बीरभूम की तृप्ति मुखर्जी को पद्मश्री, सम्मान मां को समर्पित करने की इच्छा

WhatsApp Channel Join Now
बीरभूम की तृप्ति मुखर्जी को पद्मश्री, सम्मान मां को समर्पित करने की इच्छा


कोलकाता, 26 जनवरी (हि. स.)। पद्मश्री सम्मान प्राप्तकर्ताओं की सूची में इस वर्ष पश्चिम बंगाल की 11 हस्तियों के नाम शामिल हैं। इनमें बीरभूम जिले के सिउड़ी की प्रसिद्ध कारीगर तृप्ति मुखर्जी भी हैं। उन्हें यह सम्मान कला एवं हस्तशिल्प के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया गया है। वह इस सम्मान को अपनी मां को समर्पित करना चाहती हैं।

वे लंबे समय से बंगाल की पारंपरिक कांथा स्टिच हस्तशिल्प (एक साथ सिले हुए पुराने कपड़ों की परत लगाना या कढ़ाई करना) से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने इस कला की शिक्षा अपनी मां माया बनर्जी से प्राप्त की। बीते लगभग चार दशकों से वह इस क्षेत्र में सक्रिय हैं और अब तक 20 हजार से अधिक महिलाओं को हस्तशिल्प का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी हैं। वर्तमान में भी वह लगभग 400 महिलाओं को नियमित रूप से इस कला का प्रशिक्षण दे रही हैं।

तृप्ति मुखर्जी ने बताया कि पद्मश्री सम्मान की सूचना उन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय से फोन के माध्यम से दी गई। हिन्दुस्थान समाचार से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि मैंने कांथा स्टिच का काम अपनी मां माया बनर्जी से सीखा। करीब 40 वर्षों से इस कला से जुड़ी हूं। आदिवासी गांवों में जाकर आदिवासी महिलाओं को यह काम सिखाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास करती रही हूं।

उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय कला और हस्तशिल्प के प्रचार-प्रसार के लिए भारत सरकार ने उन्हें बर्मिंघम, लंदन और हाल ही में जापान भी भेजा था। गौरतलब है कि इससे पहले भी तृप्ति मुखर्जी को उनके कार्यों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है। पद्मश्री मिलने पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि यह मेरी लंबे समय से इच्छा थी। इस सम्मान से बेहद खुशी हो रही है। मैं यह पुरस्कार अपनी मां को समर्पित करना चाहती हूं।

तृप्ति मुखर्जी का यह सम्मान न केवल बीरभूम बल्कि पूरे बंगाल के लिए गर्व की बात है और पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इस सम्मान की घोषणा के बाद इलाके के लोगों में भी खुशी की लहर है।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

Share this story