तन्मय शुक्ला 7 मार्च को भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट बनकर परिवार की 185 साल पुरानी सैन्य विरासत आगे बढ़ाएंगे
- गया के ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में 7 मार्च को होगी पासिंग आउट परेड
नई दिल्ली, 03 मार्च (हि.स.)। भारतीय सेना के नए-नवेले अधिकारियों की पासिंग आउट परेड 7 मार्च को गया (बिहार) के ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) में होगी। इस बार यहां जेंटलमैन कैडेट तन्मय शुक्ला ऑलिव ग्रीन रंग की वर्दी पहनकर अपने परिवार की 185 साल पुरानी सैन्य विरासत को आगे बढ़ाएंगे। वह अपने उस परिवार की पांचवीं पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसका आदर्श वाक्य 'देश की सेवा करना हमारा कर्तव्य, समाज की सेवा करना हमारा मिशन' है।
ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में तन्मय शुक्ला को बतौर लेफ्टिनेंट के तौर पर भारतीय सेना में कमीशन किया जाएगा। इससे उनके परिवार की 185 साल पुरानी मिलिट्री परंपरा पांचवीं पीढ़ी तक आगे बढ़ेगी। शुक्ला परिवार की सैन्य परंपरा 1841 में शुरू हुई थी, जो आज भी जारी है। इस परिवार का सैन्य सफर हवलदार कर्ता राम शुक्ला के साथ शुरू हुआ, जिन्होंने 1841 से 1859 तक बंगाल आर्मी की 32 बंगाल नेटिव इन्फेंट्री (ब्राह्मण) में सेवा की। उनकी सेवा के दौरान 1852 में दूसरा एंग्लो-बर्मी युद्ध और 1857 का भारतीय विद्रोह का समय शामिल था। वे 1859 में रिटायर हुए।
दूसरी पीढ़ी के नायक हरि नारायण शुक्ला ने 1909 और 1923 के बीच सेवा की। पहले विश्व युद्ध के दौरान उन्हें स्वेज नहर की रक्षा के लिए तैनात किया गया था और बाद में उन्होंने 14वें भारतीय डिवीजन के तहत मेसोपोटामिया अभियान में सेवा की। 1922 में तीसरी ब्राह्मण बटालियन के भंग होने के बाद उन्हें आर्मी सर्विस कोर बटालियन में ट्रांसफर कर दिया गया और 1923 में रिटायर कर दिया गया।
तीसरी पीढ़ी के लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीनिवास शुक्ला ने 1954 से 1990 तक सेवा की। उन्होंने 1962 में देहरादून की इंडियन मिलिट्री एकेडमी से 35 मीडियम रेजिमेंट (आर्टिलरी) में कमीशन प्राप्त करने के बाद चीन-भारत युद्ध (1962), 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्धों और 1987 में श्रीलंका में ऑपरेशन पवन के दौरान सेवा की। सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने सितंबर 2020 में ग्रामीण इलाकों में मुफ्त मेडिकल सेवाएं देने के लिए सैनिक परमार्थ चिकित्सालय ट्रस्ट की स्थापना की। एक जून 2021 को उनका निधन हो गया।
चौथी पीढ़ी के कर्नल बिपिन कुमार शुक्ला अभी भी सेना में कार्यरत हैं। पांचवीं पीढ़ी के तन्मय शुक्ला ने कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया। इसके बाद तन्मय ने अच्छे मौकों को छोड़कर देश की सेवा करके अपने परिवार की सैन्य विरासत को आगे बढ़ाने का फैसला लिया। सेना में चयन होने के बाद उन्हें प्रशिक्षण के लिए गया (बिहार) के ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में भेजा गया। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद अब जेंटलमैन कैडेट तन्मय शुक्ला 7 मार्च को पासिंग आउट परेड के दौरान लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त करेंगे।
हिन्दुस्थान समाचार/सुनीत निगम

