गणितीय एल्गोरिदम से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए मनुष्य के भीतर 'नैतिक विवेक' का जाग्रत होना अनिवार्य है।
इससे पहले सम्मेलन का शुभारंभ 'फाउंडेशन फॉर इंटरनेशनल लॉ' (एफआईएल) के निदेशक लॉर्ड कृष रावल, आर्डर ऑफ़ द ब्रिटिश एम्पायर (ओबीई) ने किया। लॉर्ड रावल ने एआई और अध्यात्म के अनूठे संवाद को भविष्य की सुरक्षा के लिए अनिवार्य बताया और 'साउथ एशियाई इंस्टिट्यूट फॉर पीस एंड रेकन्सीलिएशन' (एसएआईपीआर) के प्रतिनिधि के रूप में डॉ. चिन्मय पण्ड्या की उपस्थिति को गौरवपूर्ण बताया।
सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि यूके एआई पॉलिसी लीड ओलिवर रिची ने सरकारी नीतियों के माध्यम से एआई को वैश्विक सुरक्षा का आधार बनाने पर जोर दिया। वहीं, ऑक्सफोर्ड मार्टिन एआई गवर्नेंस इनिशिएटिव के निदेशक प्रो. रॉबर्ट ट्रेजर ने एआई के सुरक्षित उपयोग और इसके 'गवर्नेंस' पर तकनीकी व कूटनीतिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किए। इरोज इंडस्ट्रीज के चेयरपर्सन मिस्टर किशोर लुल्ला और 'गुड फेथ पार्टनरशिप' के संस्थापक लॉर्ड रसेल रूक (ओबीई) ने भी समाज पर एआई के सकारात्मक और नैतिक प्रभावों को साझा किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

