तमिलनाडु चुनाव: शिवकाशी विधानसभा क्षेत्र में रोजगार बनाम सुरक्षा बड़ा मुद्दा

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तमिलनाडु चुनाव: शिवकाशी विधानसभा क्षेत्र में रोजगार बनाम सुरक्षा बड़ा मुद्दा


शिवकाशी, 21 मार्च (हि.स.)। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर तमिलनाडु के औद्योगिक शहर शिवकाशी, जिसे “कुट्टी जापान” के नाम से जाना जाता है, में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। तमाम दल अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। ऐसे में यह सवाल अहम हो गया है कि यहां के मतदाताओं की अपेक्षाएं क्या हैं और पिछले चुनावी वादों पर कितना अमल हुआ है।

दरअसल, शिवकाशी की पहचान देश के प्रमुख पटाखा उद्योग केंद्र के रूप में है, लेकिन यही उद्योग यहां की सबसे बड़ी चुनौती भी बन गया है। पटाखा फैक्ट्रियों में लगातार होने वाली दुर्घटनाएं लंबे समय से गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं। बीते वर्षों में इन हादसों में कई मजदूरों की जान जा चुकी है, बावजूद इसके अब तक कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया है।

इसके अलावा, प्रदूषण, रासायनिक कचरे का निस्तारण, मौसमी रोजगार और मजदूरों के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं भी स्थानीय लोगों के लिए अहम मुद्दे बने हुए हैं। यहां के मतदाताओं का कहना है कि सरकारें बदलती रहीं, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

हालांकि, यह भी सच है कि शिवकाशी रोजगार का बड़ा केंद्र है। यहां हजारों पटाखा फैक्ट्रियों में करीब 7 लाख लोग सीधे और 3 लाख लोग अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार से जुड़े हैं। इस उद्योग का सालाना कारोबार लगभग 3,500 करोड़ रुपये है। दीपावली और पंगुनी पोंगल जैसे अवसरों पर मजदूरों को विशेष बोनस भी दिया जाता है।

इसके अलावा, कैलेंडर, नोटबुक और पाठ्यपुस्तकों की छपाई एवं बाइंडिंग का उद्योग भी यहां बड़े पैमाने पर संचालित होता है, जिसका वार्षिक कारोबार करीब 2,000 करोड़ रुपये है। सूखा-प्रभावित इलाकों में किसान मुख्यतः मक्का की खेती करते हैं।

राजनीतिक दृष्टिकोण से देखें, तो विरुधुनगर जिले में स्थित शिवकाशी विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2021 के चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार अशोकन ने अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) की लक्ष्मी गणेशन को 17,319 मतों से हराया था। करीब ढाई लाख मतदाताओं वाले इस क्षेत्र में 2021 के विधानसभा चुनाव में अशोकन को 78,947 वोट मिले थे, जबकि लक्ष्मी गणेशन को 61,628 मत प्राप्त हुए थे। तीसरे स्थान पर नाम तमिलर काची और चौथे स्थान पर अम्मा मक्कल मुनेत्र कषगम के उम्मीदवार रहे। यह सीट विरुधुनगर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है, जहां 2024 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस को बढ़त मिली थी।

राजनीतिक दृष्टि से अन्नाद्रमुक को इस क्षेत्र में पारंपरिक रूप से मजबूत माना जाता है, जिसने 1977 से अब तक करीब पांच बार जीत दर्ज की है। ऐसे में आगामी चुनाव में उसके लिए संभावनाएं बनी हुई हैं, हालांकि मुकाबला कड़ा रहने के आसार हैं।

वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में नाम तमिलर काची की ओर से डायना को उम्मीदवार घोषित किया गया है, जबकि अन्नाद्रमुक, द्रमुक और तमिलगा वेत्री कषगम ने अभी तक अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार चुनाव में वही पार्टी बढ़त बनाएगी, जो रोजगार के साथ-साथ सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण और श्रमिक कल्याण जैसे मुद्दों पर ठोस और भरोसेमंद समाधान पेश करेगी।

ऐसी मान्यता है कि दक्षिण मदुरै पर शासन करने वाले हरिकेसरी पराक्रम पांडियन काशी से शिवलिंग लाकर यहां पूजा करते थे, जिसके कारण इस नगर का नाम ‘शिवकाशी’ पड़ा। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसकी औद्योगिक प्रगति से प्रभावित होकर इसे “कुट्टी जापान” की उपाधि दी थी।

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हिन्दुस्थान समाचार / Dr. Vara Prasada Rao PV

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