बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर जनजातीय समागम में आदिवासी संस्कृति की दिखी झलक

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बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर जनजातीय समागम में आदिवासी संस्कृति की दिखी झलक


नई दिल्ली, 24 मई (हि.स.)। भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के कार्यक्रम में जनजातीय समागम में देशभर के आदिवासी समुदायों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों से आए कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य, गीत और लोक वाद्ययंत्रों का प्रदर्शन किया।

यहां आयोजित जयंती कार्यक्रम के समागम में पारंपरिक परिधानों और जनजातीय कला ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। आयोजन के दौरान मांदर और ढोल की थाप पर कलाकारों ने समूह प्रस्तुतियां दीं।

बस्तर संभाग से आए लोकेश कुमार कारोथी ने कहा कि नक्सलवाद से जनजातीय समाज की छवि प्रभावित हुई है। बाहरी समाज में पूरे जनजातीय समुदाय को नक्सलवाद से जोड़कर देखा जाता है, जबकि ऐसा नहीं है। कारोथी ने कहा कि नक्सलवाद के कारण जनजातीय संस्कृति को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा और विकास से जुड़े प्रयासों के बाद स्थिति में बदलाव आया है और लोगों में विश्वास बढ़ा है।

आयोजन में शामिल लोगों ने जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपरा और पहचान को संरक्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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( रिपोर्ट - सौरव राय )

हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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