तमिलनाडु : सबसे युवा मुख्यमंत्रियों की सूची में शामिल हुए जोसेफ विजय
चेन्नई, 11 मई (हि.स.)। तमिलनाडु की राजनीति में रविवार को एक नए दौर की शुरुआत हुई, जब अभिनेता से राजनेता बने जोसेफ विजय ने राज्य के 18वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इसके साथ ही वह तमिलनाडु के सबसे कम उम्र में मुख्यमंत्री बनने वाले नेताओं की सूची में पांचवें स्थान पर पहुंच गए हैं। उनकी यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने अपनी पार्टी ‘तमिलग वेट्री काजगम’ की स्थापना के केवल दो वर्षों के भीतर सत्ता हासिल कर ली।
तमिलनाडु के राजनीतिक इतिहास में अब तक 18 नेता मुख्यमंत्री पद संभाल चुके हैं। इनमें सबसे कम उम्र में मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड जे. जयललिता के नाम दर्ज है। उन्होंने वर्ष 1991 में मात्र 43 वर्ष की आयु में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर इतिहास रचा था। जयललिता राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री भी थीं और लंबे समय तक तमिलनाडु की सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिनी जाती रहीं।
सबसे कम उम्र में मुख्यमंत्री बनने वालों की सूची में दूसरे स्थान पर द्रविड़ राजनीति के दिग्गज नेता एम. करुणानिधि हैं, जिन्होंने 44 वर्ष की उम्र में मुख्यमंत्री पद संभाला था। तीसरे स्थान पर ओ. पन्नीरसेल्वम हैं, जिन्होंने 50 वर्ष की आयु में मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।
पूर्व मुख्यमंत्री के. कामराज 51 वर्ष की आयु में मुख्यमंत्री बने थे। अब जोसेफ विजय ने भी 51 वर्ष की उम्र में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर इस सूची में अपना स्थान बना लिया है। हालांकि समान आयु होने के बावजूद कामराज को उनसे पहले स्थान दिया गया है।
इसके अलावा द्रविड़ आंदोलन के प्रमुख नेता सी. एन. अन्नादुरई 57 वर्ष की आयु में मुख्यमंत्री बने थे, जबकि लोकप्रिय अभिनेता-राजनेता एम. जी. रामचंद्रन ने 60 वर्ष की आयु में राज्य की कमान संभाली थी।
हाल के वर्षों में मुख्यमंत्री बने नेताओं की बात करें तो एदप्पाड़ी के. पलानीस्वामी 62 वर्ष की आयु में मुख्यमंत्री बने, जबकि एम. के. स्टालिन ने 68 वर्ष की उम्र में मुख्यमंत्री पद संभाला।
तमिलनाडु के राजनीतिक इतिहास में के. कामराज को उनकी सादगी, प्रशासनिक क्षमता और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए विशेष सम्मान प्राप्त है। उन्हें “शिक्षा की आंखें खोलने वाले नेता” के रूप में याद किया जाता है।
वहीं, सी. एन. अन्नादुरई ने तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव लाते हुए कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर पहली बार द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) को सत्ता तक पहुंचाया। उनके निधन के बाद एम. करुणानिधि लंबे समय तक राज्य की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल रहे।
अब जोसेफ विजय की एंट्री को तमिलनाडु की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। फिल्मी दुनिया में लोकप्रियता हासिल करने के बाद राजनीति में उनका तेज उभार और कम समय में सत्ता तक पहुंचना राज्य की राजनीति में नई मिसाल माना जा रहा है।-----------------
हिन्दुस्थान समाचार / Dr. Vara Prasada Rao PV

