वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस में बोले हर्ष संघवी-गुजरात का जीडीपी में 8 फीसद योगदान

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वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस में बोले हर्ष संघवी-गुजरात का जीडीपी में 8 फीसद योगदान


वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस में बोले हर्ष संघवी-गुजरात का जीडीपी में 8 फीसद योगदान


सूरत, 01 मई (हि.स.)। सूरत में दो दिवसीय वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस में उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि छोटे व्यापारियों और निवेशकों के हितों को ध्यान में रखते हुए रीजनल समिट की शुरुआत की गई है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वर्ष 2003 में शुरू किया गया वाइब्रेंट गुजरात आज एक विशाल वैश्विक मंच बन चुका है। प्रारंभ में 76 एमओयू से शुरू हुई इस पहल में वर्ष 2010 तक 41 हजार से अधिक एमओयू हुए, जिनकी कुल राशि 26 लाख करोड़ रुपये तक पहुंची है।

उप मुख्यमंत्री संघवी ने कहा कि वर्ष 2003 में गुजरात का जीडीपी 1.19 लाख करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2012-13 में 7.20 लाख करोड़ तक पहुंचा और वर्तमान में 27 लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है। देश की कुल आबादी का 6 प्रतिशत और 5 प्रतिशत भू-भाग रखने वाला गुजरात देश के जीडीपी में 8 प्रतिशत योगदान दे रहा है। उन्होंने बताया कि मर्चेंटाइल क्षेत्र में गुजरात का देश में 27 प्रतिशत तथा कार्गो हैंडलिंग में 40 प्रतिशत योगदान है। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में भी राज्य की प्रगति अन्य राज्यों की तुलना में दोगुनी है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उद्योगों और निवेशकों के लिए सहायक भूमिका निभा रही है तथा प्रक्रियाओं को सरल बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वर्ष 2024-25 में 5 हजार करोड़ रुपये से अधिक का इंसेंटिव वितरित किया गया है, जबकि चालू वर्ष में यह आंकड़ा 7 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ डेटा सेंटर और एविएशन जैसे क्षेत्रों में भी नए अवसर विकसित कर रही है। दक्षिण गुजरात वर्तमान में राज्य के जीडीपी में 25 प्रतिशत योगदान दे रहा है और इस हिस्से को बढ़ाने के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र की योजना पर कार्य शुरू किया गया है।

उन्होंने कहा कि सूरत अब केवल डायमंड और टेक्सटाइल तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के लगभग 60 प्रतिशत सोलर पैनल का निर्माण यहां हो रहा है। डांग, तापी और नवसारी जैसे क्षेत्रों से उद्योगों को डेढ़ घंटे में पोर्ट तक पहुंचने की सुविधा मिल रही है, जिससे लॉजिस्टिक लागत में कमी आई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे

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