दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर में पर्यावरण संरक्षण पर जोर: मंत्री उनियाल

WhatsApp Channel Join Now
दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर में पर्यावरण संरक्षण पर जोर: मंत्री उनियाल


दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर में पर्यावरण संरक्षण पर जोर: मंत्री उनियाल


दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर में पर्यावरण संरक्षण पर जोर: मंत्री उनियाल


देहरादून, 13 अप्रैल (हि.स.)। उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना को विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए पर्यावरणीय पहलुओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आने के साथ पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा भी मिलेगा।

वन मंत्री सुबोध उनियाल साेमवार काे राजपुर रोड स्थित वन मुख्यालय के मंथन सभागार में दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना में वन्यजीव संरक्षण काे लेकर पत्रकार वार्ता कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि इस कॉरिडोर का 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उद्घाटन करेंगे। मंत्री उनियाल ने बताया कि निर्माण के दौरान वन्यजीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए साउंड बैरियर और लाइट बैरियर जैसी व्यवस्थाएं भी की गई हैं, ताकि शोर और प्रकाश प्रदूषण का असर न्यूनतम रहे। वन मंत्री ने बताया कि इस परियोजना का अंतिम 20 किलोमीटर हिस्सा उत्तर प्रदेश के शिवालिक वन क्षेत्र और उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व व देहरादून वन प्रभाग के घने जंगलों से होकर गुजरता है। ऐसे में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए विशेष उपाय किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि परियोजना के तहत वन भूमि हस्तांतरण के बदले करीब 165.5 हेक्टेयर क्षेत्र में व्यापक स्तर पर प्रतिपूरक वृक्षारोपण किया गया है, जिसमें लगभग 1.95 लाख पौधे लगाए गए हैं। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग कमेटी के निर्देशों के तहत 40 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि से वन एवं वन्यजीव संरक्षण के लिए इको-रेस्टोरेशन के कार्य भी किए जा रहे हैं।

परियोजना की सबसे बड़ी खासियत एशिया का लगभग 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर है, जिसे खासतौर पर वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए विकसित किया गया है। इसमें हाथियों के लिए अंडरपास सहित अन्य वन्यजीव मार्ग भी बनाए गए हैं, जिससे उनकी निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हो सके।

मंत्री ने कहा कि इस कॉरिडोर के निर्माण से मानव–वन्यजीव संघर्ष में कमी आएगी और विभिन्न प्रजातियों के बीच बेहतर आनुवंशिक आदान-प्रदान (जीन पूल) संभव हो सकेगा, जो जैव विविधता संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। साथ ही अनुमान है कि अगले 20 वर्षों में इस परियोजना से 2.44 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो लगभग 60–65 लाख पेड़ों द्वारा कार्बन अवशोषण के बराबर है। इसके अलावा करीब 19 प्रतिशत ईंधन की बचत भी होगी। उन्होंने कहा कि यह कॉरिडोर न केवल यातायात को सुगम बनाएगा और यात्रा समय घटाएगा, बल्कि पर्यटन, व्यापार और स्थानीय रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देगा, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने इसे पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और पारिस्थितिक संतुलन का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि यह परियोजना भविष्य की अधोसंरचना योजनाओं के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगी। मंत्री ने कहा कि यह कॉरिडोर न केवल यातायात को सुगम बनाएगा और यात्रा समय घटाएगा, बल्कि पर्यटन, व्यापार और स्थानीय रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देगा, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने इसे पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और पारिस्थितिक संतुलन का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि यह परियोजना भविष्य की अधोसंरचना योजनाओं के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगी।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

Share this story