ट्राइब्स आर्ट फेस्ट सांस्कृतिक धरोहर को आजीविका के अवसरों में बदलने का सशक्त माध्यमः जोएल ओराम

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ट्राइब्स आर्ट फेस्ट सांस्कृतिक धरोहर को आजीविका के अवसरों में बदलने का सशक्त माध्यमः जोएल ओराम


ट्राइब्स आर्ट फेस्ट सांस्कृतिक धरोहर को आजीविका के अवसरों में बदलने का सशक्त माध्यमः जोएल ओराम


- 2 से 13 मार्च तक चलने वाला ट्राइब्स आर्ट फेस्ट का आगाज

नई दिल्ली, 02 मार्च (हि.स.)। केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने सोमवार को ट्राइब्स आर्ट फेस्ट का आगाज करते हुए कहा कि

प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के विस्तार, तथा ट्रैफेड के माध्यम से बाजार से जोड़ने जैसी पहलों के साथ इस फेस्ट जैसे मंच सांस्कृतिक धरोहर को आजीविका के अवसरों में बदलने का सशक्त माध्यम हैं।

त्रावनकोर पैलेस में शुरू हुए 12 दिवसीय ‘ट्राइब्स आर्ट फेस्ट में लोगों को संबोधित करते हुए जुएल ओराम ने कहा किउद्घाटन अवसर पर मंत्री जुएल ओराम ने कहा कि परंपरागत से आधुनिक रूपों तक, चित्रकला सदियों में विकसित हुई है। मंत्रालय लुप्तप्राय जनजातीय कलाओं के संरक्षण और संवर्धन के साथ-साथ जनजातीय समुदायों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए ग्रामीण लोगों और जनजातीय लोगों का विकास बेहद जरूरी है। इसी दिशा में इस फेस्ट का आयोजन किया जा रहा है जिसमें 30 से अधिक जनजातीय कला रूपों की 1,000 से ज्यादा कलाकृतियाँ प्रदर्शित की जा रही हैं और 75 से अधिक जनजातीय कलाकार भाग ले रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुँचकर जनजातीय कलाकारों का समर्थन करें और भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत को करीब से देखें।

2 से 13 मार्च तक चलने वाला इस महोत्सव आयोजन जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा फिक्की और नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट के सहयोग से किया गया है। महोत्सव में प्रदर्शित कला परंपराएँ भारत की विविध सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती हैं, जिनमें वर्ली (महाराष्ट्र), गोंड (मध्य प्रदेश),भील (मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात),डोकरा (पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, ओडिशा),सोहराय (झारखंड),सौर (ओडिशा),कोया (तेलंगाना, आंध्र प्रदेश),कुरुंबा (तमिलनाडु),बोडो (असम व पूर्वोत्तर),उरांव (झारखंड, छत्तीसगढ़)

मंडाना (राजस्थान, मध्य प्रदेश),गोडना (बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़),पूर्वोत्तर के बाँस शिल्प शामिल है।

इस महोत्सव का विशेष आकर्षण ‘प्रोजेक्ट खुम – रूटेड इन क्रिएटिविटी’ है। ‘खुम’ का अर्थ कोकबोरोक (त्रिपुरा) भाषा में ‘फूल’ है। इस सहभागी कला स्थापना में जनजातीय महिला कलाकार सामूहिक रूप से रंगों और पारंपरिक प्रतीकों के माध्यम से एक साझा कलाकृति का निर्माण करती हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की भावना से प्रेरित यह पहल महिलाओं की सृजनात्मक शक्ति और सांस्कृतिक नेतृत्व को रेखांकित करती है।

महोत्सव केवल प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है। इसमें जनजातीय कला पुनरुत्थान और सतत भविष्य पर पैनल चर्चा, समकालीन परिप्रेक्ष्य में जनजातीय कला पर विमर्श कलाकार–छात्र मेंटरशिप सत्र लाइव पेंटिंग डेमोंस्ट्रेशन जनजातीय संगीत व नृत्य प्रस्तुतियाँ विशेष आवश्यकताओं वाले व्यक्तियों के लिए समावेशी कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी।

देशभर से कला का अध्ययन कर रहे 100 से अधिक जनजातीय छात्रों को वरिष्ठ कलाकारों के मार्गदर्शन और प्रत्यक्ष अनुभव का अवसर प्रदान किया जा रहा है। ट्राइब्स आर्ट फेस्ट 3 मार्च 2026 से आम जनता के लिए खुला है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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