सुशासन में अग्रणी बना त्रिपुरा, पूर्वोत्तर के लिए बन रहा नीति मार्गदर्शक : मुख्यमंत्री
अगरतला, 18 जनवरी (हि.स.)। त्रिपुरा ने सुशासन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति करते हुए खुद को देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित किया है और अब पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों के लिए नीति निर्धारण का मार्गदर्शन कर रहा है। यह बात त्रिपुरा के मुख्यमंत्री प्रो. (डॉ.) माणिक साहा ने आज कही।
प्रज्ञा भवन में रविवार काे आयोजित सुशासन दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि निरंतर संस्थागत सुधारों और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के कारण त्रिपुरा को देश का सातवां ‘फ्रंट-रनर’ राज्य घोषित किया गया है। उन्होंने बताया कि पिछले 8 वर्षों में राज्य को राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर कुल 347 पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।
मुख्यमंत्री साहा ने कहा कि सुशासन कोई एक बार की प्रक्रिया नहीं, बल्कि पारदर्शी निर्णय प्रणाली, प्रभावी संस्थानों और मापनीय परिणामों के माध्यम से सरकार और जनता के बीच विश्वास कायम करने की सतत प्रक्रिया है।
उन्होंने बताया कि अगस्त, 2023 में राज्य में सुशासन विभाग की स्थापना की गई और इसके बाद दिसंबर, 2023 में नीति आयोग के मार्गदर्शन में त्रिपुरा इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन की शुरुआत की गई।
उन्होंने कहा कि नीति आयोग ने त्रिपुरा इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन को देश के सात प्रमुख राज्य स्तरीय नीति संस्थानों में शामिल किया है। यह संस्थान नीति निर्माण, परियोजनाओं की निगरानी और प्रशासनिक सुधारों में अहम भूमिका निभा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने रिकॉर्ड प्रबंधन और संपत्ति प्रबंधन नीतियों को लागू किया है तथा जिला स्तर पर सुशासन सूचकांक विकसित किया है। इस सूचकांक के माध्यम से स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचा और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में प्रशासनिक प्रदर्शन का आकलन किया जाता है।
कार्यक्रम में मुख्य सचिव जेके सिन्हा ने कहा कि त्रिपुरा की सुशासन पहल की केंद्र सरकार ने भी सराहना की है। पुलिस महानिदेशक अनुराग ने कानून-व्यवस्था पर अपने विचार रखे, जबकि सुशासन सचिव किरण गित्ते ने वर्तमान और भावी कार्यक्रमों की जानकारी दी। कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारी और जिला प्रशासन के अधिकारी भी उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

